भुखमरी : दुनिया की एक चौथाई आबादी भारत में

'ऑन द ब्रिंक : हू बेस्ट प्रिपयर्ड फॉर ए क्लाइमेट एंड हंगर क्राइसिस'


हमारे प्रधान मंत्री बड़े अर्थ शास्त्री हैं उन्हें छोटी छोटी जरुरत भी नहीं जुटा पा रही जनता नहीं दिख रही ...बड़े बड़े घोटालों से जो फुर्शत नहीं है... विश्व की एक चोथाई भूखा मारी की कगार पर खडी जन संख्या उन्हें बिचलित नहीं कर पा रही.., इस का एक ही मतलव है की हमारे प्रधान मंत्री असंवेदनशील हैं...

जलवायु परिवर्तन और भुखमरी का खतरा झेलने वाले 21 विकासशील देशों में भारत को सातवें स्थान पर रखा गया है। यह खुलासा 10 octbar 2011 सोमवार को एक नए अध्ययन में किया गया है। गैरसरकारी संगठन एक्शनएड द्वारा किए गए अध्ययन 'ऑन द ब्रिंक : हू बेस्ट प्रिपयर्ड फॉर ए क्लाइमेट एंड हंगर क्राइसिस' में भारत को पाकिस्तान और नाइजीरिया से ऊपर रखा गया है। अध्ययन में कहा गया है कि विश्व के सामने आज तीन प्रमुख चुनौतियां हैं- जलवायु परिवर्तन, संसाधन का अभाव और खाद्य मूल्य में अस्थिरता।
एक्शनएड के कार्यकारी निदेशक संदीप चचरा ने कहा कि भुखमरी के कगार पर जीवनयापन कर रहे दुनिया की एक चौथाई आबादी भारत में रहती है। अगर यहां हालात में सुधार होता है तो इससे वैश्विक स्तर पर गरीबी और भुखमरी कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दुनियाभर के एक तिहाई कुपोषित बच्चे भारत में हैं।

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