पोस्ट

अक्तूबर 12, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राष्ट्रद्रोही प्रशांत भूषण पर कार्यवाही क्यों नहीं ...?

चित्र
- अरविन्द सीसौदिया , कोटा, राजस्थान  दूध मांगो दूध देगें ,  कश्मीर मांगा तो चीर देंगें।। यह नारा हमारे देश में निरंतर गूंज रहा है। यह देश की आवाज है।। जम्मू और कश्मीर, भारत का अभिन्न अंग आज से नहीं हजारों साल से है।  .....जम्मू और कश्मीर,प्रशांतभूषण का बटुआ नहीं है। जो बे किसी को भी दे दें.....!!! जब जम्मू और कश्मीर में कोई शत्रु हमारी सीमा में घुसने की कोशिश करता है तो हमारा सैनिक उसे गोली मार देता है। हमारा सैनिक मर जाता है मिट जाता है मगर जीते जी दुश्मन को देश में घुसने नहीं देता ।  प्रशांत भूषण ने देशहित, संविधन और भारतीय कानूनों की सीमाओं का लगातार उल्लंघन किया है। उन्हे सजा क्यों नहीं दी गई जो जनता को कानून अपने हाथ में लेना पडा.....? कुछ  समय पूर्व प्रशांत भूषण कोटा राजस्थान में आये थे। मीसावंदियों के कार्यक्रम में,तब भी वे इस मुद्दे पर पिटते पिटते बचे थे। अब नई दिल्ली में ही देशद्रोही प्रशांत भूषण की पिटाई हो गई। यह इसलिये हुआ कि दिल्ली  और कई राज्यो में भारत से जम्मू और कश्मीर को आजाद करने की बकालत करते फिर रहे थे । मगर भारत सरकार और राज्य सरकारों को प्रशांत भूषण पर