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कांग्रेस के पैर की जूती बनाने वाला गठबंधन आखिर बिखरना ही है - अरविन्द सिसोदिया

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कांग्रेस के पैर की जूती बनाने वाला गठबंधन आखिर बिखरना ही है - अरविन्द सिसोदिया जब विपक्ष का गठबंधन बन रहा था तब ही बहुत से विपरीत लक्ष्य और आकांक्षायें थीं । जैसे पलटूराम नितिश कुमार का गठबंधन का नेता बनने की इच्छा थी, ममता और केजरीवाल अपने आप को गठबंधन का स्वयंभू नेता मानते थे। सबसे बडी बात बैठ कर भी कांग्रेस ने कभी अपने पत्ते नहीं खोले और वह गठबंधन की स्वयंभू नेता बनी रही , अभी भी कांग्रेस ही गठबंधन की नेता है। उसने जो व्यवहार अभी तक प्रदर्शित किया उससे तो अन्य दलों को कांग्रेस ने देसी भाषा में पैर की जूती मात्र माना है। में क्षमा चाहता हूं इस शब्द के लिए लेकिन यही सच है। इस तथकथित गठबंधन में सब एकत्र मात्र इसलिए होते रहे कि इसका इस्तेमाल कर अपनी ताकत बडा लेंगे या अपनी हॉनी रोक लेंगे। मगर गठबंधन का नाम रखने से लेकर पत्रकारवार्ताओं तक में मात्र कांग्रेस राजकुमार राहुल गांधी ही नेता बने रहे , उन्होनें किसी भी अन्य को कोई महत्व नहीं दिया । यहां तक... न ही सीटों का बंटवारा किया और न ही कॉमन मिनीमम एजेण्डा सेट किया । कुल मिला कर हर मामले को टाल कर अपनी ही अपनी करते हुए कांग्रे...

क्या, विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस गठबंधन बिखर जायेगा - अरविन्द सिसोदिया congress gathbandhn

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क्या, विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस गठबंधन बिखर जायेगा - अरविन्द सिसोदिया  कांग्रेस लगभग 20 सालों से राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के प्रयत्न में लगी हुई है। क्योंकि सोनिया गांधी प्रधानमंत्री इसलिए नहीं बन पाई कि वे इटली के जन्मी हुई हैं और उनके विरुद्ध तब सुब्रमयम स्वामी नें तत्कालीन राष्ट्रपति महोदय से कोई शिकायत की थी। किन्तु नेहरू परिवार का प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पहला हक है यह कांग्रेस मानती है व नेहरू परिवार के भक्तगण मानते हैं। वंश वाद और परिवार वाद में यह स्वाभाविक है। इसलिए सोनिया गांधी नें यह चैलेंज के रूप में लिया हुआ है और एक मां अपने बेटे के लिए यह करंनें से पीछे क्यों हटे। राहुल गांधी जब नाबालिग थे तब से वे अपने आपको भारत का प्रधानमंत्री मान रहे हैं, क्योंकि उन्हें कहा ही यह गया है कि तुम्हे भारत का अगला प्रधानमंत्री बनना है। इसलिए नीतीश कुमार या ममता बैनर्जी या अरविन्द केजरीवाल या कोई यह सोचे कि कांग्रेस की तरफ से किसी अन्य को प्रधानमंत्री बना दिया जायेगा तो यह गलत होगा। कांग्रेस की तरफ से तो अपरोक्ष स्पष्ट रूप से यह तय है कि उनका नेता, उनका पी...

गठबंधन में फंसे स्वाभिमानी दल, जल्द अलग हो जायेंगे - अरविन्द सिसोदिया I.N.D.I.A.

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गठबंधन में फंसे स्वाभिमानी दल, जल्द अलग हो जायेंगे - अरविन्द सिसोदिया  I.N.D.I.A. I.N.D.I.A. वास्तविक रूप में यह कांग्रेस गठबंधन है, यह इससे पूर्व में यू पी ए था, उससे पहले कांग्रेस ही था। मूलरूप से नेहरू परिवार जन कांग्रेस इसे कहना अधिक उचित होगा। महात्मा गाँधी नें जब कांग्रेस को भंग करने की सलाह दी तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू नें इसे अस्वीकार कर दिया। इसी तरह एक समय जब सरदार वल्लभ भाई पटेल नें संघ को कांग्रेस में विलय की बात रखी तब भी पंडित जवाहरलाल नेहरू नें ही इसका विरोध किया था। स्वतंत्र भारत में भी कांग्रेस पर पूर्ण कब्जा नेहरू परिवारों नें ही रखा, इसके लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी नें कांग्रेस के अधिकृत राष्ट्रपति प्रत्याशी को, समानांतर प्रत्याशी से हरवाया था, वहीं एक समय उन्होंने कांग्रेस आई बनाई कर कोंग्रेसीयों को हराया था। यह भाव आज भी नेहरू परिवार में है  इसलिए कांग्रेस में कोई बहुत कुछ पा जायेगा यह सोचना भी मूर्खता है। नेहरू परिवार के बर्चस्व के लिए, सीताराम केसरी को टांगा टोली कर कार्यालय के बाहर फेंक दिया गया था। वरिष्ठ कोंग्रेसियों के ग्रुप जी 23...