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जम्मू और कश्मीर हिंदुत्व की ही बपौती

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पिछले दिनों , जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नैशनल कॉन्फ्रेंस चीफ फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान अध‍िकृत कश्मीर (पीओके) पर भारत के दावे को लेकर विवादित बयान दिया है। अब्दुल्ला ने कहा कि पीओके भारत की बपौती नहीं है जिसे वह हासिल कर ले। इसके साथ ही उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार को चुनौती दी कि वह पाकिस्तान के कब्जे से पीओके को लेकर दिखाए।        फारूक अब्दुल्ला का यह  बयान  मात्र पाकिस्तान को खुश करने वाला था , वे स्वयं जानते हैं की कश्मीर और उनके भी  पूर्वज  हिन्दू थे ! समस्त जम्बू दीप यानि कि एशिया महादीप सनातन संस्कृति था ! अफगानिस्थान से लेकर सुदूर म्यमांर मलेशिया इंडोनेशिया तक जो बड़ी बड़ी बोद्ध प्रतिमाएं है या नष्ट की हैं वे चीख चीख कर कह रहीं हैं की यह सारा का सारा प्रायदीप सनातन सभ्यता का  हैं ! इसलिये  फारूक अब्दुल्ला ये समझलें कि मानव सभ्यता के जन्म से कश्मीर हिंदुत्व की बपौती है ! - अरविन्द सिसोदिया , कोटा , राजस्थान 9414180151 / 9509559131   मानव सभ्यता के जन्म से ,  जम्मू और कश्मीर हिंदुत्व की ही बपौती  जम्मू और कश्मीर के लिए राजतरंगिणी तथा नीलम पुराण नामक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - गरीबों के हक़ की राशि का उन्हीं के कल्याण में इस्तेमाल

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गरीबों से लूटी गई राशि का उन्हीं के कल्याण में इस्तेमाल करने के लिए  PM मोदी ने BJP सांसदों-विधायकों से मांगा नोटबंदी के बाद खातों का ब्यौरा By Kishor Joshi Publish Date:Tue, 29 Nov 2016 नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के सभी सांसदों तथा विधायकों को निर्देश दिया है कि वे 8 नवंबर से 31 दिसंबर, 2016 के बीच हुए अपने-अपने बैंक खातों के लेनदेन का पूरा ब्यौरा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सौंपें। भाजपा संसदीय दल की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकसभा में पेश किया गया आयकर संशोधन विधेयक कालेधन को सफेद में बदलने के लिए नहीं, बल्कि गरीबों से लूटी गई राशि का उन्हीं के कल्याण में इस्तेमाल करने के लिए है। दरअसल विपक्षी पार्टियों का आरोप था कि नोटबंदी की जानकारी भाजपा नेताओं को पहले से थी। ऐसे में गृहमंत्री ने सोमवार को कहा था कि उनकी मंशा पर शक न किया जाए। वहीं मंगलवार को पीएम ने अपनी पार्टी के सासंदों और विधायकों का बैंक खातों का ब्यौरा मांगकर विपक्षी पार्टियों को अपनी ईमानदारी का सूबूत देने की कोशिश की है। वैस

नोटबंदी को जनता का समर्थन : गुजरात में भी भाजपा को भारी जीत मिली

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  गुजरात: नोटबंदी को जनता का समर्थन! निकाय-पंचायत चुनाव में खिला 'कमल', कांग्रेस को झटका By Amitabh Kumar | Updated Date: Nov 29 2016 अहमदाबाद : गुजरात में जिला पंचायत, तहसील पंचायत और नगरपालिका की 125 सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भारी जीत मिली है. प्राप्त जानकारी के अनुसार 125 सीटों में से भाजपा ने 109 पर कब्जा जमाकर सभी को आश्‍चर्यचकित कर दिया है. इससे पहले 125 में से 64 के करीब भाजपा के पास सीटें थीं. 64 से सीधे 109 सीटों पर आ जाना भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. इसके उलट कांग्रेस को इस चुनाव  में  125 सीटों में से मात्र 16 सटें मिलीं हैं. इससे पहले कांग्रेस की करीब 52 सीटें थीं. उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के फैसले के बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि भाजपा को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है , लेकिन महाराष्ट्र और गुजरात के नतीजों से सारे अनुमान और राजनीति के जानकारों की बातें खोखली साबित होती नजर आ रही है. दरअसल नोटबंदी को लेकर विपक्ष का आरोप है कि जनता को खासी दिक्कत हो रही है और जनता चुनावों में भाजपा को सबक सिखाएगी. यहां बता

भारतबंद बुरी तरह विफल हुआ - अरविन्द सिसोदिया

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भारतबंद बुरी तरह विफल हुआ है। किसी भी पार्टी के कार्यकर्ता में यह दम नहीुं हुआ कि वे दुकानें बंद करवानें निकल सकें। बंगाल में मामूली असर सिर्फ केरल और त्रिपुरा में रहा बांकी सिर्फ फोटो खिचवाई और न्यूज बनवाई तक ही सीमित रहा बंद । कुल मिलाकर बुरी तरह से फैल हुआ भारत बंद ।  - अरविन्द सिसोदिया, जिला महामंत्री, भाजपा कोटा, राजस्थान 94141 80151  नोटबंदी: विपक्ष का देश भर में विरोध प्रदर्शन, भाजपा बोली, फ्लॉप शो एजेंसी/ नई दिल्लीUpdated Tue, 29 Nov 2016 http://www.amarujala.com नोटबंदी के फैसले के खिलाफ विपक्षी दलों ने सोमवार को देश भर में विरोध प्रदर्शन किया। यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा समेत अन्य राज्यों में कांग्रेस, लेफ्ट, तृणमूल कांग्रेस व अन्य कई विपक्षी दलों के नेता सड़कों पर उतरे और नोटबंदी के लिए मोदी सरकार की आलोचना की। हालांकि वामदल शासित केरल और त्रिपुरा के बंद को छोड़कर ज्यादातर जगहों पर आम जनजीवन सामान्य रहा। वामदलों ने सोमवार को 12 घंटे के बंद के आह्वान किया था, जिसके चलते केरल और त्रिपुरा में जनजीवन ठप रहा। जबकि कांग्रेस, तृणमूल और अन्य कई दलों ने आक्रोश दिवस