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आओ फिर से दिया जलाएँ : अटल बिहारी वाजपेयी

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पू र्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी का आज जन्मदिन है। आज उनकी कवितायें पढ़ने का मन किया...। उनकी कविताओं में उनका अनुभव झलकता है। राजनीति से कभी बेचैन दिखाई पड़ते हैं तो कभी आज के हालात पर दुखी। जीवन और मृत्यु का संघर्ष दिखाई देता है तो मौत से ठन जाने की बातें करते हैं। अदम्य साहस... ऊँचाई एकाकी होती है.... "आओ मन की गाँठें खोलें"  से वे प्रेम से रहने और मन मुटाव दूर करने की सीख दे जाते हैं..शायद इसीलिये वे राजनीति में भी अपने प्रतिद्वंदियों के चहेते बने रहे... 1. आओ फिर से दिया जलाएँ आओ फिर से दिया जलाएँ भरी दुपहरी में अंधियारा सूरज परछाई से हारा अंतरतम का नेह निचोड़ें- बुझी हुई बाती सुलगाएँ। आओ फिर से दिया जलाएँ हम पड़ाव को समझे मंज़िल लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल वतर्मान के मोहजाल में- आने वाला कल न भुलाएँ। आओ फिर से दिया जलाएँ। आहुति बाकी यज्ञ अधूरा अपनों के विघ्नों ने घेरा अंतिम जय का वज़्र बनाने- नव दधीचि हड्डियां गलाएँ। आओ फिर से दिया जलाएँ 2. ऊँचाई  ऊँचे पहाड़ पर, पेड़ नहीं लगते, पौधे नहीं उगते, न घास ही जमती है। जमती है सिर्फ बर्फ, जो, कफ़न की तरह सफ़ेद और, मौ

प्रतिष्ठित भारतीय कवि : भारत पर कविता

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भारत पर कविताएं http://knowindia.gov.in/hindi/myindia/myindia_frame.php?id=8 यहां कुछ प्रतिष्ठित भारतीय कवियों द्वारा भारत पर कविताओं का एक छोटा सा अनूदित संग्रह दिया गया है ... "मन जहां डर से परे है और सिर जहां ऊंचा है; ज्ञान जहां मुक्‍त है; और जहां दुनिया को संकीर्ण घरेलू दीवारों से छोटे छोटे टुकड़ों में बांटा नहीं गया है; जहां शब्‍द सच की गहराइयों से निकलते हैं; जहां थकी हुई प्रयासरत बांहें त्रुटि हीनता की तलाश में हैं; जहां कारण की स्‍पष्‍ट धारा है जो सुनसान रेतीले मृत आदत के वीराने में अपना रास्‍ता खो नहीं चुकी है; जहां मन हमेशा व्‍यापक होते विचार और सक्रियता में तुम्‍हारे जरिए आगे चलता है और आजादी के स्‍वर्ग में पहुंच जाता है ओ पिता मेरे देश को जागृत बनाओ" " गीतांजलि " - रवीन्द्रनाथ टैगोर स्‍वर्ग या तोरण पथ से बेहतर मैं तुम्‍हें प्‍यार करता हूं, ओ मेरे भारत और मैं उन सभी को प्‍यार करुंगा मेरे सभी भाई जो राष्‍ट्र में रहते हैं ईश्‍वर ने पृथ्‍वी बनाई; मनुष्‍य ने देशों की सीमाएं बनाई और तरह तरह की सुंदर सीमा रेखाएं

अशोक चक्र : लांस नायक शहीद मोहन नाथ गोस्वामी

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अशोक चक्र पाने वाले लांस नायक मोहन नाथ ने अंतिम 11 दिनों में ढेर कर दिए थे 10 आतंकी कर्नल एसडी गोस्वामी के मुताबिक, गोस्‍वामी ने अपनी जिंदगी के अंतिम 11 दिनों में कश्मीर घाटी में तीन आतंकवाद निरोधी अभियानों में सक्रिय भाग लिया था, जिसमें 10 आतंकवादी मारे गए थे और एक जिंदा पकड़ा गया था। जनसत्ता ऑनलाइन,नई दिल्‍ली | January 26, 2016 राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी की पत्‍नी को अशोक चक्र सम्‍मान सौंपा गया। सेना के विशेष बल के कमांडो शहीद लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी को उनकी वीरता के लिए अशोक चक्र से सम्‍मानित‍ किया गया है। वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्‍होंने जिस अदम्‍य साहस का परिचय दिया, वह कभी न भुलाने वाला है। वह पिछले साल सितंबर में शहीद हुए थे। लांस नायक गोस्‍वामी ने प्राण त्‍यागने से पहले चार आतंकियों को ढेर किया। इनमें दो को उन्‍होंने खुद मारा, जबकि गोली लगने के बाद भी दो अन्‍य मारने में साथियों की मदद की। खुद घायल होने के बाद भी वह अपने दो घायल साथियों को सुरक्षित स्‍थान लेकर आए थे। उन्‍होंने जिंदगी के आखिरी 11 दिनों में 1