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शहीदे आजम भगत सिंह के प्रेरणा स्त्रोत Shaheed Azam Bhagat Singh

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Source of inspiration of Shaheed Azam Bhagat Singh शहीदे आजम भगत सिंह के प्रेरणा स्त्रोत shaheede aajam bhagat sinh ke prerana strot शहीदे आजम भगत सिंह के प्रेरणा स्त्रोत  Shaheed Azam Bhagat Singh   सरदार भगत सिंह के प्रेरणा स्त्रोत  (शहीदे आजम भगत सिंह विशेषांक, १ नवम्बर २००७ अंक / पाथेय कण ) से - अरविन्द सिसौदिया  कभी वो दिन भी आएगा कि आजाद हम होंगे , ये अपनी ही जमीन होगी , यह अपना आसमां होगा | शहीदों कि चिताओं पर , लगेंगे हर बरस मेले , वतन पर मरने  वालों  का, यही बांकी निशां होगा |                         ये पंक्तियाँ तो १९३० के दौर की हैं, अगर आज भगत सिंह जीवित होते तो सौ वर्ष से अधिक के होते ...!  इतिहास कहता है कि गांधीजी और कांग्रेस चाहती तो ये क्रांतिवीर फांसी से बचाए जा सकते थे और यह भी सच है कि गांधी जी ने क्रांतिवीरों पर हो रहे अंग्रेजी शासन के अत्याचारों पर घोर उपेक्षा बरती | इनके मानवीय अधिकारों के लिए कभी व्रत , भूख हड़ताल , सत्याग्रह आयोजित नहीं क...

प्रथम क्रांतिपुरुष : शहीद मंगल पांडे Mangal Pandey,

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प्रथम क्रांतिपुरुष : क्रांतिकारी मंगल पांडे  First Krantipurush: Revolutionary Mangal Pandey   - अरविन्द सिसोदिया 9414180151 जीवन पुष्प चढा चरणों पर,माँगे मातृभूमि से यह वर, तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें । बहुत कम लोगों का अब ध्यान होगा कि भारत की प्रथम क्रांतीकारी मंगल पाण्डे का जन्म दिवस 19 जुलाई व बलिदान दिवस 8 अप्रेल है ।  1857 में इसी दिन उन्हे ब्रिटिश हकूमत ने फांसी दी थी और इसी बलिदान दिवस पर महान क्रांतिकारी भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त नें भारत की असेम्बली में बम फेंक कर सोये भारत को आजादी के लिये पुनः जगाया था। वीरों का बलिदान तो होता है मगर वह दुश्मन के ताबूत की अंतिम कील बन कर शत्रु का अंत करता है। मंगल पाण्डे, रानी लक्ष्मी बाई, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ही नहीं हजारों क्रांन्तिकारियों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया बल्कि उनकी महान शहादत ने भारत माता को अंग्रेजों की बेडियों से आजाद करवा कर, पुनः स्वतंत्रता के सिंहासन पर विराजमान किया है। उन सभी बलिदानियों को कोटि कोटि नमन ।           क्रांतिकारी मंगल पांडे ...

भगत सिंह का जन्म दिन २८ सितंबर

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*भगत सिंह का जन्म २८ सितंबर, १९०७,शनिवार सुबह ९ बजे लायलपुर ज़िले के बंगा गाँव (चक नम्बर १०५ जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था। हालांकि उनका पैतृक निवास आज भी भारतीय पंजाब के नवाँशहर ज़िले के खटकड़कलाँ गाँव में स्थित है। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। यह एक सिख परिवार था | **अमृतसर में १३ अप्रैल, १९१९ को हुए जलियाँवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसिएशन नाम के एक क्रान्तिकारी संगठन से जुड़ गए थे। भगत सिंह ने भारत की आज़ादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी। इस संगठन का उद्देश्य ‘सेवा,त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले’ नवयुवक तैयार करना था। ***भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर १७ दिसम्बर १९२८ को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जे०पी० सांडर्स को मारा था। इस कार्रवाई में क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने भी उनकी सहायता की थी। ****क्रान्तिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने अलीपुर रोड पर स्थित दिल्ली की तत्कालीन...