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कांग्रेस की संधियों के कारण देश में 3500 से कुछ अधिक विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाें की लूट जारी है

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http://rajivdixit.in/Books/makadjal.pdf बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का भारत में प्रवेश भारत में विदेशी कम्पनियाँ तीन तरीके से कम कर रही है। पहला, सीधे अपनी शाखायें स्थापित करके, दूसरा अपनी सहायक कम्पनियों के माध्यम से, तीसरा देश की अन्य कम्पनियों के साथ साझेदार कम्पनी के रूप में। जून 1995 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 3500 से कुछ अधिक विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ, अपनी शाखाओं या सहायक कम्पनियों के रूप में देश में घुसकर व्यापार कर रही हैं। 20,000 से अधिक विदेशी समझौते देश में चल रहे हैं। औसतन 1000 से अधिक नये विदेशी समझौते प्रतिवर्ष देश में होते हैं। सन् 1972 के अन्त तक देश में कुल 740 विदेशी कम्पनियाँ थीं। जिनमें से 538 अपनी शाखायें खोलकर व 202 अपनी सहायक कम्पनियों के रूप में काम कर रही थीं। इनमें सबसे अधिक कम्पनियाँ ब्रिटेन की थीं। लेकिन आज सबसे अधिक कम्पनियाँ अमेरिका की हैं। समझौते के अन्तर्गत काम करने वाली सबसे अधिक कम्पनियाँ जर्मनी की हैं। 1977 में विदेशी कम्पनियों की संख्या 1136 हो गयी। आजादी के पूर्व सन् 1940 में 55 विदेशी कम्पनियाँ देश में सीधे कार्यरत थीं। आजादी के बा

आपातकाल के मीसा, डीआईआर बंदियों का जेलों में रिकॉर्ड नहीं

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आपातकाल के मीसा, डीआईआर बंदियों का जेलों में रिकॉर्ड नहीं आनंद चौधरी|  May 13, 2014, जयपुर. आपातकाल (1975 -77) के दौरान जेलों में यातना सहने वाले आधे से ज्यादा मीसा और डीआईआर बंदियों को नियम के फेर में पेंशन से महरूम रहना पड़ सकता है। दरअसल, पेंशन के लिए उन्हीं को पात्र माना गया है जो प्रदेश के मूल निवासी हैं और यहां की जेलों में बंद रहे। आवेदन के साथ जेल में बंद रहने का सर्टिफिकेट मांगा है, लेकिन कई जेलों में रिकॉर्ड नहीं है। जेल प्रशासन का कहना है कि 40 साल पुराना मामला होने से रिकॉर्ड जर्जर हैं। फटे-पुराने कागजों को जोड़कर सर्टिफिकेट दिए गए हैं। पूर्व सांसद रघुवीर सिंह कौशल, सवाई माधोपुर के नेता गिर्राज किशोर शर्मा का रिकॉर्ड भी नहीं है। कौशल को तो आरटीआई के तहत भी रिकॉर्ड हासिल नहीं हो पाया।  आपातकाल में सैकड़ों नेताओं की प्रदेश में गिरफ्तारी हुई थी। नियमों के तहत ये पेंशन से वंचित हो सकते हैं। यूपी, उत्तराखंड और एमपी में मीसा बंदियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देकर 15 हजार पेंशन दी जा रही है, लेकिन राजस्थान के नेताओं की पेंशन में नियम रुकावट बने हैं। शुरुआत में 850 को