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एक ही उपलब्धी - तरसती जनता और तरसता गरीव

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अब जोर से नारा लगाओ , सी बी आई  हमारी  हे हमको वोट दिलाती हे . सी बी आई  जिन्दावाद कांग्रेस पार्टी जिदावाद . य़ू पी ए कई सरकार कई दूसरी पारी का एक साल बीत गया हे . २१ मई २०१० को उसकी वर्षगांठ  थी इस एक साल क़ी सबसे चर्चित उपलब्धी यही हे क़ी कांग्रेस के हाथ एक येशा मन्त्र लगा हे क़ी उसकी अल्पमत सरकार पूरे ५ साल चलेगी , क्यों क़ी भगबान क़ी दया से ज्यादातर प्रदेश स्तरीय दल और उनके नेता जी भ्रस्ट हें . सब पर आय से अधिक धन या सम्पत्ति हे . सबके  सब सी बी आई के दायरे में हें . सो हमारी सम्पत्ति हमें दो हमारा धन हमें दो और हमसे समर्थन ले लो , फायदा तो यह हे क़ी अब कांग्रेस को बिना मंत्री पद क़ी इक्षा  के भी वोट मिल रहे हें . खेर गत सरकार को नोटों से बचाने वाली कांग्रेस को यह तो फायदा ही हे क़ी अब बिना पैसा सरकार चलेगी . - इस सरकार क़ी सबसे बड़ी कामयाबी यह हे क़ी सीना ठोक कर मन्हगाई बड़ी , सरकार रोज रोज मंहगाई बड़ ने से खुश हुई . उन्हें शर्म्म नही आई . सरकार के मंत्रियों ने बयाँ दे कर इसका स्वागत किया . जायज बताया . और भी बदने क़ी कामना क़ी . जेसे क़ी इन मंत्रियों को मन्हगाई में से कमीसन

राजीव गाधी को , कांग्रेस की श्रधान्जली झूठी.....

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राजीव गाधी की दुखद हत्या २१ मई १९९१ में हुई थी . तब यह सामने आया था की हत्या के लिए एल टी टी ई जिम्मेवार  हे उसकी सुबह चिन्तक ड़ी एम् के की करुनानिधि सरकार को १९९१ में बर्खास्त कर दिया गया था, तब कांग्रेस की १ नम्वर दुश्मन करुनानिधि की पार्टी थी . केंद्र में गुजराल सरकार का हिस्स भी ड़ी एम् के थी और जेन आयोग  ने भी इस की भूमिका को संदिग्ध ठहराते हुए टिप्पणी की थी . तब कांग्रेस ने गुजराल सरकार से समर्थन वापिस  ले लिया था . और सरकार को गिरा दिया था .तब तक कांग्रेस को और सोनिया जी को राजीव बड़े थे , दुश्मन दुश्मन था . मगर सत्ता का सुख बहुत बुरा होता हे सब कुछ भुला देता हे . आज जब भारत सरकार कांग्रेस चला रही हे तब कुराना निधि को गले लगाया जा चूका हे . कांग्रेस और करुणानिधि आब एक हें . कुछ साल पहले शत्रु थे , स्वार्थ की दोस्ती हे , राजीव की जाँच कर रहे, जेन  आयोग ने हत्या के लिए करुणानिधि के सामने ऊँगली उठाई थी . मगर सत्ता की लिए सब भूल गये .  . प्रश्न यह हे की सोनिया के होते हुए भी जब स्वर्थ बड़ा हे तो फिर राजीव क्या हें . उनके तो वे पति थे और की बात छोडो मगर उन्हें तो यह नही कर्ण चाहिए