दंतेवाडा हमारी सम्पूर्ण राजनेतिक विफलता हे .

दंतेवाडा हमारी सम्पूर्ण राजनेतिक विफलता हे , इसे सुरक्छा बलों की या राज्य की विफलता नही कहा जा सकता । हमारे राजनेतिक दल देश द्रोही तत्वों से स्यवं के फायदे के लिय हाथ मिला लेते हें , चुनाव जितने के लिय धन देते हें , सरकारी धन भी लुटवाते हें , जनता पर इनके जुल्मो को नजर अंदाज कर देते हे ।
कॉग्रेस ने भिंडरवाला से हाथ मिलाया फिर वे ही जन के दुसमन बनें , लंका के विरूद्ध लिट्टे को सहयता दी , वह भी जान पर बनी । कांग्रेस ने करुणानिधि की सरकार लिट्टे के समर्थन के कारन बर्खास्था की थी , चुनाव और सरकार बनाने में फिर उसकी मदद ली , उन्हें मंत्री बनाया । चन्द्र बाबु नायडू के खिलाफ नक्सल वादियों को उपयोग कांग्रेस ने किया । लाल पर्चा किसी से छुपा नही हे । और दल भी हाथ मिलते होगे ... ,जो भी हाथ मिलये उसकी मान्यता समाप्त का अधिकार सुप्रीम कोर्ट को हो । राज्य की सरकार यदि संगठित आपराधियो के खिलाफ कार्यवही नही करे तो संविधान ने केंद्र सरकार को अधिकार दिया हे । करुणानिधि सरकार को कांग्रेस ने इसी तरह के आरोप में बर्खास्त किया था । अब भी यदि कोई हे तो उस पर कर्यवाही करो । मगर बात तो कांग्रस के भीतर से उठ रही हे, जो इशारा हे की अंदर की बात कुछ और हे । हाथ गुप्त तरीके से मिले हें , हम उन्हें साफ नही करना चाहते बल्कि बनये रखना चाहते हें । उनसे हमें फयदा हे , वे अपनी ताकता बड़ा लें तो भी हम उनके साथ की निति पर चलेंगे ।
कुल मिला कर सह़ी रणनीति का आभाव हे । नेपाल की तरह हिंशा के बल पर वे सत्ता पर काबिज हो जायेगें । यदि सफाया अभी नही किया तो आगे बहुत मुस्किल होगा । सता का स्वार्थ छोड़ कर देशहित की सोच पर चलना होगा ।
अरविन्द सीसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
ददवारा , वार्ड ५९, कोटा २,
राजस्थान .

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