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डॉ. राधाकृष्णन के सम्‍मान में 'शिक्षक दिवस' मनाते हैं

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डॉ. राधाकृष्णन, जिनके सम्‍मान में हम मनाते हैं 'शिक्षक दिवस' आईएएनएस [Edited By: अमरेश सौरभ] | नई दिल्ली, 5 सितम्बर 2013               एक शिक्षक की दी हुई शिक्षा से ही बच्चे आगे चलकर देश के कर्णधार बनते हैं. ऐसे ही एक शिक्षक थे भारत के पूर्व राष्ट्रपति और दार्शनिक तथा शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जिनके सम्मान में उनके जन्मदिवस यानी 5 सितंबर को देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है.             डॉ. राधाकृष्णन महान शिक्षाविद थे. उनका कहना था कि शिक्षा का मतलब सिर्फ जानकारी देना ही नहीं है. जानकारी और तकनीकी गुर का अपना महत्व है लेकिन बौद्धिक झुकाव और लोकतांत्रिक भावना का भी महत्व है, क्योंकि इन भावनाओं के साथ छात्र उत्तरदायी नागरिक बनते हैं. डॉ. राधाकृष्णन मानते थे कि जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होगा, तब तक शिक्षा को मिशन का रूप नहीं मिल पाएगा.             अपने जीवन में आदर्श शिक्षक रहे भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में हुआ था. इनके पिता सर्वपल्ली वीरास्वामी राजस्व विभाग में काम

राष्ट्रीय सुरक्षा व सामाजिक सुधार के हम बनें भागीदार

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३१ ऑगस्ट और १ सितम्बर २०१३ को जयपुर में ' आयोजित राष्ट्रिय संगोष्ठी  भारत की रक्षा और अर्थ व्यवस्था पर , माननीय इन्द्रेश कुमार जी के मुख्य मार्ग दर्शन में संपन्न हुई , सारभूत सन्दर्भ विषय वस्तु निम्नानुसार हे । - अरविन्द सिसोदिया , कोटा । राष्ट्रीय सुरक्षा व सामाजिक सुधार के हम बनें भागीदार     राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक व सामाजिक सुधार, घुसपैठ, जाली नोट, नशीले पदार्थ, आतंकी व आतंकी हथियारों का सीमाओं से प्रवेश, मतान्तरण, भ्रष्टाचार, आतंकी हमला, मंहगाई, साम्प्रदायिकता राम मन्दिर, गोधरा गुजरात, धारा 370, वोट बैंक व अल्पसंख्यकवाद, पंथीय आरक्षण, गाय गंगा संरक्षण, महिला सुरक्षा, अस्पृश्यता निवारण, आतंकवाद/ अलगाववाद/ माओवाद आदि महत्वपूर्ण विषय आज हमारे देश को प्रभावित कर रहे हैं। आज हमारे देश में आये दिन होती आतंकवादी घटनाओं से हमारे नागरिकों को जान से हाथ धोना पड़ रहा है वहीं करोड़ों रूपये की हमारी सम्पत्ति का भी नुकसान हो रहा है। इस सबसे आम आदमी में भय व्याप्त हो रहा है। सरकार व सुरक्षा एजेन्सियों के हवाले छोड़ कर हम चैन की नींद नहीं सो सकते है। हमारे भी कुछ कर्तव्य है जिन्