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जुलाई 12, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दुर्घटना पर भी राजनीति: राहूल पहले तो नहीं पहुचे... रेल दुर्घटनाओं में...

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- अरविन्द सीसौदिया  कालका मेल  बंगाल में दुर्घटना ग्रस्त होती या उत्तर प्रदेश के बाहर यह दुर्घटना रही होती तो घायलों का हालचाल पूछने राहुल गांधी नहीं पहुचते, क्यों कि यूपीए 2 अभी तक घोटालों के अलावा रेल दुर्घटनाओं के लिये भी प्रसिद्ध है। मगर राहुल अभी तक ओर कहीं नहीं गये थे...! उत्तर प्रदेश के चुनाव सामने हैं,इसलिये ये  कालका की जलती राख पर राजनीतिक रोटियां सेकने  जा पहुंचे....!!  राहुल चुनावी ओपचारिकता को छोड वास्तविक जनसेवा को आगे आयें तो राजनीति के युवा वर्ग को नई दिशा मिले जो आज सिर्फ पद,पैसा और पशुता की ओर अग्रसर है।  कानपुर। कांग्रेस के युवराज और अमेठी के सांसद राहुल गांधी आज फतेहपुर के निकट मलवा में हुए कालका मेल हादसे में घायल हुए लोगों के घावों पर मरहम लगाने के लिये कानपुर पहुंचे। राहुल गांधी कानपुर स्थित हैलेट अस्‍पताल जाकर घायलों का हालचाल लिया और उन्‍हें उचित सहयोग उपलब्‍ध कराने का भरोसा दिलाया। सच पूछिए तो यह कालका की जलती राख पर राजनीतिक रोटियां सेकने जैसा ही है।   मालूम हो कि कालका मेल हादसे में लगभग 70 लोगों की मौत हो गई थी और 250 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल

राजीव गाँधी "कांग्रेस" : स्विस पत्रिका Schweizer Illustrierte

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बोलती बंद . . . एक स्विस पत्रिका Schweizer Illustrierte जो की कोई आम पत्रिका नहीं है, इस पत्रिका की लगभग 2,15,000 प्रतियाँ छपती हैं और इसके पाठकों की संख्या लगभग 9,17,000 है, जो पूरे स्विट्ज़रलैंड की व्यस्क आबादी का छठा हिस्सा हे !! इस पत्रिका के 19 नवम्बर, 1991 के अंक में प्रकाशित एक लेख में दुनिया के 14 नेताओं के नाम दिए गये, ये वो लोग हैं जिनके स्विस बैंकों में खाते हैं और जिसमें अकूत धन जमा है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी इसमें शामिल है ! अब आप ही सोचे जब 19 नवम्बर, 1991 के समय राजीव गाँधी "कांग्रेस" का नाम लेख में छप चुका . . . अब अगर नयी सूचि आये तो पता नहीं कितने नाम सामने आये . . . क्या यही काले  

सुपर प्रधानमंत्री सोनिया ही........

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- अरविन्द सीसौदिया भारत का प्रधानमंत्री विचारा अपने मंत्रीमण्डल के फेरबदल के लिये सोनिया गांधी के चार चक्कर लगा चुके हें । तब कहीं उन्हे इजाजत मिल पाई...., यह काम गुप्त तरीके से भी हो सकता था। मगर एक एक खबर बाकायदा प्रकाशित होता रहा ताबी यह संदेश जा सके कि प्रधानमंत्री की स्थिती बस्ता उठाने वाले जैसी मात्र है। यह भारतीय लोकतंत्र का शर्मनाक अध्याय है। देखें कब इससे मुक्ती मिलती है। दिल्‍ली। यूपीए सरकार अपने दागी मंत्रियों की छटनी कर मंत्रिमंडल का विस्‍तार करने में जुटी हुई थी। प्रधानमंत्री मनमो‍हन सिंह और कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी इसके लिए पिछले एक हफ्ते में 4 मुलाकातें कर चुके हैं। लेकिन शायद गठबंधन की मजबूरियां कहें या फिर मंत्रियों के नामों पर आम सहमति की मुश्किल, म‍ंत्रिमंडल में होने वाले विस्‍तार में देरी हो रही है। डीएमके के ए राजा और दयानिधि मारन के इस्‍तीफे के बाद टेलीकॉम और कपड़ा मंत्रालय की सीटें खाली हैं। इसके अलावा आर्थिक मामलों के मंत्री मुरली देवड़ा के इस्‍तीफे के बाद इस विभाग के लिए भी मंत्री पद पर विचार किया जाना है। कौन सा मंत्रालय किस पार्टी के पास जाएगा इस