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संघ का विश्वास : जनाकांक्षाओं को पूर्ण करेगी नई सरकार

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संघ का विश्वास : जनाकांक्षाओं को पूर्ण करेगी नई सरकार -  सरकार्यवाह श्री सुरेश (भय्या) जी जोशी नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेश (भय्या) जी जोशी ने विश्वास व्यक्त किया है परिवर्तन की आकांक्षा व्यक्त करने वाले करोड़ों देशवासियों की भावनाओं एवं अपेक्षाओं की पूर्ति करने में नव निर्वाचित सरकार सफल सिद्ध होगी. उन्होंने 16 मई को समस्त देशवासियों और नव निर्वाचित सरकार का हार्दिक अभिनंदन करने के लिये अपना प्रेस वक्तव्य जारी किया. सरकार्यवाह ने आशा व्यक्त की “ हम सभी के सहयोग से वैचारिक सामाजिक और धार्मिक भिन्नताओं से ऊपर उठकर भेदभाव और विषमतापूर्ण व्यवहार से मुक्त होकर शोषणमुक्त और समरस समाज निर्मिति की दिशा में एकात्म भाव बनाये रखने में नवनिर्वाचित सरकार सफल सिद्ध होगी.” अपने वक्तव्य में श्री जोशी ने अपने आशा और विश्वास में यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र में सरकार की भूमिका निश्चित ही महत्वपूर्ण होती है, किंतु हमें विश्वास रखना होगा कि परिवर्तन की प्रक्रिया की अपनी एक गति होती है और परिवर्तन सरकार, प्रशासन, सभी राजनैतिक दल, जनसामान्य, सामाजिक और धार्मिक संस्था

नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिया सरकार बनाने का न्योता

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नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिया सरकार बनाने का न्योता, 26 को लेंगे शपथ 20 मई  2014 http://khabar.ndtv.com/news/election/narendra-modi-to-become-indias-prime-minister-on-may-26-388850?update=1400585807 नई दिल्ली: बीजेपी के बाद एनडीए ने नरेंद्र मोदी को आम राय से संसदीय दल का नेता चुन लिया, जिसके बाद एनडीए के नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर 335 सासंदों के समर्थन का पत्र राष्ट्रपति को सौंप सरकार बनाने का दावा पेश किया। इसके बाद राष्ट्रपति से नरेंद्र मोदी मिलने पहुंचे, जहां उन्होंने नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने का न्योता दिया। अब नरेंद्र मोदी 26 मई को शाम 6 बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस शपथ ग्रहण समारोह में 3000 मेहमान शिरकत करेंगे। संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद मोदी ने अपने एनडीए के सहयोगियों से कहा कि यह सरकार सब की है। सबको मिलकर सरकार चलानी है। उन्होंने आंध्र प्रदेश से आए चंद्रबाबू नायडु का विशेष जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें पूर्ण बहुमत से चुने जाने पर बधाई। शिव सेना प्रमुख ने मोदी से कहा कि पूरा महाराष्ट्र आपके साथ है। वहीं तमाम एनडीए के अन्य द

संकल्प पूरा, सफर शुरू - पाञ्चजन्य

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संकल्प पूरा, सफर शुरू तारीख 17 May 2014 http://www.panchjanya.com -  पाञ्चजन्य से साभार  यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। 16 मई को देश के16वें प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी के नाम पर स्पष्ट बहुमत की मुहर लगाने वाले 16वीं लोकसभा चुनाव के नतीजों ने जहां चुनावी पंडितों के कयासों को कमोबेश सही साबित किया वहीं राजनीतिक दलों के बड़े बड़े नेताओं के आंकड़े धराशायी कर दिए। आजादी के बाद के शायद सबसे अहम रहे इन चुनावों पर देशी.विदेशी मीडिया पैनी नजर गढ़ाए थाए क्योंकि ये चुनाव उस यूपीए के कालिख पुते 10 साल के शासन से त्रस्त भारत की जनता के भाग्य का फैसला करने वाले थे। 16 मई की सुबह 8 बजे से ईवीएम के आंकड़े जहां भाजपा और राजग की उत्तरोत्तर बढ़त दिखाते गए वहीं कांग्रेस इतिहास में अपनी शर्मनाक पराजय की ओर बढ़ती गई। गठबंधन की बात करें तो भाजपा नीत राजग तमाम रिकार्ड तोड़ते हुए आगे बढ़ता गया तो कांग्रेस नीत यूपीए पानी पानी होता गया। आंकड़े देखें तो 16 मई की देर रात तक आए नतीजों और रुझाानों को मिलाकर भाजपा अकेले अपने दम पर 288 सीट जीत चुकी थी और कांग्रेस 50 से भी कम यानी 44 सीटें ही जीत

आदि-अनादि संवाददाता नारद - रमेश शर्मा

आदि-अनादि संवाददाता नारद तारीखर 17 may 2014 1 - रमेश शर्मा http://www.panchjanya.com कुछ विधाएं ऐसी होती हैं, जो कालजयी होती हैं। समय और परिस्थितियां उनकी जरूरत व महत्व को प्रभावित नहीं कर पातीं। बस उनका नाम और रूप बदलता है। कहने.सुनने या उन्हें इस्तेमाल करने का अंदाज बदलता हैए लेकिन उनका मूल तत्व नहीं बदलता। पत्रकारिता ऐसी ही विधा है। पत्रकारिता करने वालों को पत्रकार कहेंए संवाददाता कहें अथवा मीडियाकर्मी। यह नाम समय के बदलाव और तकनीक के विकास के कारण बदले। जब संचार के आधुनिक साधन नहीं थे या संवाद संप्रेषण के लिये कागज.कलम का प्रयोग नहीं होता था तब तक इस विधा से जुड़े लोग संवाददाता ही कहलाते थे। अपनी भावनाओंए अपनी जरूरतों या अपने अनुभव का संदेश देना और दूसरे से संदेश लेना प्रत्येक प्राणी का प्राकृतिक गुण व स्वभाव है। अब वह ध्वनि में हो या संकेत मेंए सभी प्राणी ऐसा करते देखे जाते हैं। मनुष्य ने अपना विकास किया। उसने ध्वनि को पहले स्वर में बदला फिर शब्दों में और शब्दों को संवाद में। वह संवाद संप्रेषण करता है और ग्रहण भी। जीवन का दायरा बढ़ने के साथ संदेशों की जिज्ञासाएं भी बढ़ीं औ