ईश्वरीय वैभव जगाने का पर्व : गुरुपूर्णिमा Guru Purnima
अपना ईश्वरीय वैभव जगाने का पर्व : गुरुपूर्णिमा (पूज्यश्री की दिव्य अमृतवाणी) गुरुपूर्णिमा का दूसरा नाम है व्यासपूर्णिमा । वेद के गूढ रहस्यों का विभाग करनेवाले कृष्णद्वैपायन की याद में यह गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया जाता है । भगवान वेदव्यास ने बहुत कुछ दिया मानव-जाति को । विश्व में जो भी ग्रंथ हैं, जो भी मत, मजहब, पंथ हैं उनमें अगर कोई ऊँची बात है, बडी बात है तो व्यासजी का ही प्रसाद है । व्यासोच्छिष्टं जगत्सर्वम् । एक लाख श्लोकों का ग्रंथ ‘महाभारत' रचा उन महापुरुष ने और यह दावा किया कि जो महाभारत में है वही और जगह है व जो महाभारत में नहीं है वह दूसरे ग्रंथों में नहीं है : यन्न भारते तन्न भारते । चुनौती दे दी और आज तक उनकी चुनौती को कोई स्वीकार नहीं कर सका । ऐसे व्यासजी, इतने दिव्य दृष्टिसम्पन्न थे कि पद-पद पर पांडवों को बताते कि अब ऐसा होगा और कौरवों को भी बताते कि तुम ऐसा न करो । व्यासजी का दिव्य ज्ञान और आभा देखकर उनके द्वारा ध्यानावस्था में बोले गये ‘महाभारत' के श्लोकों का लेखनकार्य करने के लिए गणपतिजी राजी हो गये । कैसे दिव्य आर्षद्रष्टा पुरुष थे ! ऐसे वेदव्...