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परमात्मा के परिवार की सदस्य है आत्मा - अरविन्द सिसोदिया Sanatan Hindu

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परमात्मा के परिवार की सदस्य है आत्मा  - आत्मा और परमात्मा का संबंध आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, आत्मा और परमात्मा के बीच एक गहरा संबंध होता है। विभिन्न धार्मिक और दार्शनिक परंपराओं में, आत्मा को एक अविनाशी तत्व माना जाता है जो कि परमात्मा का अंश है। यह विचार विशेष रूप से सनातन हिंदू धर्म की धार्मिक परंपराओं में प्रचलित है। - आत्मा की परिभाषा -  आत्मा को अक्सर “अहम्” या “स्वयं” के रूप में देखा जाता है। यह शरीर का वह नेतृत्व है जो शरीर को निर्देशित करता है। आत्मा न केवल जीवन का स्रोत होती है, बल्कि यह ज्ञान, संवेदनाएं और अनुभवों का भंडार भी होती है। आत्मा को चेतना माना जाता है, इसे एक प्रकार का आवेश समूह भी माना जाता है। जैसे हीं आत्मा शरीर छोड़ देती है शरीर अपने आपको नष्ट करने लगता है। जब हम कहते हैं कि आत्माएं परमात्मा के परिवार का हिस्सा हैं, तो इसका तात्पर्य यह होता है कि सभी आत्माएं एक ही स्रोत से उत्पन्न हुई हैं और वे अंततः उसी स्रोत के पास शरीर छोड़नें के बाद पुनः पहुंच जातीं हैँ। - परमात्मा की भूमिका परमात्मा को सृष्टि का मूल कारक माना जाता है। उन्हें सर्वशक्तिमान,...

माता पिता देवता के समान हैँ - सनातन धर्म Hindu Dharm

" मातृ देवो भव, पितृ देवो भव: सनातन गुणवत्ता और हिंदू परिवार व्यवस्था "  "मातृ देवो भव, पितृ देवो भव" का अर्थ है माता और पिता को देवता के समान मानना ​​चाहिए। यह वाक्यांश तैत्तिरीय उपनिषद (शिक्षावल्ली) से लिया गया है और यह हिंदू धर्म की समाज  और धर्म व्यवस्था की महत्ता को संदर्भित करता है। इस सिद्धांत का आधार, सनातन हिंदू परिवार की जीवन पद्धति का आधार है। इसे समझने के लिए हम इसे विभिन्न विशिष्टताओं में विभाजित करके देख सकते हैं। - 1. सनातन सिद्धांत : माता-पिता का सम्मान... हिन्दू धर्म में माता-पिता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। "मातृ देवो भव" और "पितृ देवो भव" ये माता-पिता न केवल जीवनदाता हैं, बल्कि बच्चों के पालक और प्रथम शिक्षक भी होते हैं। इसलिए संतान को उनकी आज्ञा पालन करना, सेवा करना और  पालन पोषण करना एक धार्मिक कर्तव्य माना गया है। माता का महत्व:- माता को सृष्टि की रचना करने वाली शक्ति के रूप में देखा जाता है। वह बच्चे को गर्भ में पालकर जन्म देती है, पोषण कर बड़ा करती है, वह का पहली गुरु है, जो उसे सामाजिक गुण अवगुण, संस्कार और जीवन जीने की...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की अमर संस्कृति का आधुनिक अक्षयवट : प्रधानमंत्री मोदी RSS PM Narendr Modi

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की अमर संस्कृति का आधुनिक अक्षयवट : प्रधानमंत्री मोदी  माधव नेत्रालय के प्रीमियर सेन्टर का शिलान्यास  नागपुर, ३० मार्च: स्वामी विवेकानन्द ने निराशा में डूबे भारतीय समाज को झकझोरा, उसके स्वरूप की याद दिलाई, आत्मविश्वास का संचार किया और राष्ट्रीय चेतना को बुझने नहीं दिया। गुलामी के अन्तिम दशक में डॉक्टरजी और श्री गुरुजी ने इस चेतना को नई ऊर्जा देने का कार्य किया। राष्ट्रीय चेतना के जिस विचार का बीज १०० वर्ष पहले बोया गया था, वह आज एक महान वटवृक्ष के रूप में खड़ा है। सिद्धान्त और आदर्श इस वटवृक्ष को ऊँचाई देते हैं, जबकि लाखों-करोड़ों स्वयंसेवक इसकी टहनियों के रूप में कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की अमर संस्कृति का आधुनिक अक्षय वट है, जो निरन्तर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को ऊर्जा प्रदान कर रहा है। स्वयंसेवक के लिए सेवा ही जीवन है। यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कही। वे नागपुर स्थित माधव नेत्रालय चैरिटेबल ट्रस्ट के विस्तारित माधव नेत्रालय के नए प्रीमियर सेन्टर के शिलान्यास समारोह के अवसर पर नागरिकों को सम्बोध...