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नारद जयंती

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नारद जयंती (19 मई) पर विशेष आज की राजनीति की प्रेरणा बन सकता है यह संवाद -प्रो.बृज किशोर कुठियाला महाराजा युधिष्ठिर की अद्वितीय सभा में देवर्षि नारद धरमराज की जय-जयकार करते हुए पधारे। उचित स्वागत व सम्मान करके धर्मराज युधिष्ठिर ने नारद को आसन ग्रहण करवाया। प्रसन्न मन से नारद ने युधिष्ठिर को धर्म-अर्थ-काम का उपदेश दिया। यह उपदेश प्रश्नों के रूप में है और किसी भी राजा या शासक के कर्तव्यों की एक विस्तृत सूची है। नारद ने कुल 123 प्रश्न किये, जो अपने आप में एक पूर्ण व समृद्ध प्रशासनिक आचार संहिता है। यह प्रश्न जितने प्रासांगिक महाभारत काल में थे उतने या उससे भी अधिक आज भी हैं। महात्मा गांधी ने जिस रामराज्य की कल्पना की थी उसका व्यवहारिक प्रारूप इन प्रश्नों से स्पष्ट झलकता है। स्वभाविक है कि महाभारत और रामायणकाल की उत्कृष्ठ भारतीय संस्कृति में हर व्यक्ति के कर्तव्यों का दिशा बोध हो। यह कर्तव्य केवल ऐसे निर्देश नहीं थे जिनको करना नैतिक या वैधानिक रूप से अनिवार्य था परन्तु यह ऐसा मार्गदर्शन था जिससे व्यक्ति भौतिक और सांसारिक विकास के साथ आध्यात्मिक विकास की ओर भी अग्रसर होता है। ...

नारद मुनि जयंती : देवर्षि नारद

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* देवर्षि नारद * सहबद्धता हिन्दू देवता, देवर्षि, मुनि * मंत्र नारायण नारायण * शस्त्र वीणा * वाहन त्रैलोक्य * संवाद • सम्पादन           नारद मुनि, हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा के सात मानस पुत्रो मे से एक है। उन्होने कठिन तपस्या से ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया है। वे भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों मे से एक माने जाते है। देवर्षि नारद धर्म के प्रचार तथा लोक-कल्याण हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। शास्त्रों में इन्हें भगवान का मन कहा गया है। इसी कारण सभी युगों में, सब लोकों में, समस्त विद्याओं में, समाज के सभी वर्गो में नारदजी का सदा से प्रवेश रहा है। मात्र देवताओं ने ही नहीं, वरन् दानवों ने भी उन्हें सदैव आदर दिया है। समय-समय पर सभी ने उनसे परामर्श लिया है। श्रीमद्भगवद्गीता के दशम अध्याय के २६वें श्लोक में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इनकी महत्ता को स्वीकार करते हुए कहा है - देवर्षीणाम्चनारद:। देवर्षियों में मैं नारद हूं। श्रीमद्भागवत महापुराणका कथन है, सृष्टि में भगवान ने देवर्षि नारद के रूप में तीसरा अवतार ग्रहण किया और सात्वततंत्र का उपदेश दिया ज...

आदि पत्रकार : देवर्षि नारद जी

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- अरविन्द सिसोदिया  कोटा में सृष्टि के प्रथम पत्रकार देवर्षि नारद जी  की जयंती के अवसर पर , १९ मई गुरुवार को सायं ६ बजे मानव विकास भवन , विश्व हिन्दू परिषद् कार्यालय में राष्ट्र चेतना अभियान  समिति के द्वारा  सी  ए  डी रोड पर आयोजित की गई है | सभी व्यक्ती इस में आ सकते हैं |  देवर्षि नारद जी सिर्फ ब्रह्माण्ड की ईश्वरीय व्यवस्था के सूचना तंत्र मात्र ही नहीं थे बल्कि वे बहुत सी समस्याओं का निदान भी करवाते थे | कलयुग में दुःखी  प्राणियों के लिए श्रीमद भागवत के माध्यम से कष्टों के निवारण और भगवान की भक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाले  देवर्षि नारद जी ही हैं !  हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा के सात मानस पुत्रो मे से एक है। उन्होने कठिन तपस्या से ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया है। वे भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों मे से एक माने जाते है। देवर्षि नारद धर्म के प्रचार तथा लोक-कल्याण हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। शास्त्रों में इन्हें भगवान का मन कहा गया है। इसी कारण सभी युगों में, सब लोकों में, समस्त विद्याओं ...

राज्यपाल पद का पार्टी हित में दुरूपयोग : हंसराज भारद्वाज Hansraj Bhardwaj

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- अरविन्द  सिसोदिया    कर्नाटक में राज्यपाल हंसराज भारद्वाज एक बार फिर कांग्रेस कार्यकर्त्ता के रूपमें सामनें आगये हैं .., यूं तो कुछ वर्ष से ही न्यायालयों के कारण राज्यपाल पद का दुरूपयोग रुका है ..अन्यथा कांग्रेस ने राज्यपाल पद का पार्टी हित  में दुरूपयोग के अनेकों कीर्तिमान स्थापित  किये हैं ..!! कांग्रेस पार्टी के राज्यपालों के कारण बहुतेरे मुख्यमंत्रियों को कुर्सी गंवानी पड़ी है |  - --- http://en.wikipedia.org/wiki/Hansraj_Bhardwaj Hansraj Bhardwaj   ( Kannada : ಹನ್ಸ್ರಾಜ್ ಭಾರದ್ವಾಜ್; born May 17, 1937) is an  Indian  politician, currently serving as the  Governor of Karnataka . He is a member of the  Indian National Congress . He holds the record of having the second longest tenure in Law Ministry since independence, after  Ashoke Kumar Sen . He was the minister of state for nine years and a cabinet minister for law and justice for five years. He has been accused of "petty politicking" as a loyalist of the Congress Party e...

पेट्रोल की कीमत बढानें से राज्य सरकारें मालामाल

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- अरविन्द सिसोदिया  पेट्रोल की ज्यादा कीमत चुकाते हुए आपका गुस्सा जायज है। लेकिन इस वृद्धि के लिए तेल कंपनियों के साथ सरकार भी जिम्मेदार है।  राज्य सरकार चाहे तो आम उपभोक्ता पर पड़ने वाले असर को कम कर सकती है। तेल के दाम में जितनी वृद्धि होती है, राज्य सरकार का खजाना भी उसी हिसाब से बढ़ जाता है, क्योंकि राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल के दाम पर प्रतिशत के हिसाब से टैक्स वसूल करती हैं। पेट्रोल के दाम में पांच रुपये लीटर बढ़ने से दिल्ली सरकार को करीब 80 पैसे और यूपी सरकार को करीब एक रुपया प्रति लीटर का फायदा हुआ है। दिल्ली में प्रति लीटर पेट्रोल पर 20 प्रतिशत, जबकि यूपी में 26.55 प्रतिशत वैट वसूला जाता है। दिल्ली पेट्रोल पम्प ऐसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल पेशावरिया कहते हैं कि राजधानी में प्रतिदिन करीब 30 लाख लीटर पेट्रोल की बिक्री होती है। ऐसे में दिल्ली सरकार को रोजाना 24 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होगी। वहीं, उत्तर प्रदेश में रोजाना करीब 65 लाख लीटर पेट्रोल बिकता है। लिहाजा यूपी सरकार को पेट्रोल के दाम बढ़ने से करीब 65 लाख रुपए प्रतिदिन का फायदा हुआ है। बिहार में पेट्रोल पर वैट 24...

सृष्टि के प्रथम पत्रकार : नारद मुनि

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सृष्टि के  प्रथम पत्रकार : नारद मुनि  नारद यानी देवताओं के संवाददाता अक्षरयात्रा की कक्षा में न वर्ण की चर्चा करते हुए आचार्य पाटल ने कहा- "अथर्ववेद" के अनुसार नारद नाम के एक ऋषि हुए हैं। "ऎतरेय ब्राह्मधण" के कथन के अनुसार हरिशचंद्र के पुरोहित सोमक, साहदेव्य के शिक्षक तथा आग्वष्टय एवम् युधाश्रौष्ठि को अभिशप्त करने वाले भी नारद थे। "मैत्रायणी संहिता" में नारद नाम के एक आचार्य हुए हैं। "सामविधान ब्राह्मधण" में बृहस्पति के शिष्य के रू प में नारद का वर्णन मिलता है। "छान्दोग्यपनिषद्" में नारद का नाम सनत्कुमारों के साथ लिखा गया है। एक शिष्य ने पूछा- गुरूजी, हमने तो नारद नाम के एक ऋषि का नाम सुना है जो देवताओं के बीच में संवाद का सेतु बनते हैं। वे तीनों लोक की खबर इधर से उधर पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। आचार्य ने कहा- तुम ठीक समझे हो वत्स। नारद नाम के एक ऎसे ही ऋषि हुए हैं जो मृत्यु लोक की खबर स्वर्ग लोक में और स्वर्ग लोक की खबर मृत्यु लोक तक पहुंचाते हैं। नारद नामक एक ऋषि भी हुए हैं जो "नारद स्मृति" के रचनाकार हैं...

नारद मुनि Narad Muni

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नारद नारद मुनि "अहो! ये देवर्षि नारद हैं, जो वीणा बजाते हैं, हरिगुण गाते, मस्त दशा में तीनों लोकों में घूम कर दु:खी संसार को आनंदित करते हैं।" [1] खड़ी शिखा, हाथ में वीणा , मुख से ' नारायण ' शब्द का जाप, पवन पादुका पर मनचाहे वहाँ विचरण करने वाले नारद से सभी परिचित हैं। श्रीकृष्ण देवर्षियों में नारद को अपनी विभूति बताते हैं [2] । वैदिक साहित्य, रामायण , महाभारत , पुराण , स्मृतियाँ , सभी शास्त्रों में कहीं ना कहीं नारद का निर्देश निश्चित रूप से होता ही है। ऋग्वेद मंडल में 8-9 के कई सूक्तों के दृष्टा नारद हैं। अथर्ववेद , ऐतरेय ब्राह्मण , मैत्रायणी संहिता आदि में नारद का उल्लेख है। पूर्व कल्प में नारद 'उपबर्हण' नाम के गंधर्व थे। उन्हें अपने रूप पर अभिमान था। एक बार जब ब्रह्मा की सेवा में अप्सराएँ और गंधर्व गीत और नृत्य से जगत्सृष्टा की आराधना कर रहे थे, उपबर्हण स्त्रियों के साथ श्रृंगार भाव से वंहा आया। उपबर्हण का यह अशिष्ट आचरण देख कर ब्रह्मा कुपित हो गये और उन्होंने उसे 'शूद्र योनि' में जन्म लेने का शाप दे दिया। शाप के फलस्वरूप वह ...

बच्चियां बचाओ देश बचाओ ..!

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बच्चियों को बचानें के लिए एक अभियान तैय्यार किया है ..,बच्चियां बचाओ  देश बचाओ ..! आप सभी का इसमें स्थानीय स्तरों पर सहयोग  चाहिए ..! जिनके पास समय और कम करने की इच्छा हो अपने मोवाइल नंबर सहित  पूरा पता मेरे ईमेल sisodiaarvind0@gmail.com पर भेज दें कार्य योजना से आपको अवगत करवाया जाता रहेगा ..!

संघ के वरिष्ठ प्रचारक कृष्णचंद जी भार्गव भैय्या जी

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