देवशयनी एकादशी : हरिशयनी एकादशी
जिस तरह हम 24 घंटे के पूरे दिवस में लगभग एक तिहाई 8 घंटे निद्रा लेते है। उसी तरह भगवान भी वर्ष में एक तिहाई अर्थात 4 माह की निद्रा लेते हैं। तर्क विर्तक और कुतर्क कितने भी हों। मगर सच यही है कि शरीर को अपनी ऊर्जा को पुनः प्राप्त करने हेतु निद्रा लेनी ही पढ़ती है। यही वैज्ञानिक नियम ईश्वरीय व्यवस्था पर भी लागू होता है। देवशयनी एकादशी 'हरिशयनी एकादशी' भगवान विष्णु - अन्य नाम 'पद्मनाभा' एकादशी, 'हरिशयनी' एकादशी अनुयायी - हिंदू, भारतीय उद्देश्य - ब्रह्म वैवर्त पुराण में इस एकादशी का विशेष माहात्म्य लिखा है। इस व्रत को करने से प्राणी की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, सभी पाप नष्ट होते हैं। प्रारम्भ - पौराणिक काल तिथि - आषाढ़ शुक्ल एकादशी अनुष्ठान - इस दिन उपवास करके भगवान विष्णु की प्रतिमा को आसन पर आसीन कर उनका षोडशोपचार सहित पूजन करके, उनके हाथों में शंख, चक्र, गदा, पद्म सुशोभित कर उन्हें पीताम्बर, पीत वस्त्रों व पीले दुपट्टे से सजाया जाता है। पंचामृत से स्नान करवाकर, तत्पश्चात् भगवान की धूप, दीप, पुष्प आदि से पूजा कर आरती उतारी जाती है। धार्म...