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गठबंधन में फंसे स्वाभिमानी दल, जल्द अलग हो जायेंगे - अरविन्द सिसोदिया I.N.D.I.A.

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गठबंधन में फंसे स्वाभिमानी दल, जल्द अलग हो जायेंगे - अरविन्द सिसोदिया  I.N.D.I.A. I.N.D.I.A. वास्तविक रूप में यह कांग्रेस गठबंधन है, यह इससे पूर्व में यू पी ए था, उससे पहले कांग्रेस ही था। मूलरूप से नेहरू परिवार जन कांग्रेस इसे कहना अधिक उचित होगा। महात्मा गाँधी नें जब कांग्रेस को भंग करने की सलाह दी तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू नें इसे अस्वीकार कर दिया। इसी तरह एक समय जब सरदार वल्लभ भाई पटेल नें संघ को कांग्रेस में विलय की बात रखी तब भी पंडित जवाहरलाल नेहरू नें ही इसका विरोध किया था। स्वतंत्र भारत में भी कांग्रेस पर पूर्ण कब्जा नेहरू परिवारों नें ही रखा, इसके लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी नें कांग्रेस के अधिकृत राष्ट्रपति प्रत्याशी को, समानांतर प्रत्याशी से हरवाया था, वहीं एक समय उन्होंने कांग्रेस आई बनाई कर कोंग्रेसीयों को हराया था। यह भाव आज भी नेहरू परिवार में है  इसलिए कांग्रेस में कोई बहुत कुछ पा जायेगा यह सोचना भी मूर्खता है। नेहरू परिवार के बर्चस्व के लिए, सीताराम केसरी को टांगा टोली कर कार्यालय के बाहर फेंक दिया गया था। वरिष्ठ कोंग्रेसियों के ग्रुप जी 23...

वन नेशन वन इलेक्शन देशहित में लागू होना चाहिए - अरविन्द सिसोदिया One Nation One Election

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वन नेशन - वन इलेक्शन, को लेकर के इतनी हाय तौबा की जरूरत अभी नहीं है, क्योंकि गठित कमेटी की रिपोर्ट का आना मात्रा काफी नहीं होगा, इसको संसद और विधान मंडलों के द्वारा पारित कराया जाना भी एक बहुत बड़ी चुनौती होगी। यह सब बहुत आसान नहीं है, बल्कि एक बहुत ही कठिन चुनौती पूर्ण कार्य है। किंतु यह सच है कि चुनाव अगर एक बार में करवाए जाएं तो न केवल देश का बहुत भारी धन की बचत होगी बल्कि साथ ही  देश हित के कार्यों का करने का मन भी बनता है।  मन इसलिए बनता है कि बार-बार चुनाव का आना और उनमें नेताओं का जुट जाना देशहित  के कार्यों को बाधित करता है। काम करने के क्रम को बाधित करता है। राष्ट्रहित के दृष्टिकोण से तो वन नेशन वन इलेक्शन बहुत ही अच्छी चीज है,  बहुत आसान भी है। हमारे देश नें वर्षो तक एक साथ चुनाव करवाये भी हैं और सफल सरकारें चलाईं हैं। ऐसा भी नहीं है की यह दुर्लभ है,देश मन बनाले तो बहुत आसान भी है। इसमें सभी प्रकार के इलेक्शन एक-  एक  करके करवा लिए जाए। प्रति 5 वर्ष के अंतराल से एक इलेक्शन मंथ ( माह ) आना चाहिए, जिसमें सबसे पहले निकायों के चुनाव हो जाए...

अनाप सनाप नहरी पानी की तरह पैसा खर्च करने वालों का राजनैतिक गठबंधन i.n.d.i.a.

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सोच से परे खर्च करने वाले अमीरों का राजनैतिक गठबंधन सामान्य व्यक्ति की सोच से परे, अनाप सनाप नहरी पानी की तरह पैसा खर्च करने वालों का राजनैतिक गठबंधन , इतना पैसा कहां से आ रहा है जो उडाया जा रहा है, फिर कहेंगे कि ईडी गलत है साबीआई गलत है, केन्द्र सरकार गलत है, मोदी जी गलत हैं। Beyond the thinking of a common man, a political alliance (i.n.d.i.a.) of people who spend money like canal water indiscriminately, where is so much money coming from that is being wasted, then they will say that ED is wrong, CBI is wrong, Central Government is wrong, Modi. Yes you are wrong. 1- जिस तरह व्यक्तिगत कार से या किराये पर कार लेकर जाते हैं शान दिखानें जाते हैं, उसी तरह ये नेता लाखों लाखों रूपये किराये के महंगे चार्टर विमान किराये से लेकर मीटिंगों में पहुंचते हैं। जैसे विमान में एक निजी जेट किराए पर लेना प्रति घंटे 1. 5 लाख रुपये से लेकर 3.5 लाख रुपये तक हो सकता है। मोटे तौर पर, एक वाणिज्यिक विमान पर बिजनेस क्लास में दिल्ली से मुंबई की वापसी उड़ान की लागत आम तौर पर 1 लाख रुपये होती है। जबकि निजी जेट पर, ...