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गणतंत्र दिवस : जनतंत्र के आत्म निरिक्षण का संवैधानिक पर्व

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योगिराज श्यामा चरण लाहिरी महाशय

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योगिराज श्यामा चरण लाहिरी महाशय - संक्षिप्त परिचय Part 1 पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट , मिलिटरी ईन्जीनीयरिंग वर्क्स का आफिस. स्थान - दानापुर. आफिस के लाहिरी महाशय कुछ फाईलें लेकर बड़े साहब के कमरे के पास आकर कहा-``क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ, सर?`` भीतर से कोई जवाब नहीं आया तो लाहिरी महाशय ने धीरे से भीतर जाकर उनकी मेज पर फाईलें रख दी. साहब दार्शनिकों की तरह खिडकी के बाहर का दृश्य देख रहे थे. आधे घंटे बाद पुनः कुछ फाईलें लेकर लाहिरी महाशय आये तो देखा- साहब पहले की तरह खोये खोये से हैं. ``सर`` साहब ने गौर से लाहिरी महाशय की ओर देखते हुए कहा-`` आज मन नहीं लग रहा है. आप फाईलें रख कर जा सकते हैं.`` लाहिरी महाशय ने नम्रतापूर्वक पूछा -``क्षमा करें सर. आखिर क्या बात है? मेरे योग्य कोई सेवा हो तो हुक्म कीजिए.`` साहब ने गहरी सांस लेते हुए कहा-``ईनग्लेंड से पत्र आया है मेरी पत्नी सख्त बीमार है. समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ. ? वहां होता तो देखभाल करता.`` लाहिरी महाशय ने कहा-`` तभी सोच रहा हूँ कि क्या बात है जो साहब फाईल में हाथ नहीं लगा रहे हैं. मैं थोड़ी देर बाद आता हूँ.`` लाहिरी महाशय