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राहुल गांधी की राजनैतिक अपरिपक्वता,जगमोहन जैसा राज्यपाल लगायें

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-  अरविन्द सीसोदिया      कश्मीर के मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्ला को और समय और सहयोग देने की बात कर राहुल गांधी ने राजनैतिक अपरिपक्वता का परिचय दिया है...! समस्या से मुह मोड़ लेना समस्या का हल नहीं होता, इस वक्त यह स्थपित सत्य है क़ी उमर विफल हो  चुके हैं .., उन्हें बनाये रखना खतरे से खाली नही है.., वहां सरकार निलंवित कर  जगमोहन  जैसा राज्यपाल लगा कर स्थिती नियंत्रित  करनी चाहिए..!      राहुल गांधी जो वंश परंपरा कि एक नई पीढी के अवतार हैं .., मूलतः राजनैतिक समझ में परिपक्व होने चाहिए.., मगर अभी तक उनके द्वारा किये गए  विविध प्रकार के क्रिया कलापों में वह बात नजर नहीं आई जो इस तरह के परिवार में जन्में एक व्यक्ति में होनी चाहिए..! युवा क़ी जहाँ तक बात करें  तो अब राहुल (40 वर्ष) उस एज ग्रुप से तो बहार होते जा रहे हैं ..! भावनाओं की बात कहें तो यह समझ में आता है कि युवा वर्ग पर्याप्त मात्रा में हो.., और वह कहाँ हो .., मुझे लगता है क़ी पंचायती राज और पालिकाओं के  सिस्टम में जनप्रतिनिधित्व वर्ग ५० से कम ऊम्र का होना च...

कॉमनवेल्थ, ब्रिटिश ग़ुलामी कांग्रेस

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ग़ुलामी की प्रतिछाया , कॉमनवेल्थ     - अरविन्द सीसोदिया  कॉमनवेल्थ खेलों के  इस लोगो (प्रतिनिधि  छवि ) को देख कर लगता है कि यह भारत की ग़ुलामी का प्रतीक है, क्या लगता है कि यह भारत  के स्वाभिमान का प्रतीक है,  भारत की स्वतंत्रता का प्रतीक है, भारत के सम्मान का प्रतीक है, सवाल यह है कि भारत के मायने क्या ...? अंग्रेजी के जानकर २-३ प्रतिशत लोग जो अभिजात्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हुए राजनीति और प्रशासन  में जमें हुए हैं .., वे ही हैं या सामान्य वह भारतीय जिसे अंगेजी से कोई लेना देना नहीं है वह वर्ग,   जो न केवल बहुमत में है बल्की प्रचंड  बहुमत है मगर .., चुन कर गए प्रतिनिधि यह तय करलें कि भारत से विदेशी भाषा को विदा करना है तो भारत भारत बनें..! ये लोग देश के साथ संसद में बैठ कर बेईमानी करते हैं...!! हमारी फूट का लाभ   एक विदेशी भाषा उठा रही है यह हमें शर्म की बात ही है.., इससे भी अधिक शर्म की बात यह है कि हमें जबरिया  और मार मार कर.., अग्रेज बनाया जा रहा है ..? इसी तरह की पूर्ण घोषित ग़ुलामी ...

हिन्दी बनें महारानी

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हिन्दी बनें महारानी  - अरविन्द सीसोदिया     -  देश के आम किसान , मजदूर और माध्यम वर्ग ने हिन्दी का साथ दिया इसी  से हिन्दी आज विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा  के स्थान पर पहुची  है !      संस्कृत भाषा विश्व की आदि भाषा है और उससे ही तमाम भाषाओँ की उत्पत्ती  हुई है , इस तरह के अनेकों शोध हुए हैं , मगर वे सभी तभी प्रकाश में आयेंगे जब भारतीय राजनीती अंग्रेजी करण से मुक्त होगी ...! मगर वर्तमान सच इतना है कि भारत में तमाम प्रांतीय भाषाएँ संस्कृत की पुत्रीयां हैं..! दुर्भाग्यवश देश की आजादी के समय वे नेता ज्यादा प्रभावी थे जो इग्लैंड में  पढ़े थे और उसी से  अपनी पहचान  भारतीय राजनीति  में रखते थे!           आज जब हम राष्ट्रहित , स्वाभिमान , स्वातंत्र्य  मूल्यों और स्वदेशीकरण पर दृष्टिपात  करते हैं , तो शर्मिंदगी  से भर उठते  हैं , हमें दूर दूर तक गुलामी की वे छायाएं  साथ चलती महसूस होती हैं जिन्हें हम स्वतंत्रता आन्दोलन में ...

हिन्दुओं को सलाह, हिंसा के खिलाफ चुप

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हिंसक  तत्वों को सझायें..., हिन्दुओं को  सलाह देना बंद  करें..,  - अरविन्द सीसोदिया   भारत में शांतचित्त हिन्दुओं को हर कोई सलाह देता नजर आता है.., आरोप लगाता नजर आता है..., पर-उपदेश कुशल बहुतेरे..! जरा गिरेवान के अन्दर झाँक कर भी तो देखो.., इस्लामिक हिंसा  के खिलाफ आप चुप, नक्सली  हिंसा  के खिलाफ आप चुप.., अन्य बहुत सारे उग्रवाद  चल रहे हैं उनके खिलाफ चुप.., हिन्दू के खिलाफ सारे तीर  और तरकश तैयार  हैं...!! शत्रु राष्ट्र के प्रवक्ता   ...      फिल्म अभीनेता   सलमान खान ने  पाकिस्तानी टी वी चॅनल एक्सप्रेस २४/७ में साक्षात्कार देते हुए कहते हैं कि " मुम्बई हमलों को इतना  तूल इसलिए दिया गया कि वह कुलीन वर्ग से सम्बन्धित था | उन्होंने साक्षात्कार के दौरान कहा कि पांच सितारा होटलों और अन्य जगहों को निशाना बनाया गया इसलिए हायतौवा  मची | सलमान ने कहा छोटे शहरों और ट्रेनों में अक्सर हमले होते रहते हैं , उनके बारे में कोई बातचीत नहीं करता.., लेकिन यह हमला...

इंडिया शब्द हटे,भारत के संविधान से...!

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गुलामी के द्योतक शब्द इंडिया से छुटकारा पाए भारत - अरविन्द सीसोदिया     गोवा से कांग्रेस के राज्य सभा सांसद , शांताराम नाईक ने एक गैर सरकारी संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से २७ अगुस्त २०१० को सदन में  भारत के संविधान से इंडिया शब्द हटाने की मांग की , संसद में दोनों सदनों में बहुत सारे गैर सरकारी विधेयक रखे जाते रहते हैं और वे अंततः वापिस ले लिए जाते हैं , मुख्य रूप से किसी विसंगती या सुधार विशेष के लिए ये लाए जाते हैं , यह भी ध्यानकर्षण  का एक तरीका है..!  Rajya Sabha , August 27, 2010 Shantaram Naik, Congress MP from Goa , on Friday sought a Constitution amendment bill in the Rajya Sabha to call the country simply 'Bharat' and not 'India'  His private member bill seeks to amend the Preamble and Article 1 of the Constitution of India  to drop India and use 'Bharat'. It says the words 'India, that is Bharat' in sub-clause 1 of Article be replaced with just 'Bharat'.The grounds for changing the name of the country into simp...

हिन्दी आम व्यक्ती की भाषा

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 राजभाषा हिन्दीं  को आगे बढ़ाएं  साहस  और संकल्पशक्ति से हिन्दी में दम है , राजनीती कायर है..  - अरविन्द सीसोदिया  मैं एक बात समझने मैं बहुत ही असफल हो रहा हूँ कि हमारी संविधान सभा में , कांग्रेस में और विशेष कर जवाहरलाल नेहरु जी के मस्तिष्क  में, इस देश की मूल संस्कृती के विरुद्ध ऐसा क्या भरा था जो , सब कुछ अपने हाथमें होने के बावजूद भी देश हित के निर्णय नहीं कर सके ..! वन्देमातरम हो या भगवा ध्वज हो या विक्रम संवत हो या गोऊ  - हत्या बंदी हो या मुस्लिम आक्रान्ताओं के द्वारा ध्वस्त किये हिन्दू मंदिरों  के मामले हों या  राष्ट्रभाषा हिन्दी हो....??? हर मामले में आप फिसड्डी साबित हो रहे थे ...!! किसके दबाव में ...!! क्या कोई गुप्त संधी थी किसी से..! जो कुछ आप देश को दे कर गए उससे तो देश की जन आकांक्षा की पूर्ती नही होती है..!! क्यों नही पुनः देश को अपनी जन आकांक्षा की पूर्ती के लिए नई संविधान सभा मिलाना चाहिए..!!       यह बात कांग्रेस और गांधी जी १९१० से कहते चले आ रहे थे और इस हेतु गा...

मनमोहन सिंह, प्रधानमन्त्री अवसाद क़ी स्थिती

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कुछ कर दिखाने का बहुत सीमित समय  - अरविन्द सीसोदिया      हलांकि यह माना जा रहा है क़ी यू पी चुनाव के बाद देश की बागडोर राहुलगांधी संभाल लेंगे..., उनके नेतृत्व में ही अगला चुनाव लड़ा जाएगा, कांग्रेस क़ी सोच एक हद तक सही भी है क़ी प्रधानमंत्री  पद पर रहने के लाभ उठाते हुए ही चुनाव लड़ा जाये...! उसके कई फायदे भी हैं , जो सुरक्षा देते हैं और खर्चा बचाते हैं..!! मनमोहन सिंह निश्चित ही रिटायर्मेंट को कुछ दूर धकेलना चाहेंगे..., यह उन्हें करना भी चाहिए , इसी का नतीजा है क़ी वे कुछ स्वतंत्र विचारों के शक्ती समूह जैसे शरद पंवार , पी चिदम्बरम   और करुनानिधि को अपने पक्ष में कर रहे  है...!        भारत के प्रधानमंत्री ने हाल ही में समाचार पत्रों के संपादकों के एक समूह से बात करते हुए खुद की पीठ थपथपाई है जो कि अनुचित है ...!  क्यों कि वे एक तो पूर्व प्रधानमंत्रीयों  विशेष कर जवाहर लाल नेहरु और इंदिरा गांधी के समक्ष कहीं भी नहीं हैं , दूसरा उनकी सफलता यही है कि वे सोनिया गांधी की गुडबुक में रहनें में ...