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बिहार में बड़ी आग हे , नीतीशजी झुलस मत जाना !

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बिहार में बड़ी आग हे , नीतीशजी झुलस मत जाना ! --अरविन्द सीसोदिया   राजनीती में न तो दया क़ी जरूरत हे नही अपनेपन  क़ी , गद्दी के लिए बाप को जेल में ड़ाल दिया जाता हे और भाई  को मार दिया जाता हे , भा जा पा ने भले ही ज्यादा विधायक  होते हुए भी नितीश को अपना नेता बना दिया था मगर  नितीश ने गद्दी पर बैठते ही भा जा पा को ख़तम करने क़ी जैसे कसम खाई हो , इस तरह के काम किये जिससे भा जा पा को नुकसान हो , उनकी छबी को ठेस पहुचे . भा जा पा को , अपनी अलग पहचान बना कर आगे चलना   चाहिए था जो उसने नही किया . न जाने क्यों अलग पहचान बनाने  से डरते हें जबकि अलग पहचान, ही दल को सुरक्षित रखती हे . .    निताश कुमार के मन में लगातार खोट था , मगर बी जे पी को टालने क़ी अदातसी पड गई हे , लोकसभा चुनाव के बाद यह खुलाशा  सामने आ चुका  था क़ी  नितीश कांग्रेस के करीब जा रहे हें , मगर बीजेपी सहयोगी दलों के साथ नतमस्तक हो जाती हे मानों उनकी अटकी हो ,  इस का फायदा सहयोगी दल उठाते हें , दल को कठोर  और स्पष्ट रवैया सहयोगी दलों  के सामने रखना  चाहिए ,  एक नही आनेक  वार यह हो चूका हे क़ी जो, बी जे पी से मदद लेता हे वही

हरभजन नही हनुमान कहो, भारत की शान कहो !

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हरभजन नही हनुमान कहो, भारत की शान कहो ! - अरविन्द सिसोदिया      अंतिम ओवर में भारत को जीत के लिए सात रनों की जरूरत थी और उस वक्त रैना और हरभजन मैदान पर थे और पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी ने तेज गेंदबाज मोहम्मद आमेर को मोर्चे पर लगाया। पहली गेंद पर रैना ने एक रन लिया। दूसरी गेंद हरभजन चूक गए पर रन लेने के चक्कर में रैना रन आउट हो गए। रैना के आउट होने के बाद भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा। चार गेंदों पर छह रन चाहिए थे. पुछल्ले बल्लेबाज प्रवीण कुमार ने दो और फिर एक रन लिया. आखिर की दो गेंदों में टीम इंडिया को तीन रन बनाने थे.बेहद रोमाचंक और दवाब वाली इस स्थिति में मोहम्मद आमेर के सामने स्ट्राइक पर हरभजन सिंह थे. युवा गेंदबाज आमेर ने जैसे ही गेंद फेंकी, हरभजन सिंह ने उसे सीधे मिड विकेट के ऊपर हवा में उठाते हुए सीमा रेखा के पार पहुंचा दिया.इस जीत के साथ ही भारत ने बीते साल चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान मिली हार का हिसाब चुकता हुआ   और पाकिस्तानी टीम को एशिया कप से बाहर का रास्ता दिखाया.     हलांकि  गोतम   गंभीर मेन  ऑफ़ द मैच रहे , लेकिन जीत के लिए हरभजन सिंह को ही याद किया जाएगा. भज्ज