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चन्द्रशेखर आज़ाद : शहादत को सलाम

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- अरविन्द सिसोदिया           एच०एस०आर०ए० द्वारा किये गये साण्डर्स-वध और दिल्ली एसेम्बली बम काण्ड में  फाँसी  की सजा पाये तीन अभियुक्तों-  भगत सिंह ,  राजगुरु व  सुखदेव  ने अपील करने से साफ मना कर ही दिया था। अन्य सजायाफ्ता अभियुक्तों में से सिर्फ ३ ने ही प्रिवी कौन्सिल में अपील की। ११ फरवरी १९३१ को  लन्दन  की प्रिवी कौन्सिल में अपील की सुनवाई हुई। इन अभियुक्तों की ओर से एडवोकेट प्रिन्ट ने बहस की अनुमति माँगी थी किन्तु उन्हें अनुमति नहीं मिली और बहस सुने बिना ही अपील खारिज कर दी गयी।  चन्द्रशेखर आज़ाद  ने मृत्यु दण्ड पाये तीनों प्रमुख क्रान्तिकारियों की सजा कम कराने का काफी प्रयास किया। वे उत्तर प्रदेश की  सीतापुर  जेल में जाकर  गणेशशंकर विद्यार्थी  से मिले। विद्यार्थी से परामर्श कर वे  इलाहाबाद  गये और  जवाहरलाल नेहरू से उनके निवास  आनन्द भवन  में भेंट की। आजाद ने पण्डित नेहरू से यह आग्रह किया कि वे  गांधी जी  पर लॉर्ड इरविन से इन तीनों की  फाँसी  को उम्र- कैद में बदलवाने के लिये जोर डालें। नेहरू जी ने जब आजाद की बात नहीं मानी तो आजाद ने उनसे काफी देर तक बहस भी की। इस पर नेहरू जी ने क