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दिसंबर 17, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नोटबंदी : सुप्रीम कोर्ट

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15.44 लाख करोड़ रुपये के पुराने अमान्य नोटों जब नोटबंदी की घोषणा की थी, तब 500 रुपये के 1,716.50 करोड़ और 1,000 रपये के 685.80 करोड़ नोट चलन में थे. 500 तथा 1000 के नोट बैन होने पर आया सुप्रीम कोर्ट का ये बड़ा फैसला… November 18, 2016 भारत सरकार के 500 तथा 1000 के नोट बंद करने के खिलाफ कुछ लोगो ने याचिका दायर की थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया हैं | जहा एक तरफ नोटों के बैन करने के फैसले का लोगो ने दिल से स्वागत किया था वही दूसरी तरफ कुछ लोगो ने इस फैसले के खिलाफ गहरी आपत्ति भी उठाई थी, और सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी | इन सबके बीच कोर्ट का यह फैसला सही समय पर आया हैं | भारत सरकार के नोट बैन करने के खिलाफ याचिकाओ पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने भारत सरकार से जवाब माँगा हैं| जिसमे भारत सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया हैं की जनता के लिए सुविधा के लिए क्या ठोस कदम उठाये गये हैं केंद्र सरकार से रिपोर्ट तलब करते हुए पूछा हैं की जनता की परेशानी के हल के लिए सरकार क्या स्टेप ले रही हैं क्या हुआ कोर्ट में- सरकार के नोट बैन को खत्म करने

नरेंद्र मोदी : बेईमानों के पक्ष में बोलने का राजनीतिक पतन चिन्ता का विषय

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विपक्ष पर बरसे मोदी, कहा-1971 में ही होनी चाहिए थी नोटबंदी नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नोटबंदी के अपने फैसले का जोरदार ढंग से बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय साल 1971 में ही लिया जाना चाहिए था जब इंदिरा गांधी सरकार थी। देश में कालाधन को रोकने के लिए कदम नहीं उठाने हेतु कांग्रेस पर प्रहार करते हुए मोदी ने भाजपा सांसदों से कहा, "हमें ऐसा करने की जरूरत साल 1971 में थी। साल 1971 में ऐसा नहीं किए जाने का हमें भारी नुकसान हुआ।" प्रधानमंत्री ने पूर्व नौकरशाह माधव गोडबोले की पुस्तक का हवाला दिया, जिसमें दर्ज है कि कैसे तत्कालीन गृह मंत्री वाई.वी. चव्हाण ने गलत तरीके हासिल और छिपे धन पर रोक लगाने के लिए नोटबंदी की अनुशंसा की थी। मोदी ने कहा, "गोडबोले ने पुस्तक में लिखा है कि इस सुझाव पर इंदिरा ने सवालिया लहजे में कहा कि 'क्या आगे कांग्रेस को कोई चुनाव नहीं लड़ना है?' चव्हाण को संदेश मिल गया था और अनुशंसा ठंडे बस्ते में डाल दी गई थी।" प्रधानमंत्री ने कहा, "साल 1971 में इसकी अनुशंसा हर व्यक्ति ने की थी। अगर यह 1971 में

जम्मू कश्मीर के निवासी सबसे पहले भारत के नागरिक हैं : सुप्रीम कोर्ट

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जम्मू कश्मीर को संविधान के बाहर रत्तीभर नहीं है संप्रभुता : सुप्रीम कोर्ट Saturday, December 17, 2016 भाषा नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर की भारतीय संविधान के बाहर और अपने संविधान के अंतर्गत रत्ती भर भी संप्रभुता नहीं है और उसके नागरिक सबसे पहले भारत के नागरिक हैं। शीर्ष अदालत ने जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय के एक निष्कर्ष को ‘पूरी तरह गलत’ करार देते हुए यह टिप्पणी की। उच्च न्यायालय ने कहा था कि राज्य को अपने स्थायी नागरिकों की अचल संपत्तियों के संबंध में उनके अधिकार से जुड़े कानूनों को बनाने में ‘पूर्ण संप्रभुता’ है। न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की पीठ ने कहा, ‘जम्मू कश्मीर को भारतीय संविधान के बाहर और अपने संविधान के तहत रत्ती भर भी संप्रभुता नहीं है। राज्य का संविधान भारत के संविधान के अधीनस्थ है।’ पीठ ने कहा, ‘अतएव, उसके निवासियों का खुद को एक अलग और विशिष्ट वर्ग के रूप में बताना पूरी तरह गलत है। हमें उच्च न्यायालय को यह याद दिलाने की जरूरत है कि जम्मू कश्मीर के निवासी सबसे पहले भारत के नागरिक हैं।’ शीर्ष अदालत ने वित्तीय

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे : शुरू होगी मुख्यमंत्री कौशल अनुदान योजना

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नए साल में शुरू होगी मुख्यमंत्री कौशल अनुदान योजना 17 Dec, 2016 inShare किसानों एवं युवाओं के लिए मुख्यमंत्री ने की घोषणाएं मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि प्रदेश के युवाओं में कौशल का विकास कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए 1 जनवरी, 2017 से मुख्यमंत्री कौशल अनुदान योजना शुरू की जायेगी। इस योजना के तहत युवाओं को उच्च गुणवत्ता के कौशल प्रशिक्षण के लिए एक लाख रूपये तक का लोन उपलब्ध करवाया जायेगा जिस पर राज्य सरकार 4 से 6 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान देगी। श्रीमती राजे राज्य सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शनिवार को जोधपुर में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास के बाद उम्मेद राजकीय स्टेडियम में जनसभा को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने समारोह में प्रदेश के युवाओं, किसानों, महिलाओं, शिक्षा, सड़क, पानी और आधारभूत ढ़ाचे के विकास को लेकर कईं घोषणाएं की। किसानों की मदद के लिए कृषि एवं राजस्व कार्मिको को मिलेंगे टेबलेट मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि हमारे अन्नदाता किसान को फसल बीमा योजना का लाभ तुरन्त एवं पूरी पारदर्श