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इतिहास : मोदी की कसौटी शुरू कर चुका है

यह लेख पढ़  कर , आपको लगेगा कि आलोचना के स्तर  पर नरेन्द्र मोदी जी को मीडिया किस कदर तौलने में लगा हुआ है , चिंतन मंथन विश्लेषण  चाहिए , कोई सारभूत बात आपको समझ आये तो अवश्य बताएं । इतिहास, मोदी की कसौटी शुरू कर चुका है जनसत्ता   /    कुमार प्रशांत http://www.jansatta.com नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी के कंधों पर बैठ कर भारतीय जनता पार्टी ने जैसी ऊंचाई छूई है, उसका अनुमान किसे था! लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं, संघ परिवारियों और उनके भोले विश्वासी साधारण कार्यकर्ताओं को यह याद दिलाने की, और बार-बार याद दिलाने की जरूरत है कि इतने सारे हंगामे, इतनी कटुता फैलाने और इतना उन्माद भड़काने (और इतनी बड़ी रकम फूंक देने के बाद भी, जिसका सही अनुमान कोई कभी नहीं लगा सकेगा! ) मोदी को सिर्फ इकतीस फीसद मतदाताओं का समर्थन मिला है। संसदीय लोकतंत्र का हमारा इतिहास बताता है कि 1957 से अब तक जितने भी चुनाव हुए हैं, उनमें सबसे कम मतदाताओं के समर्थन से बनी सरकार यही है। मोदी के पास अपने 282 सांसद ही हैं जो 1957 से अब तक किसी भी सरकार के सांसदों से कम हैं। जिस नेहरू-परिवार को मोदी (और उनकी सुन-सुन कर

ये है गुजरात का नरेन्द्र मोदी पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम

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ये है गुजरात का पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम, भूखा नहीं सोता कोई इंसान dainikbhaskar.com| May 21, 2014 http://business.bhaskar.com/article-bb/BIZ-ART-gujarat-public-distribution-system-is-the-best-model-4620895-PHO.html?seq=1 गुजरात में नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी योजनाओं में कई ऐसे महत्पूर्ण सुधारों को लागू किया, जो पूरे देश के लिए एक मॉडल के तौर पर उभरा। ऐसा ही एक मॉडल देश में खाद्य सुरक्षा की गारंटी देने में कारगर है, जिसे गुजरात और छत्तीसगढ़ की सरकार ने प्रदेश की टार्गेटेड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए इजात किया। खाद्य वितरण प्रणाली की खामियों को दूर करने की मोदी सरकार की पहल की सराहना सुप्रीम कोर्ट और वर्ल्ड बैंक फूड प्रोग्राम ने भी की। इसके बाद 2011 में केन्द्र सरकार ने उसे एक प्रभावी मॉडल मानते हुए सभी प्रदेशों को भी इसे अपनाने की सलाह दी। केन्द्र सरकार ने कहा कि वह भी जल्द से जल्द गुजरात और छतीसगढ़ के मॉडल का अनुसरण करते हुए देश में खाद्य सुरक्षा गारंटी को सुनिश्चित करें। क्या हैं खाद्य वितरण प्रणाली में समस्याएं इस प्र