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छोटा लक्ष्य अपराध है : पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम

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 ...मैं यह बहुत गर्वोक्ति पूर्वक तो नहीं कह सकता कि मेरा जीवन किसी के लिये आदर्श बन सकता है; लेकिन जिस तरह मेरी नियति ने आकार ग्रहण किया उससे किसी ऐसे गरीब बच्चे को सांत्वना अवश्य मिलेगी जो किसी छोटी सी जगह पर सुविधाहीन सामजिक दशाओं में रह रहा हो। शायद यह ऐसे बच्चों को उनके पिछड़ेपन और निराशा की भावनाओं से विमुक्त होने में अवश्य सहायता करे।- अब्दुल कलाम    1997 में कलाम साहब को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया जो उनके वैज्ञानिक अनुसंधानों और भारत में तकनीकी के विकास में अभूतपूर्व योगदान हेतु दिया गया था  मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम 'सपने वे नहीं होते, जो आपको रात में सोते समय नींद में आए बल्कि सपने वे होते हैं, जो रात में सोने ही न दें।' ऐसी बुलंद सोच रखने वाले 'मिसाइलमैन' अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम (एपीजे अब्दुल कलाम) भारतीय मिसाइल प्रोग्राम के जनक कहे जाते हैं। जब कलाम ने देश के सर्वोच्च पद , 11वें राष्ट्रपति की शपथ ली थी तो देश के हर वैज्ञानिक का सर फख्र से ऊंचा हो गया था। वे 'मिसाइलमैन' और 'जनता के राष्ट्रपति' के रू...

अटलजी ने पहले ही पाकिस्‍तान पर जीत का ऐलान कर दिया था

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  दिलचस्प किस्सा: जब 22 दिन पहले एक रैली में वाजपेयी ने कर दिया था कारगिल में भारत की जीत का ऐलान कारगिल की जंग को दो दशक से ज्‍यादा का समय हो चुका है. हर किसी को वह पल याद है जब 26 जुलाई 1999 को जम्‍मू कश्‍मीर के कारगिल में भारत और पाकिस्‍तान के बीच तीन माह बाद संघर्ष के खत्‍म होने का ऐलान किया गया था. author TV9 Hindi   Publish Date -  24 December 20Edited By: ऋचा बाजपेई अटल बिहारी वाजपेयी ने पहले ही पाकिस्‍तान पर जीत का ऐलान कर दिया था कारगिल की जंग को दो दशक से ज्‍यादा का समय हो चुका है. हर किसी को वह पल याद है जब 26 जुलाई 1999 को जम्‍मू कश्‍मीर के कारगिल में भारत और पाकिस्‍तान के बीच तीन माह बाद संघर्ष के खत्‍म होने का ऐलान किया गया था. इस संघर्ष में भारत को विजेता करार दिया गया और पाकिस्‍तान को एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी थी. इसके बाद से हर साल 26 जुलाई को कारगिल की जीत का जश्‍न ‘विजय दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है. लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि उस समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने चार जुलाई को ही पाकिस्‍तान पर जीत का ऐलान कर दिया था. भारत रत्‍न देश के लोकप्...

कांग्रेस में अंदर सब कुछ ठीक ठाक नहीं है

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     - अरविन्द सिसौदिया  9414180151     कांग्रेस में अंदर सब कुछ ठीक ठाक नहीं है, कांग्रेस का ही क्षुब्ध जी 23 नेताओं का गुट हार थक कर बैठ चुका हे। अब उसमें आगे चल कर अमिरंदर सिंह और अशोक गहलोत का नाम भी जुड सकता हे। लगातार कांग्रेस चुनाव हार रही हे, 0 - 0  सीटें आनें पर भी उसे शर्म नहीं हे। स्वंय राहुल गांधी चुनाव हार गये मगर अकड बेमिसाल है। पार्टी स्थाई अध्यक्ष बना नहीं पा रही हें। आरोप लगाते हैं अदालत में क्षमा मांगते है। जमानत पर हैं। शब्दावली येशी कि शर्म आती है कि ये कांग्रेस के नेता हैं।  कांग्रेस के जी 23, पंजाब का अमिरंदर सिंह बनाम सि़द्धू, राजस्थान का गहलोत बनाम पायलेट,उतर प्रदेश और मध्यप्रदेश से कांग्रेस के दिग्गज भाजपा में जा चुके हे। हुडडा बनाम शैलजा और भी बहुत सारी विवादित असन्तुष्टतता बनीं हुई है। मकसद सिर्फ इतना है कि राहुल - प्रियंका से कम समझ वाले या उनके आगे सिर छुका कर हां जी, हां जी करने वाला समूह मात्र कांग्रेस रहे । पहले विदेशी रिपोर्ट में छपा था, भारत में भी छपा था कि इनकी नेता अत्यंत धनवान हैं। संभवतः उसी पैसे के बल पर षड...

कांग्रेस ही असल में अपरोक्ष राष्ट्रद्रोह कर रही है - अरविन्द सिसौदिया

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   - अरविन्द सिसौदिया 9414180151  जब से नरेन्द्र मोदी ने दूसरीवार देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला है तब से कांग्रेस का मुखिया या मालिक मिथ्या गांधी परिवार जो अपनी स्वंय की वास्तविक पहचानों का उपयोग नहीं करता है, उधार का गांधी सरनेम उपयोग कर्ता हे। जो ये कभी थे नहीं । अब ये ही तथाकथित गांधी  प्रधानमंत्री पद दूर खिसकते देख हैरान और परेशान है तथा देश का सबक सिखानें के मकसद से, वर्तमान मोदी सरकार को काम नहीं करने देनें के लिये अडंगा राजनिति के तहत लगातार देश में आराजकता उत्पन्न करने हेतु , झूठ के आधार पर तनाव और हुल्लडतंत्र की अव्यवस्था उत्पन्न करने में लगा हुआ है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौर में भी अडंगेपन से पीछे नहीं हटने वाले कृत्यों की राजनिति करने वाली कांग्रेस ही असल में अपरोक्ष राष्ट्रद्रोह कर रही है। यदि यही कृत्य इन्होने चीन में किये होते जो जेल में होते या फिर .....? आप खुद समझ लो क्या हुआ होता ! यह भारत हे, इसमें संविधान की, व्यवस्था की चिन्ता कम होती है। खुदगर्ज राजनिति की चिन्ता ज्यादा होती हे। इस कारण यह तमाशा लगातार बना हुआ है। कई दलों की प्रतिस्प...

प्रथम गुरू मां ही होती हैं

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      महर्षि दयानंद ने कहा था- जिस तरह माता संतानों को प्रेम देती है और उनका हित करना चाहती है, उस तरह और कोई नहीं करता।  बच्चे के प्रति माता का यह स्नेह परमात्मा का प्रकाश है। मातृत्व को इस धरती पर देवत्व का रूप हासिल है। माता त्याग की प्रतिमूर्ति है। अपनी आवश्यकताओं, इच्छाओं, सुख-सुविधाओं तथा आकांक्षाओं का त्याग कर वह अपने परिवार को प्रधानता देती है। हमारी जन्मभूमि भी हमारी माँ है, जो सब कुछ देकर भी हमारी प्रगति से प्रसन्न होती है।    प्रथम गुरू मां "अथ शिक्षा प्रवक्ष्यामः मातृमान् पितृमानाचार्यवान पुरूषो वेदः।" अर्थात्, जब तीन उत्तम शिक्षक, एक माता, दूसरा पिता और तीसरा आचार्य हो तभी मनुष्य ज्ञानवान होगा।       बच्चा जन्म लेने के बाद जब बोलना सीखता है तब वह सबसे पहले जो शब्द बोलता है वो शब्द होता है "मां"। एक मां ही बच्चे को बोलना, खाना-पीना, चलना-फिरना आदि सिखाती है इसलिए एक मां ही हर मनुष्य की प्रथम गुरु होती है।       माता से ही बच्चा संस्कार ग्रहण करता है। माता के उच्चारण व उसकी भाषा से ही वह भाषा-ज्ञा...

भारतीय क्रांति के जनक : बाल गंगाधर तिलक

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   भारतीय क्रांति के जनक : बाल गंगाधर तिलक   'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा' - बाल गंगाधर तिलक    बाल गंगाधर तिलक विवरण जानकारीबाल गंगाधर तिलक, एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। ये भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता हुए; ब्रिटिश औपनिवेशिक प्राधिकारी उन्हें "भारतीय अशान्ति के पिता" कहते थे। उन्हें, "लोकमान्य" का आदरणीय शीर्षक भी प्राप्त हुआ, जिसका अर्थ हैं लोगों द्वारा स्वीकृत । । विकिपीडिया जन्म की तारीख और समय: 23 जुलाई 1856, चिखाली मृत्यु की जगह और तारीख: 1 अगस्त 1920, मुम्बई पत्नी: सत्यभामा (विवा. 1871–1920) माता-पिता: पार्वती बाई गंगाधर, श्री गंगाधर तिलक शिक्षा: गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई (1878–1879), डेक्कन कॉलेज (1873–1877)  अन्याय विरोधी थे बाल गंगाधर तिलक, पत्रकारिता के माध्यम से किया था लोगों को जागृत महान क्रांतिकारियों में से एक बाल गंगाधर तिलक का जन्म इसी दिन हुआ था। बाल गंगाधर तिलक ने भारत को आजाद कराने में अपना पूरा जीवन लगा दिया। वास्तव में, बाल गंगाधर तिलक ने...