अफजल गुरु जेसे आतंकवादी कांग्रेस के घरजमाई


न्यू देहली , संसद भवन पर १३ दिसम्बर २००१ को हमला हुआ था , उस का मास्टर माईंड अफजल गुरु को स्थानीय अदालत २००२ में , उच्च न्यायलय २००३ में और सर्वोच्च न्यायाके २००५ में फांशी की सजा सुना चूका हे , अब किस बात का इंतजार हो रहा हे । संसद पर हमला देश के मष्तिष्क पर हमला था , सिपाहियों की सूझ बुझ से सांसद बच गये तो आप खामोश ही हो गये ।


यह मामला और अन्य मामले भिन्न हें , यह मामला देश की सम्प्रभुता की गिरेवान पर हाथ डालना हे। इस तरह के मामले में , कोई क्रम बाध्यता नही देखि जाती । इंदिरा जी के हत्यारों ने भी बचाव का यह रास्ता चुना था मगर उसका निव्टारा तुरंत कर दिया गया था । कोई कानून नही हे क्रम का । जब तय हे की दया याचिका का कोई महत्व ही नही हे तो विल्म्वित करने का क्या ओचित्य हे ।


सामान्य प्रकरणों में दया याचिका का पश्न हे । मगर देश के साथ युद्ध जेसे विषयों पर जब यह तय हे की माफ़ी होही नही सकती तो लम्बित करने का मतलब क्या हे . कांग्रेस के प्रवक्ता कह रहे हें की अभी तक राजीव गाँधी के हत्यारों को फंशी नही दी गई हे . बुरा न मने विदेशों में तो राजीव जी की हत्या के लिए कुँत्रोची को जिम्मेवार ठहराया जा रहा हे . आप राजीव गाँधी के हत्यारों को क्यों बचा रहे हो यह तो तुम से ज्यादा कोन जान सकता हे ।

अरविन्द सीसोदिया

राधा krshan   मंदिर रोड ,

ददवारा , कोटा ।


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