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शीतला माता Sheetla Mata शीतला अष्टमी ( बसौड़ा )

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    शीतला माता कहानीं            ----------------------------- एक बार शीतला माता नें सोचा कि चलो आज देखूँ कि धरती पर मेरी पूजा कौन कौन करता है, कौन मुझे मानता है। यही सोचकर शीतला माता धरती पर राजस्थान के डूँगरी गाँव में आई और देखा कि इस गाँव में मेरा मन्दिर भी नहीं है, ना मेरी पूजा होती है। माता शीतला गाँव की गलियों में घूँम रही थी, तभी एक मकान के ऊपर सें किसी नें चावल का उबला पानी (मांड) नीचे फेंका। वह उबलता पानीं शीतला माता के ऊपर गिरा जिससें शीतला माता के शरीर में (छाले) फफोले पड़ गये। शीतला माता के पूरे शरीर में जलन होनें लगी।  शीतला माता गाँव में इधर उधर भाग भाग के चिल्लानें लगी अरे में जल गई, मेरा शरीर तप रहा है, जल रहा है। कोई मेरी मदद करो। लेकिन उस गाँव में किसी नें शीतला माता की मदद नहीं की। वहीं अपनें घर के बाहर एक कुम्हारन (महिला) बैठी थी। उस कुम्हारन नें देखा कि अरे यह बूढी़ माई तो बहुत जल गई है। इसके पूरे शरीर में तपन हो रही है। इसके पूरे शरीर में (छाले) फफोले पड़ गये है। यह तपन सहन नहीं कर पा रही है। तब उस कुम्हारन नें कहा, ...