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सितंबर 23, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

महाफेंकू चिदम्बरम जी ,सरकार के मंत्री और पार्टी के प्रवक्ता में र्फक रहना चाहिये

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महाफेंकू चिदम्बरम जी ,सरकार के मंत्री और पार्टी के प्रवक्ता में र्फक रहना चाहिये हाल ही केन्द्र सरकार के जिम्मेवार मंत्री पी चिदम्बरम ने मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को असंसदीय भाषा का उपयोग करते हुये फेंकू कह दिया ! यह करके उन्होनें अपनी ही संसदीय मर्यादा और सरकार की गंभीरता को अपमानित कर लिया है। जबाव में उन्हे महा फेंकू कह दिया गया । यूपीए 2 की सरकार विफल है तो इसके लिये सरकार के प्रधानमंत्री और मंत्री जिम्मेवार हैं, अपनी विफलता के लिये पूर्ववर्ती सरकारों के आंकडों के साथ आप हेराफेरी कैसे कर सकते हैं ? अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार में आम आदमी की जरूतों का पूरा - पूरा ध्यान रखनें एवं देश को तेजगति से विकसित करने पर ध्यान दिया गया था। आप रिपोर्ट कार्ड उठा कर देखलें या बहस करलें। इसलिये देश की विकास दर ऊंची थी। आपने चीन,अमरीका और यूरोप के हितों की चिंता की, उनका माल भारत में ज्यादा से ज्यादा बिके इसकी चिंता की, आम भारतवासी को लूट का साधन मान लिया, देश के संसाधनों से लेकर आम आदमी की जेब तक नहीं छोडी, इसलिये आप की विकास दर है ही नही , ....तो बढ़ेगी कैसे ? माफ करना चिदम्बरम जी आपकी बकव

आवश्यक सेवाओं के लिए आधार कार्ड होना जरूरी नहीं - सर्वोच्च न्यायालय

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आधार कार्ड बनाने की विधि तो बहुत अच्छी है, मगर इन्हे प्राईवेट ठेकेदार बना रहें हैं, उनके कमप्यूटर पर कम गुणवत्ता वाले आपरेटर हैं। अधिकतम कार्ड बनाने पर ही उन्हे फायदा है। इस कारण इनकी अहमियत संदिग्ध और कम वेल्यू की हो जाती है। जब इन्हे बनाने के लिये जिन दस्तावेजों की सूची है , उन दस्तावेजों के धारक के प्रमाण हैं । उन दस्तावेजों को नकार कैसे सकते हैं। वोटर आईडी नागरिकता का सबसे बड़ा सबूत है, राशनकार्ड जिला कलेक्टर द्वारा प्रदत्त है। बैंक खाते की पासबुक गंभीर जांच पर और एक तस्दीकसुदा खातेदार से बनती है। ठीक है आधारकार्ड के ठेकेदारों से किसी को कोई फायदा होगा, मगर इस संदिग्ध दस्तावेज को पक्के से अधिक महत्व देना अनुचित है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश उचित है। -------------------- 'आवश्यक सेवाओं के लिए आधार कार्ड होना जरूरी नहीं' ज़ी मीडिया ब्यूरो नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने एक फैसले में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि इस बात का ध्यान रखा जाये कि किसी भी अवैध नागरिक का आधार कार्ड न बने । इसके साथ ही अदालत ने ये भी निर्देश दिए हैं कि आवश्यक सेव

विफलता सरकारों की: ठीकरा सोसल मीडिया पर

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राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक प्रधानमंत्री मनमोहनसिंहजी ने अभी - अभी सोसल मीडिया पर साम्प्रदायिकता की ठीकरा फोड़ा है। मगर वे यह भूल गये कि सोसाल मीडिया पर है कौन ? इस प्रश्न का उत्तर यदि वे खोजेंगे तो पायेंगे कि सोसाल मीडिया पर अधिकांशतः आम जनता है। वे लोग हैं जिनकी बात को प्रिंट मीडिया या चैनल्स तब्बजो नहीं देते हैं या उनकी बात जानने तक उनकी पहुंच नहीं है। सोसल मीडिया जनता का वह प्लेटफार्म है,जिस पर आमजन अपने विचारों को निर्विद्धन प्रगट कर सकती है। यह एक मात्र ओपन फील्ड भी जनता से कांग्रेस सरकार छीनना चाहती है। आज जब सोसाल मीडिया के कारण ही विश्व में हजारों छुपे सच उजागर हो रहे हैं , येशे में स्वंय सरकारों को आत्म निरिक्षण करना चाहिये कि वे कर क्या रहे हैं। समस्यायें सरकारों कर गलत और दमनकारी नितियों के कारण उत्पन्न होती हैं, ठीकरा सोसाल मीडिया पर क्यों भला ! --------------- हिंसा भड़काने में सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ibnkhabar.com | Sep 23, 2013 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को सांप्रदायिक हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और कहा क