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याद रहे, लोकतंत्र की रक्षा का महाव्रत - अरविन्द सीसौदिया emergency

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  26 जून: आपातकाल दिवस के अवसर पर याद रहे, लोकतंत्र की रक्षा का महाव्रत - अरविन्द सीसौदिया      मदर इण्डिया नामक फिल्म के एक गीत ने बड़ी धूम मचाई थीः दुख भरे दिन बीते रे भईया, अब सुख आयो रे, रंग जीवन में नया छायो रे!     सचमुच 1947 की आजादी ने भारत को लोकतंत्र का सुख दिया था। अंग्रेजों के शोषण और अपमान की यातना से मातृभूमि मुक्त हुई थी, मगर इसमें ग्रहण तब लग गया जब भारत की सबसे सशक्त प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा दिया, तानाशाही का शासन लागू हो गया और संविधान और कानून को खूंटी पर टांग दिया गया। इसके पीछे मुख्य कारण साम्यवादी विचारधारा की वह छाया थी जिसमें नेहरू खानदान वास्तविक तौर पर जीता था, अर्थात साम्यवाद विपक्षहीन शासन में विश्वास करता हैं, वहां कहने को मजदूरों का राज्य भले ही कहा जाये मगर वास्तविक तौर पर येन-केन प्रकारेण जो इनकी पार्टी में आगे बढ़ गया, उसी का राज होता है। भारतीय लोकतंत्र की धर्मजय     भारत की स्वतंत्रता के साठ वर्ष होने को आये। इस देश ने गुलामी और आजादी तथा लोकतंत्र के सुख और तानाशाही के दुःख को बहुत करीब से देखा। 25 ...

आपातकाल : में भी था भूमीगत कार्यकर्ता Emergency 1975-77

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श्री लक्ष्मण जी कृष्णनानी एवं - अरविन्द सिसौदिया , जिला महामंत्री भाजपा कोटा । 1975 गुना - आापातकाल के समय हमारा नेतृत्व ग्वालियर महाराज श्रीमंत माधवराव सिंधिया लोकसभा सांसद के नाते एवं ऊमरी राजा साहब शिवप्रतापसिंह जी सिसौदिया विधायक के नाते करते थे । मगर हमारा मुख्य नेतृृत्व भाई साहब गाविन्द जी सुखद (अगवाल) , रामजीलाल जी गोयल एवं नवलकिशोर जी विजयवर्गीय करते थे । मेरे पिताश्री भूपेन्द्र्र सिंह जी सीसौदिया उन दिनों जनसंघ के जिला मंत्री थे। पन्नालाल जी भाई साहब एवं गोपीलाल जी भाई साहब ,शिवचरन जी मंगल , हरीचरन जी तब हमारे अग्रज थे।  मेरे पिताश्री जागीरदार थे सो उन्होने गिरफ्तारी न देकर भूमिगत कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया । तब में अरविन्द सिंह सिसौदिया जिसे लोग बडे बनाजी के नाम से जानते थे, भूमिगत कार्यकर्ता था । हमारे हाॅली का जबरिया आपरेशन तत्कालीन सरकार ने कर दिया था। जिसका विवाह भी नहीं हुआ था।  हम रात्रि शयन किसी पहाडी के वृक्ष के नीचे करते थे। में अपने पैतृक ग्राम मोडका में ही रहता था । मगर सायकिल से रोज गुना जाता था। तब हमारी मुख्यतौर पर मदद...

आपातकाल : लोकतंत्र की प्रथम हत्या Emergency: The First Murder of Democracy

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जानें, आपातकाल से जुड़ीं हैं ये 10 बड़ी बातें                                          लालबहादुर शास्त्री की मौत के बाद देश की प्रधानमंत्री बनीं इंदिरा गांधी का कुछ कारणों... आज से करीब 43 साल पहले इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था। 25 जून, 1975 को लगा आपातकाल 21 महीनों तक यानी 21 मार्च, 1977 तक देश पर थोपा गया। 25 जून और 26 जून की मध्य रात्रि में तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के हस्ताक्षर करने के साथ ही देश में पहला आपातकाल लागू हो गया। अगली सुबह समूचे देश ने रेडियो पर इंदिरा की आवाज में संदेश सुना, 'भाइयो और बहनो, राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है। इससे आतंकित होने का कोई कारण नहीं है।' आइये आज आपातकाल से जुड़ी 10 बड़ी बातें जानते हैं... नेताओं की गिरफ्तरियां आपातकाल की घोषणा के साथ ही सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। अभिव्यक्ति का अधिकार ही नहीं, लोगों के पास जीवन का अधिकार भी नहीं रह गया। 25 जून की रात से ही देश में विपक्ष के नेताओं की ग...