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दीपावली के महत्वपूर्ण पहलू Deepawali festival

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  दीपावली के सबसे महत्वपूर्ण पहलू दीपावली का पांच दिन का पर्व वर्षा ऋतु के बाद प्रारम्भ होता है, इसके पीछे अनेकानेक घटनाक्रम लोक कथायें एवं मान्यतायें स्थापित है। इसी कारण से यह भारत का सबसे बडा त्यौहार , धार्मिक कार्यक्रम एवं व्यावसायिक क्रय विक्रय का अवसर होता है। इस त्यौहार की तैयारी बहुआयामी व्यवसाय व्यापार के रूप में भी महत्वपूर्ण है। मानव सभ्यता की दृष्टि से इस पर्व की प्रारम्भ मानव सभ्यता के प्रारम्भ से ही माना जाता है। इस त्यौहार का प्रारम्भ पृथ्वी की सृजना के ठीक पूर्व हुये समुद्र मंथन में प्रगट हुये वैद्य धनवंतरी भगवान जो कि चिकित्सा एवं स्वास्थय के देव के प्रगटी करण से होता है। जिसे धन तेरस कहते हैं। दूसरी महत्वपूर्ण पूजा  समुद्र मंथन में  ही प्रगट हुईं धन की देवी लक्ष्मी जी के पूजन से है।  वर्षात के रोगाणुओं विषाणुओं का नष्टीकरणः- इस पर्व के ठीक पूर्व वर्षात का समय होता है। वर्षात के कारण घरों में सीम , आद्रता और अनेकानेक प्रकार की गंदगी या गैर जरूरी चीजों का घरों में जमा हो जाना होता है। जिनकी साफ सफाई जरूरी होती है। दीपावली के ठीक पूर्व सबसे महत्वपूर्ण ...

श्रीराम वनवास से लौटनें पर , 17.5 लाख वर्ष पूर्व आयोजित हुई थी दीपावली

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  रामसेतु Ram - setu (एडम ब्रिज) 17.5 लाख वर्ष पूर्व भगवान श्रीराम 17.5 लाख वर्ष पूर्व जन्मे थे सर्वप्रथम रामसेतु के संदर्भ में 1993 में नासा ने 14 दिसम्बर 1966 को अमरीकी उपग्रह से खींचे चित्रों को विभिन्न विशलेषणों के आधार पर जारी किये। जिसमें माना गया था कि रामसेतु लगभग 17.5 लाख वर्ष पूर्व का है। बाद में इस पर साम्प्रदायिक तत्वों एवं अर्न्तराष्ट्रीय हितनिहित के कथित धर्म संस्थानों ने करवाये।   रामसेतु का चित्र नासा ने 14 दिसम्बर 1966 को जेमिनी-11 से अंतरिक्ष से प्राप्त किया था। इसके 22 साल बाद आई.एस.एस 1 ए ने तमिलनाडु तट पर स्थित रामेश्वरम और जाफना द्वीपों के बीच समुद्र के भीतर भूमि-भाग का पता लगाया और उसका चित्र लिया। इससे अमेरिकी उपग्रह के चित्र की पुष्टि हुई। संभवतः सांसद रघुवीरसिंह कौशल नें लोकसभा में एक प्रश्न तब लगाया था , नासा के द्वारा रामसेतु अर्थाम एडम ब्रिज की आयु के संदर्भ में , लोकसभा में बहुत छोटे से जबाव में 17.5 लाख वर्ष पूर्व का अनुमान नासा के द्वारा लगाया गया माना गया था। इसी आधार पर श्रीराम का जन्म भी 17.5 लाख वर्ष पूर्व का ही माना जायेगा और दीपावली जो कि ...

दीपावली : पारिवारिक पर्सनलटी डेवलपमेंट का वार्षिक आत्म निरिक्षण

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- अरविन्द सिसोदिया  अंधकार रूपी अमावस्या में जन्मे मानव ने परिश्रम से , पुरूषार्थ से जीवन को उजाले में बदला है। अंधकार से प्रकाश की ओर के इस महान दीपोत्सव पर्व पर आपको एवं आपके परिवार को.... दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें एवं बहुत बहुत बधाई। यह पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धी, यश र्कीती और स्वास्थयवर्द्धक हो.... उन्नती के पथ आपके जीवन को और सुखमय बनाये.................. * कल धनतेरस अर्थात धनवंतरी तेरस थी जो स्वास्थय का प्रतिनिधित्व करती है। * आज हनुमान जयंति भी है और रूप चैहदस भी (14वीं ) हनुमान जयंति मित्र धन का प्रतिनिधित्व करती है। रूप चैहदस (14वीं ) मूल रूप से साफ सफाई और सौंदर्य धन का प्रतिनिधित्व करती है। * अमावश्या को महालक्ष्मी पूजन, अपने आय के संसाधनों का प्रतिनिधित्व करती है,इसे हम अर्थ पुरूषार्थ के रूप में भी देख सकते हैं। * पडवां के दिन गोवर्धन पूजा होती है, जो प्रकृति व अन्य जीवों के प्रति मित्रता का धन है। *इसी तरह भाई दौज रिश्ते - नातों रूपी समन्वय धन का प्रतिनिधित्व करती है। धन का मतलब जो जो बातें, संसाधन या गुणवत्तायें, हमारे जीवन सुख को ...

‘धनतेरस’ : पहला सुख निरोगी काया

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भारतीय संस्कृति पूरी तरह वैज्ञानिक व व्यवहारिक है, पहला धन निरोगी काया यानिकी स्वस्थ शरीर ही है। इसीलिये धन के पर्व दीपावली का प्रारम्भ धन तेरह यानी कि धनवंतरी के जन्मदिवस से है।   पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक कृष्ण की त्रयोदशी के दिन धन्वन्तरि त्रयोदशी मनायी जाती है। जिसे आम बोलचाल में ‘धनतेरस’ कहा जाता है।  यह मूलतः धन्वन्तरि जयंती का पर्व है और आयुर्वेद के जनक धन्वन्तरि के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। धनतेरस के दिन नए बर्तन या सोना-चांदी खरीदने की परम्परा है। इस पर्व पर बर्तन खरीदने की शुरआत कब और कैसे हुई, इसका कोई निश्चित प्रमाण तो नहीं है लेकिन ऐसा माना जाता है कि जन्म के समय धन्वन्तरि के हाथों में अमृत कलश था। यही कारण होगा कि लोग इस दिन बर्तन खरीदना शुभ मानते हैं। आने वाली पीढ़ियां अपनी परम्परा को अच्छी तरह समझ सकें, इसके लिए भारतीय संस्कृति के हर पर्व से जुड़ी कोई न कोई लोककथा अवश्य है। दीपावली से पहले मनाए जाने वाले धनतेरस पर्व से  भी जुड़ी एक लोककथा है, जो कई युगों से कही-सुनी जा रही है। पौराणिक कथाओं में धन्वन्तरि के जन्म का वर्णन करते हुए बताया ...