मिडिया नक्सलवाद की ढाल न बने

मिडिया नक्सलवाद की ढाल न बने
भारत के मिडिया को आजादी के बाद न जाने किसकी नजर लग गई ।
वह देश की चिंता ही भूल गया, स्वतन्त्रता का संग्राम लड़ने वाला वह मिडिया कहाँ चला गया ।
जब भी नक्सलवादी , आतंकवादी , उग्रवादी , अलगाववादी या घुसपेठ की घटना होती हे ,
अचानक नामी लेखकों के ध्यान हटाने वाले लेख छप जाते हें । अखवार भी जेसे इसी प्रतिच्छा में थे ।
आप नागरिक की सही सोच को मोड़ देने के पीछे क्या मकसद रखते हें समछ से परे हे ।
मगर इतना तय हे की आप सरकार को सही कदम उठाने से रोक देते हें ।
अब युध के तरीके बदल गय हें , देश की कमजोरी का फायदा उठाना भी युध का अंग हे ।
आपस में लड़ाना भी युध का अंग हे , छुपे तोर पर हथियार और पैसा देना भी युध का अंग हें ।
आब सेन्यं युध नहीं , समस्या के नाम से युध होतें हें , आधिकार के नाम से युध होते हें ।
मांग के नाम से , नुकसान के नाम से , विकास के नाम से , उथान के नाम से युध हो रहें हें ।
इन्हे पहचाना होगा , समछना होगा ।
यदि वे भुखमरी से मुक्ति चाहते तो ओधोगिकी करन होने देते , मगर यह स्वीकार नहीं ।
नरेगा चलने देते, सड़कें बनने देते। स्कूल, अस्पताल, कार्य चलने देते । मगर कहानी कुछ और हे ,
अशिक्ष और भुकमरी तो ये बनाये रखना चाहते हें । ताकि इन्हे लड़ाकू मिलते रहें , मुद्दों का भ्रम और छल कुछ और ।
सीधी लड़ाई तो लडनी होगी , उनके चुंगुल को तोडना होगा , अपनी बात कहनी होगी , अपने से जोड़ना होगा ,
आमना सामना तो होगा उनको अपने एक छत्र राज्य में दूसरा तो बुरा लगेगा ही , यही तो लड़ाई हे ।
मिडिया को इन्हीं तर्कों पर ध्यान देना चाहीये ।
अरविन्द सीसोदिया
राधा क्रिशन मंदर रोड ,
ददवारा , वार्ड ५९ कोटा २,
राजस्थान।
०९४१४१ 80151

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

विष्णु के अवतार ' नरसिंह भगवान '

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

खींची राजवंश : गागरोण दुर्ग

खुद मोदी जैसा बन करके , मातृभूमि का तेज बनें

कविता - युगों युगों में एक ही मोदी आता है - अरविन्द सिसोदिया

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

योगिराज श्यामा चरण लाहिरी महाशय Yogiraj Shyama Charan Lahiri Mahasaya

संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को अपमानित करने वालों पर रासुका जैसा कठोर एक्शन हो - अरविन्द सिसोदिया