एक नादानी जीवन भर का संकट ..

एक नादानी जीवन भर का संकट ..
जयपुर में एक सरकारी  कमर्चारी ने अपनी सारी उम्र की कमाई,आखिरी दिन आखिरी छड़ों में गँवा दी ....!! इस आदमी का बुढ़ापा ख़राब हो गया , न जानें कितने चक्करों के बाद यह सुलझेगा या फंसेगा, भगवान जानें..!! 
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जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने देवस्थान विभाग के एक मैनेजर को 11 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए शुक्रवार को उसके ऑफिस में रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मैनेजर ने यह रिश्वत एक समाजसेवी से किसी ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने की एवज में ली थी।

एसीबी के एएसपी आशाराम चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी भंवरसिंह राजपुरोहित है। वह पुरानी विधानसभा के सामने रामचंद्र जी के मंदिर में स्थित देवस्थान विभाग में मैनेजर है। इस संबंध में निवाई महंत का रास्ता रामगंज बाजार निवासी सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गालाल पांचाल ने एसीबी में भंवरसिंह राजपुरोहित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, कि वह करीब एक माह पहले नर नारायण सेवा समिति ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए भंवरसिंह से मिला था।
काफी दिनों तक दुर्गालाल को चक्कर कटवाने के बाद भंवरसिंह ने उसे सेवा पानी की व्यवस्था करने को कहा। बाद में, भंवरसिंह ने दुर्गालाल से ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने की एवज में 11 हजार रुपयों की मांग की। इस पर परिवादी दुर्गालाल गुरुवार को देवस्थान के कार्यालय में पहुंचा और भंवरसिंह को ऑफिस में 1 हजार रुपए दे आया। इस बीच दुर्गालाल ने एसीबी में इसकी शिकायत दर्ज करा दी।  
सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने पर एएसपी आशाराम चौधरी के नेतृत्व में गठित टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की। शुक्रवार दोपहर को दुर्गालाल रिश्वत के 10 हजार रुपए लेकर भंवरसिंह को देने उनके ऑफिस पहुंचा। रिश्वत की राशि देने के बाद दुर्गालाल ज्योंही ऑफिस से बाहर आया। तभी एसीबी की टीम ने भंवरलाल को रंगे हाथों पकड़ लिया।
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जयपुर. देवस्थान विभाग के एक मैनेजर को एसीबी ने रिटायरमेंट की विदाई पार्टी से चंद घंटे पहले दफ्तर में घूस लेते गिरफ्तार कर लिया। मैनेजर ने ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने के लिए 11 हजार रु. लिए थे। एक हजार रुपए वह पहले ले चुका था। एसीबी के एएसपी आशाराम चौधरी ने बताया कि पुरानी विधानसभा के सामने रामचंद्रजी के मंदिर में स्थित देवस्थान विभाग में मैनेजर भंवरसिंह राजपुरोहित के खिलाफ निवाई महंत का रास्ता रामगंज बाजार निवासी दुर्गालाल पांचाल ने एसीबी में शिकायत की थी।

पांचाल ने बताया था कि करीब एक माह पहले नर नारायण सेवा समिति ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए वे भंवरसिंह से मिले थे। काफी चक्कर कटवाने के बाद भंवरसिंह ने ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करने की एवज में 12 हजार रु. की रिश्वत मांगी। पांचाल ने गुरुवार को भंवरसिंह को हजार रुपए दे दिए। शुक्रवार दोपहर पांचाल 11 हजार रु. लेकर भंवर के ऑफिस पहुंचा। वहां एक तरफ भंवर के रिटायरमेंट की विदाई पार्टी की तैयारी चल रही थी, वहीं दूसरी ओर वह रिश्वत ले रहा था।

पांचाल दोपहर 3 बजे जैसे ही रिश्वत देकर ऑफिस से बाहर आए, एसीबी की टीम ने भंवरलाल को पकड़ लिया।

गिड़गिड़ाने लगा, कहा- मैंने नहीं ली रिश्वत 

रिश्वत के रुपयों को भंवरसिंह ने ऑफिस की अलमारी में रख दिया था। एसीबी टीम पहुंची तो वह गिड़गिड़ाने लगा। उसने कहा—मैंने रुपए नहीं लिए। मेरे पास रुपए कहां हैं। इस पर एसीबी ने भंवरलाल के हाथ धुलवाए तो गुलाबी रंग छूटने लगा। फिर अलमारी से रुपए बरामद कर अलमारी जब्त कर ली।

काम कराने का वादा किया था 

मैनेजर भंवरसिंह की दुर्गालाल से बातचीत

पांचाल : आपके कहे अनुसार मैं बाकी रकम ले आया हूं। अब ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा ना।

भंवरलाल : आज मेरा रिटायरमेंट है। तुम्हारा काम करवा दूंगा।

पांचाल : साहब, आपका रिटायरमेंट हो जाएगा तो मेरे काम का क्या होगा? आप मेरी मुलाकात किसी और अधिकारी से करा दो।

भंवरलाल : काम पूरा होने की आप चिंता मत करो। मैं यहां आता रहूंगा। आपका काम हो जाएगा। आप तो कोई और काम हो तो भी बता देना।

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