सोमवार, 23 सितंबर 2013

महाफेंकू चिदम्बरम जी ,सरकार के मंत्री और पार्टी के प्रवक्ता में र्फक रहना चाहिये


महाफेंकू चिदम्बरम जी ,सरकार के मंत्री और पार्टी के प्रवक्ता में र्फक रहना चाहिये
हाल ही केन्द्र सरकार के जिम्मेवार मंत्री पी चिदम्बरम ने मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को असंसदीय भाषा का उपयोग करते हुये फेंकू कह दिया ! यह करके उन्होनें अपनी ही संसदीय मर्यादा और सरकार की गंभीरता को अपमानित कर लिया है। जबाव में उन्हे महा फेंकू कह दिया गया ।
यूपीए 2 की सरकार विफल है तो इसके लिये सरकार के प्रधानमंत्री और मंत्री जिम्मेवार हैं, अपनी विफलता के लिये पूर्ववर्ती सरकारों के आंकडों के साथ आप हेराफेरी कैसे कर सकते हैं ? अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार में आम आदमी की जरूतों का पूरा - पूरा ध्यान रखनें एवं देश को तेजगति से विकसित करने पर ध्यान दिया गया था। आप रिपोर्ट कार्ड उठा कर देखलें या बहस करलें। इसलिये देश की विकास दर ऊंची थी। आपने चीन,अमरीका और यूरोप के हितों की चिंता की, उनका माल भारत में ज्यादा से ज्यादा बिके इसकी चिंता की, आम भारतवासी को लूट का साधन मान लिया, देश के संसाधनों से लेकर आम आदमी की जेब तक नहीं छोडी, इसलिये आप की विकास दर है ही नही , ....तो बढ़ेगी कैसे ? माफ करना चिदम्बरम जी आपकी बकवास ही देश के साथ एनकाउटर है, आतंकवाद है, बलात्कार है।  



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बीजेपी का पलटवार, 'सुपरफेंकू' चिदंबरम कर रहे हैं आंकड़ों से आतंकवाद
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आज तक ब्यूरो [Edited By: संदीप कुमार सिन्हा] | नई दिल्ली, 23 सितम्बर 2013 | अपडेटेड: 14:04 IST टैग्स: पी चिदंबरम| नरेंद्र मोदी| बीजेपी| एनडीए| जीडीपी| यशवंत सिन्हा
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बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा
बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा
अटल राज के गुणगान पर कांग्रेस-बीजेपी में घमासान छिड़ गया है. वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि नरेंद्र मोदी आंकड़ों के साथ फर्जी एनकाउंटर ना करें. वहीं, उन्होंने यूपीए वन को विकास का स्वर्णिम काल बताया है. इसके जवाब में बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा का कहना है कि अगर मोदी फेंकू हैं तो पी चिदंबरम सुपरफेंकू.
दरअसल, इस जुबानी जंग की शुरुआत रविवार को नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद हुई. मोदी ने अपने भाषण में दावा किया कि जब एनडीए सत्ता से बाहर गई तो उस वक्त विकास दर 8.4 फीसदी था और एनडीए राज विकास का स्वर्णिम काल था. इसके जवाब में पी चिदंबरम ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी करके मोदी के दावों को झूठा बताया.

मोदी पर हमला होने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और एनडीए सरकार में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा सामने आए. उन्होंने मोदी के दावों को सही बताया और चिदंबरम पर तथ्यों के साथ आतंकवाद करने का आरोप लगाया है.

यशवंत सिन्हा ने कहा, चिदंबरम जी आवश्यक तथ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और मोदी पर आरोप लगाया है कि वो फर्जी मुठभेड़ कर रहे हैं. मेरे हिसाब से चिदंबरम आंकड़ों के साथ आतंकवाद कर रहे हैं.

वित्त मंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, 'चिदंबरम जी इससे पहले भी वित्त मंत्री रहे हैं, 1996-98 के बीच. जब उन्होंने मंत्रालय छोड़ा था तो उस वक्त देश की विकास दर थी 4.8 फीसदी. पहले साल में यह 7.6 फीसदी थी और गिरकर 4.8 फीसदी हो गई. आज भी विकास दर 4.8 फीसदी है. पिछले कार्यकाल में भी चिदंबरम ने विकास दर गिराने का काम किया था और आज भी वही कर रहे हैं. उन्हें सबसे पहले इसका जवाब देना होगा.'

उन्होंने कहा, 'चिदंबरम साहब आंकड़ों के साथ खेलने की कोशिश कर रहे हैं. औसत के आधार पर कह रहे हैं कि हमने बहुत बढ़िया काम किया पर आज क्या स्थिति है. जब विकास दर 8.6 फीसदी थी तब हमने सत्ता छोड़ी. आज वही दर है 4.8 फीसदी. इसकी तुलना क्यों नहीं कर रहे. इसलिए मैंने कहा है कि वो आंकड़ों से आतंकवाद कर रहे हैं.'

रोजगार और महंगाई के मामले में एनडीए की सरकार को बेहतर बताते हुए उन्होंने कहा, 'वे सिर्फ विकास दर की बात कर रहे हैं. रोजगार की बात क्यों नहीं की. हमने पांच साल कुल 6 करोड़ लोगों को रोजगार दिया. इन्होंने सिर्फ 27 लाख लोगों को नौकरी दी है. महंगाई पर क्यों चुप हैं चिदंबरम. हमारे समय में क्या स्थिति थी और आज क्या है. यह तो सबको पता है.'

आवश्यक सेवाओं के लिए आधार कार्ड होना जरूरी नहीं - सर्वोच्च न्यायालय


आधार कार्ड बनाने की विधि तो बहुत अच्छी है, मगर इन्हे प्राईवेट ठेकेदार बना रहें हैं, उनके कमप्यूटर पर कम गुणवत्ता वाले आपरेटर हैं। अधिकतम कार्ड बनाने पर ही उन्हे फायदा है। इस कारण इनकी अहमियत संदिग्ध और कम वेल्यू की हो जाती है। जब इन्हे बनाने के लिये जिन दस्तावेजों की सूची है , उन दस्तावेजों के धारक के प्रमाण हैं । उन दस्तावेजों को नकार कैसे सकते हैं। वोटर आईडी नागरिकता का सबसे बड़ा सबूत है, राशनकार्ड जिला कलेक्टर द्वारा प्रदत्त है। बैंक खाते की पासबुक गंभीर जांच पर और एक तस्दीकसुदा खातेदार से बनती है। ठीक है आधारकार्ड के ठेकेदारों से किसी को कोई फायदा होगा, मगर इस संदिग्ध दस्तावेज को पक्के से अधिक महत्व देना अनुचित है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश उचित है।
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'आवश्यक सेवाओं के लिए आधार कार्ड होना जरूरी नहीं'
ज़ी मीडिया ब्यूरो

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने एक फैसले में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि इस बात का ध्यान रखा जाये कि किसी भी अवैध नागरिक का आधार कार्ड न बने । इसके साथ ही अदालत ने ये भी निर्देश दिए हैं कि आवश्यक सेवाओं जैसे एलपीजी कनेक्शन, टेलीफोन वगैरह के लिये आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। पहले कई चीजों के लिए आधार कार्ड का होना जरूरी था जिससे जिनके पास आधार कार्ड नहीं था उन्हें परेशानी हो रही थी।

गौर हो कि इसके पहले केंद्र सरकार ने भी साफ तौर पर कहा था कि सरकारी सब्सिडी का फायदा लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। चाहे मामला एलपीजी का हो या कुछ और। संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने राज्यसभा में कहा था कि सब्सिडी वाली किसी भी सरकारी योजना के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई केंद्रीय उद्यम ऐसा कर रहा है तो उसमें सुधार किया जाएगा।

दरअसल पहले खबरें थीं कि रसोई गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी आधार कार्ड से जुड़े आपके बैंक अकाउंट में आएगी। सब्सिडी की राशि तभी अकाउंट में आएगी, जब आपने आधार कार्ड बनवाकर अपने बैंक अकाउंट से उसे लिंक कराया होगा। यह भी बात सामने आ रही थी कि आधार कार्ड न होने पर मार्केट रेट पर सिलेंडर खरीदना पड़ेगा। सबसे ज्यादा भ्रम की स्थिति एलपीजी के मसले पर ही थी जो कोर्ट के फैसले के बाद अब दूर हो गई है। 

विफलता सरकारों की: ठीकरा सोसल मीडिया पर


राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक
प्रधानमंत्री मनमोहनसिंहजी ने अभी - अभी सोसल मीडिया पर साम्प्रदायिकता की ठीकरा फोड़ा है। मगर वे यह भूल गये कि सोसाल मीडिया पर है कौन ? इस प्रश्न का उत्तर यदि वे खोजेंगे तो पायेंगे कि सोसाल मीडिया पर अधिकांशतः आम जनता है। वे लोग हैं जिनकी बात को प्रिंट मीडिया या चैनल्स तब्बजो नहीं देते हैं या उनकी बात जानने तक उनकी पहुंच नहीं है। सोसल मीडिया जनता का वह प्लेटफार्म है,जिस पर आमजन अपने विचारों को निर्विद्धन प्रगट कर सकती है। यह एक मात्र ओपन फील्ड भी जनता से कांग्रेस सरकार छीनना चाहती है। आज जब सोसाल मीडिया के कारण ही विश्व में हजारों छुपे सच उजागर हो रहे हैं , येशे में स्वंय सरकारों को आत्म निरिक्षण करना चाहिये कि वे कर क्या रहे हैं। समस्यायें सरकारों कर गलत और दमनकारी नितियों के कारण उत्पन्न होती हैं, ठीकरा सोसाल मीडिया पर क्यों भला !
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हिंसा भड़काने में सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
ibnkhabar.com | Sep 23, 2013
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को सांप्रदायिक हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और कहा कि इस तरह की घटनाओं में शामिल लोगों को दंडित किया जाएगा। राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक के उद्घाटन में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार को सांप्रदायिक हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, फिर चाहे वे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों। अगर किसी भी पार्टी का कोई भी व्यक्ति इस तरह की घटनाओं में संलिप्त पाया जाता है तो उसे दंडित किया जाएगा।
उन्होंने सांप्रदायिक हिंसा भड़काने में सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने में सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया है। पूर्व में पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काने में इसका इस्तेमाल हुआ था। हमें सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने का रास्ता तलाशना होगा।
पीएम ने कहा कि हाल के सांप्रदायिक हिंसा के पीछे कुछ ऐसी नकली वीडियो का सर्रकुलेशन सामने आया है जिससे सौहार्द बिगड़ा। पिछले साल उत्तर पूर्व में भी इसी तरह से सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल हुआ था। सोशल मीडिया से युवाओं को जानकारी मिलती है। मुझे उम्मीद है कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी आज चर्चा होगी।
क्या कहा पीएम ने?
प्रधानमंत्री ने हिंदी में बोलते हुए कहा कि राष्ट्र आज की बैठक मुजफ्फरनगर दंगो के तुरंत बाद हो रही है। इस कारण इसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है। पीएम ने कहा कि हाल के दिनों में सांप्रदायिक हिंसा की कुछ और घटनाओं भी हुई हैं। किश्तवाड़ में, बिहार के नवादा में और आंध्र प्रदेश में भी ऐसी घटनाएं होती रही है। उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में कुछ घटनाएं हुई है।
पीएम ने कहा कि ऐसा लगता है कि राष्ट्रविरोधी ताकतें विभिन्न संप्रदायों के बीच छोटे-छोटे मुद्दों को भड़काती है। उन्होंने कहा कि दंगा करने और भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकार की पूरी ताकत का इस्तेमाल होना चाहिए। चाहे कोई कितना भी बड़ा हो, किसी भी दल का हो सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। पीएम ने कहा कि यह बहस कि दंगों से किस दल को फायदा होगा बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे न तो साप्रदायिक रंग दे और न ही इस पर राजनीति की जानी चाहिए।