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देशहित में सर्वश्रेष्ठ है एक देश एक चुनाव - अरविन्द सिसोदिया one nation one election ,

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देशहित में सर्वश्रेष्ठ है एक देश एक चुनाव - अरविन्द सिसोदिया देश के विकास के लिये एक साथ सभी चुनावों को करवाये जाना उचित है। यह बहुत मुस्किल भी नहीं है। पहले एक साथ चुनाव होते ही थे। जनता तो पूरे पांच साल के लिये ही प्रतिनिधि चुनती है। यह तो राजनैतिक स्वार्थ का  ताम झाम है कि सरकारे बीच में गिर जाती है। गिरा दी जांती है। सरकारों का गिराने का सबसे बडा खेल भी कांग्रेस के नाम ही है। चाहे केन्द्र सरकारें हों या राज्यों की सरकारें हो सबसे ज्यादा सरकारें कांग्रेस ने ही गिराई हैं।  देश की प्रगति और स्थिर लोकतंत्र के लिये एक देश ऐक चुनाव की पद्यती उचित है। देश को इस पर आगे बढ़ना चाहिये। देश का जनमत जो वन नेशन वन इलेक्शन का स्वागत इसलिये भी होना चाहिये कि भारत की चुनाव प्रणाली बेहद खर्चीली है , एक साथ चुनाव होनें से देश का बहुत सारा पैसा बचेगा। कांग्रेस हर अच्छे काम की विरोधी है यह इसकी आदत है। इसलिये वह तो विरोध ही करेगी। केन्द्र सरकार सीधे जनता की राय ले या इस मुद्दे पर ही एक चुनाव करवा लिया जाये। ताकि विरोध करने वाले दलों का पता चल जाये।  ----------------- one nation one electio...

वन नेशन वन इलेक्शन देशहित में लागू होना चाहिए - अरविन्द सिसोदिया One Nation One Election

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वन नेशन - वन इलेक्शन, को लेकर के इतनी हाय तौबा की जरूरत अभी नहीं है, क्योंकि गठित कमेटी की रिपोर्ट का आना मात्रा काफी नहीं होगा, इसको संसद और विधान मंडलों के द्वारा पारित कराया जाना भी एक बहुत बड़ी चुनौती होगी। यह सब बहुत आसान नहीं है, बल्कि एक बहुत ही कठिन चुनौती पूर्ण कार्य है। किंतु यह सच है कि चुनाव अगर एक बार में करवाए जाएं तो न केवल देश का बहुत भारी धन की बचत होगी बल्कि साथ ही  देश हित के कार्यों का करने का मन भी बनता है।  मन इसलिए बनता है कि बार-बार चुनाव का आना और उनमें नेताओं का जुट जाना देशहित  के कार्यों को बाधित करता है। काम करने के क्रम को बाधित करता है। राष्ट्रहित के दृष्टिकोण से तो वन नेशन वन इलेक्शन बहुत ही अच्छी चीज है,  बहुत आसान भी है। हमारे देश नें वर्षो तक एक साथ चुनाव करवाये भी हैं और सफल सरकारें चलाईं हैं। ऐसा भी नहीं है की यह दुर्लभ है,देश मन बनाले तो बहुत आसान भी है। इसमें सभी प्रकार के इलेक्शन एक-  एक  करके करवा लिए जाए। प्रति 5 वर्ष के अंतराल से एक इलेक्शन मंथ ( माह ) आना चाहिए, जिसमें सबसे पहले निकायों के चुनाव हो जाए...