शेखावत - एक जीवन परिचय


राजस्थान का एक ही सिंह, भेंरोसिंह..... , भेंरोसिंह..... ,

यह नारा बहुत सालों से गूजता रहा , अब यह नारा नही लगेगा , क्यों की शेखावत साहव नही रहे । १६ मई २०१० को उनकी अंतिम यात्रा निकली जिसमें जयपुर सहित राजस्थान से भारी संखया में लोग पहुचे । देश की जानी मानी हस्तियआं समिलित हुई ।
यात्रा मार्ग में रह रह कर बार बार गूजता रहा ......
जब तक सूरज चाँद रहेगा , शेखावत तेरा नाम रहेगा।
वे सचमुच राजस्थान की शान थे ।

उनका जन्म धनतेरस, २३ अक्तूबर १९२३ को हुआ था ।
पिता देवीसिंह अध्यापक और माता बन्ने कंवर , मध्यम वर्गीय राजपूत परिवार था ।
शेखावत सूर्यवंशी कछवाह राजपूत होते हें ।
उनके तीन भाई विशन सिंह , गोर्धन सिंह, लक्ष्मण सिंह ।
शिक्षाफर्स्ट इयर ,
विवाह १९४१ में सूरज कंवर से विवाह कर दिया गया .इसी वर्ष पिता जी का देहांत हो गया । सो उन्हें पुलिस की नोकरी करनी पड़ी मगर १९४८ में पुलिस छोड़ दी। तब राजस्थान की गठन प्रक्रिया चल रही थी ।
वे जनसंघ के संस्थापक काल से ही जुड़ गये और जनता पार्टी तथा भा ज पा की स्थापना में भी सक्रिय रहे ।
१९५२ में वे १० रूपये उधर ले कर दाता रामगढ से दीपक चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़े और जीते । तब से उनका सफर लगातार चलता रहा वे 1० वार विधायक , १९७४ से १९७७ तक राज्य सभा के सदस्य रहे ।
तीन वार मुख्य मंत्री बने।
पहली वार २२ जून १९७७ से १५ फरवरी १९८० तक ।
दूसरी वार ४ मार्च १९९० से १५ दिसम्बर १९९२ तक । और
तीसरी वार १५ दिसम्बर १९९२से ३१ दिसम्बर १९९८ तक ।
और तिन बार वे नेता प्रति पक्ष भी रहे,
पहली वक्र १५ जुले १९८० से १० मर्च १९८५ तक
दूसरी वार २८ मार्च १९८५ से ३० दिसम्बर १९८९ तक ,
तीसरी वार ०८ जनवरी १९९९ से १८ अगस्त २००२ तक ।
उनके एक पुत्री रतन कंवर हें । दामाद नरपत सिंह राजवी भी मंत्री रहे हें । शेखावत के दो दोहते और एक दोहिति हे , मूमल दोहिति और विक्रमादित्य तथा अभिमन्यु दोहिता ।
१२ अगस्त २००२ को देश के ११ वें उप राष्ट्रपति बने।कार्यकाल १९ अगस्त २००२ से २१ जुलाई २००७ तक ।
वे एक जन नेता थे ,उन्हों ने राजस्थान के १० अलग अलग स्थानों से विधान सभा चुनाव लड़े और उनमें से ८ में विजय प्राप्त की । वे १ से ११ तक की राजस्थान विधान सभों में से मात्र ५वि में नही थे । अर्थार्त १० विधान सभा चुनवों में वे जित कर गये थे ।
अपत कल में १९ माह जेल में रहे । विधायक दल के नेता भी अनेक वार रहे ।
वे पार्टी में अनेकों पदों पर रहते हुए,प्रदेश अध्यक्ष , राष्ट्रिय उपाध्यक्ष और किसान मोर्च के राष्ट्रिय अध्यक्ष बने।
अरविन्द सिसोदिया
राधा क्रिशन मंदिर रोड ,
ददवारा , कोटा। राजस्थान ।

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

हिंदू नववर्ष 2083 को भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप में मनाये जाने का आव्हान

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

लोकसभा अध्यक्ष के एआई (AI) जनरेटेड 'डीपफेक' वीडियो पर कांग्रेस संचार विभाग के 9 प्रमुख नेताओं को विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) और सदन की अवमानना (Contempt of House) का नोटिस जारी

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, मास्को जेल में..?

काउंटेंर क्लेम धारा 372 के संदर्भ में...

प्रखर राष्ट्रवादी मोदी सरकार को अस्थिर करने के,विदेशी षड्यंत्रों से देश को सतर्क रहना होगा — अरविन्द सिसोदिया

सर्वप्रथम 27 दिसम्बर 1911 को गाया गया था राष्ट्रगान जन गण मन अधिनायक जय है jan-gan-man