किसान खुदकुशी केसः चश्मदीदों ने बताया गजेंद्र को उकसाया गया





किसान खुदकुशी केसः चश्मदीदों ने बताया गजेंद्र को उकसाया गया
Publish Date:Mon, 27 Apr 2015

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को किसान गजेंद्र सिंह खुदकुशी मामले की रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को सौंप दी। रिपोर्ट में गजेंद्र की मौत को हादसा बताया गया है। लेकिन इस मामले की तफ्तीश के दौरान दिल्ली पुलिस को दो अहम चश्मदीद मिले हैं। चश्मदीदों ने यह दावा किया है कि पेड़ पर चढ़ने के लिए कुछ लोग गजेंद्र सिंह को उकसा रहे थे। माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस इन दोनों चश्मदीदों को गवाह बना सकती है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। यह वीडियो फुटेज उसे विविध न्यूज चैनलों से प्राप्त हुए थे जो उस वक्त जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी की किसान रैली को कवर कर रहे थे। पुलिस को किसान गजेंद्र की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मिल गई है। जिसमें उसकी मौत का कारण दम घुटना बताया गया है।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को आम आदमी पार्टी की जंतर-मंतर पर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आयोजित रैली के दौरान एक किसान ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। रैली में उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मौजूद थे। इस किसान की पहचान गजेंद्र सिंह के रूप में हुई है। वह जंतर-मंतर पर आप नेताओं की मौजूदगी में पेड़ पर चढ़ गया और गमछे से खुद को फांसी लगा ली।

------
'गजेंद्र की आत्‍महत्‍या आप द्वारा रचित नाटक, जो त्रासदी मेें बदल गया'
Publish Date:Sun, 26 Apr 2015

नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने आरोप लगाया है कि राजस्थान के गजेन्द्र सिंह नामक किसान की आत्महत्या आम आदमी पार्टी द्वारा रचित एक 'नाटक' था, जो सचमुच की त्रासदी में बदल गया। संघ ने पार्टी को इस घटना से सबक लेने की सलाह देते हुए कहा है कि आप की किसान रैली राजनीति के 'निम्नतम स्तर' को छू गई और ऐसी गंदी राजनीति से बाज आना चाहिए। आप के 'अलग ढंग की पार्टी' होने के दावे पर प्रहार करते हुए संघ ने अपने मुखपत्र 'ऑर्गेनाइजर' में कहा है- 'आप ने भारतीय राजनीति में जिस प्रकार का मनोरंजन का पुट जो़ड़ा है वह विचित्र है। अराजकतावादी इस संगठन ने मीडिया का ध्यान खींचने का हर मौका भुनाया है। वैसे तो राजनीति में कुछ नौटंकी, नारेबाजी और नेतृत्व की तिकड़मबाजी तो हमेशा ही चलती है।' पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 'गरीबी हटाओ' और नरेंद्र मोदी के 'अच्छे दिन' जैसे नारों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे आकर्षक शब्द आम मतदाताओं के मन को छूते हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी ने किसान रैली के नाम पर जो किया वह राजनीति का निम्नतम स्तर छू जाना था। केंद्र को शर्मिंदा करने की कोशिश में 'आप' ने एक नाटक रचा जो त्रासदी में बदल गया। आप नेतृत्व पर आरोप लगाया गया कि चुनावी राजनीति में उसने हमेशा तिक़़डमों का इस्तेमाल किया। पार्टी ने मीडिया के जरिए जनता का ध्यान खींचने के प्रयास में कुछ तथाकथित किसानों को आत्महत्या का नाटक करने के लिए उकसाया और इस गंदी राजनीति में एक आदमी की सचमुच में जान चली गई। इस राजनीति का पूरी तरह त्याग किया जाना चाहिए। भारतीय राजनीति में आप के उदय को देश की मौजूदा राजनीतिक संस्कृति से हटकर देखने पर भी संपादकीय में टिप्पणी की गई है। कहा गया है कि 2013 में दिल्ली में अल्पावधि की सरकार चलाने के बाद लोकसभा चुनाव में वाराणसी से चुनाव लड़ने पर कई लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया था आप भी अन्य पार्टियों की तरह बदल रही है। लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में फिर से प्रचंड बहुमत से वापसी के बाद अलग ही रास्ता पकड़ा। संपादकीय में भूमि अध्यादेश पर भाजपा का बचाव करते हुए कांग्रेस पर किसान हितों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया गया है। 

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

Instead of Opposing the RSS, Intolerant Americans Should Look Within — Arvind Sisodia

अर्द्धनारिश्वर स्त्री, समान अस्तित्व का सम्मान

दुनिया भर की धार्मिक संस्कृति में हिन्दू धर्म की झलक World Sanatan Dharma

राजस्थान के व्याबर जिले में देवमाली गांव,कैंसर का 'झाड़ा'

भारत में मुस्लिम आबादी फल फूल रही है और पड़ोसी देश में हिंदू तेजी से समाप्त हो रहा है

अवरोध और अपमान की राष्ट्रघाती विपक्षी राजनीति को जनता सबक सिखाएगी — अरविंद सिसोदिया