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मोहनजी भागवत : समाज में सभी को परस्परावलम्बी होना चाहिये

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समाज में सभी को परस्परावलम्बी होना चाहिये - सम्मानीय भागवत जी कोटा / कसार 24 अक्टूबर । राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय डाॅ.मोहन मधुकरराव भागवत ने कहा ” विकास की गति धर्म युक्त नियंत्रित होनी चाहिये । मर्यादाहीन विकास तरक्की तो बहुत करता है किन्तु साथ ही बहुत सी विसंगतियां उत्पन्न करता है। इसमें पर्यावरण रक्षा का भी ध्यान रखा ही जाना चाहिये।“ वे गोयल प्रोटीन्य लिमिटेड ,कसार, जिला कोटा उद्योग समूह की द्वितीय इकाई उदघाटन समारोह के अवसर पर सम्बोधित कर रहे थे। सम्मानीय भागवत ने अपने सम्बोधन में कहा ” मनुष्य ही एक मात्र इस तरह का प्राणी है जिसकी क्षमतायें इतनी विस्तृत हैं कि वह पशुओं से भिन्न, दूसरों के बारे में भी सोच - समझ सकता है और परमार्थ करते हुए नर से नारायण पद को प्राप्त कर सकता है ।“ उन्होने कहा ” हिन्दू संस्कृति में परस्पर सहयोग और परोपकार को ही सर्वोच्च प्राथमिकता है वह संकुचित विचारों की अनुमति नहीं देती है बल्कि सभी प्रकार क्रियाकलापों में समन्वय और सद्भाव को स्थापित्य करती है। “  उन्होने कहा समाज सभी गतिविधियों को और सभी गतिविधियां समाज को प्रभावित करती हैं ।