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दिसंबर 31, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नीरा कि जवानी,सारे भरते पानी ...!

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- अरविन्द सीसोदिया  नीरा कि जवानी,  सारे  भरते पानी ... पूंजीपतियों कि शैतानी... सरकार करे गुलामी... शरमाते महात्मा गांधी...!         *****१ *****  भ्रष्टाचार की गंगा,  ऊपर से नीचे आती.. सबसे ऊपर सोनिया जी  उनके नीचे मनमोहन जी  नीचे नीचे आते हैं पटवारी जी     ***** २  *****  गये साल तो नीरा ने किये थे तमाम इंतजाम .. अब तो वो कर नहीं सकती मगर याद आती ... राजा का बजा बाजा , टाटा का हुआ भाटा ..  किश्मत भी खूब खेल खिलती .... ***** ३  ***** सामने आई मीडिया कि कहानी बिकाऊ मण्डी बन गये अखबारी  दलालों की सामने दलाली  शर्म  फिर भी नहीं आती....!!  

दिल्ली बदनाम हुई .., खूब बदनाम हुई .., कांग्रेस तेरे राज में ......

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- अरविन्द सीसोदिया   यह अंग्रेजी साल का अंतिम दिन है , मगर इसका कोई अर्थ नहीं है क्यों कि हम बजट में साल १ अप्रेल से प्रारंभ करते हैं और हमारा अपना वर्ष चैत्र सुदी एकम से प्रारंभ होता है !! खै सन के रूपमें हम इसे विदा कर रहे हैं और अखबार साल के किस्से छाप  रहे हैं कौन कितना बदनाम हुआ या कौन कितना मशहूर हुआ !! कौन खास रहा और खासियत से गिर गया !! घोटालों गिनाने की जरुरत नहीं है..आप सब जानते हैं रोज चर्चा में हैं .... दिल्ली इसलिए भी बदनाम हुई की प्रधानमंत्री तो रिवोट प्रधानमंत्री थे ही मगर ... भारत के राष्ट्रपति से करवाई गईं दो नियुक्तियां भी सरकार के नैतिक पतन के बखेड़े  की लिस्ट को लंबा करते हैं ..! में राजनीति कि कुछ समझ रखता हूँ ..,  मेरी दृष्टि में दिल्ली का नैतिक पतन अवश्य इस साल में सन में सबसे विचारणीय  प्रश्न  है! * इटली के लोग भारतीय नैतिकताओं को नहीं समझ सकते..ठीक हे  !! * ...मगर जिम्मेवार पदों पर तो भारतीय ही हैं...?  * वे क्यों यह नहीं समझते या समझाते की इतिहास सब कुछ याद रखता है !! * प्रणव  दा या मनमोहन सिंह को यह याद क्यों नहीं है कि बोफोर्स घोटाले के बाद आज तक क