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अमर शहीद भगत सिंह तारीखों में ......

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- अरविन्द सिसोदिया          भगत सिंह का जन्म 2८ सितंबर, 1907 को लायलपुर ज़िले के बंगा में चक नंबर 105 (अब पाकिस्तान में) नामक जगह पर हुआ था। हालांकि उनका पैतृक निवास आज भी भारतीय पंजाब के नवांशहर ज़िले के खट्करकलाँ गाँव में स्थित है। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था।, एक देशभक्त सिख परिवार में हुआ था, जिसका अनुकूल प्रभाव उन पर पड़ा था।      भगतसिंह के पिता 'सरदार किशन सिंह' एवं उनके दो चाचा 'अजीतसिंह' तथा 'स्वर्णसिंह' अंग्रेज़ों के ख़िलाफ संघर्षरत होने के कारण जेल में बन्द थे । जिस दिन भगतसिंह पैदा हुए उनके पिता एवं चाचा को जेल से रिहा किया गया था , इस शुभ घड़ी के अवसर पर भगतसिंह के घर में खुशी और भी बढ़ गयी थी । भगतसिंह की दादी ने बच्चे का नाम 'भागां वाला' (अच्छे भाग्य वाला) रखा । बाद में उन्हें 'भगतसिंह' कहा जाने लगा । वे 14 वर्ष की आयु से ही पंजाब की क्रान्तिकारी संस्थाओं में कार्य करने लगे थे। डी.ए.वी. स्कूल से उन्होंने नवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1923 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें विव...

अधिवक्ताओं के तर्क भी सुनना ही चाहिए - अरविन्द सिसोदिया vkilon ki hadtal

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मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के एक प्रसाशनिक आदेश के खिलाफ राज्य के अधिवक्तागण 23 मार्च 2023 से कार्यबहिस्कार की हड़ताल पर हैं। क्योंकि अधिवक्ता मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा जारी किए गए उस आदेश का विरोध कर रहे हैं, जिसमें न्यायाधीशों को कम से कम 25 लंबित मामलों तीन महीनेँ में (ऐसे मामले जो वर्षों से लंबित थे) निपटाने के लिए आदेशित किया गया है। ) । भारत में न्यायपालिका मुकदमों पर निर्णय देनें में जितना समय लगाती है उससे वह अन्यायपालिका बन जाती है। वहीं सुनबाई के मनमाने तरीके भी अपनाती है। निर्णयों में भी विविधता रहती है। सामान्य प्रकरण दसकों धूल खाते रहते हैं। जबकि आतंकवादी के लिये आधीरात को अदालत खुल जाती है। कुछ खास अधिवक्ता बिना वरीयता के ही अपना मामला सूची बद्ध करवा लेते हैं तो कुछ अधिवक्ता अपनी खास पसंद की बेंच का इंतजार करते हैं। यह समसामायिक आवश्यकता है कि न्याय दान में लगने वाला ज्यादा समय कम किया जाना चाहिए, मगर वह सभी के लिये सामान प्रक्रिया से हो, यह संबिधान कहता है। प्रक्रिया को इस तरह से संसोधित कर उन्नत किया जाना चाहिए जो सभी प्रकरणों पर समान ...

Divine New Year Hindu Samvat

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    Hindu Samvat Divine New Year, distortion free religious and social preferential festival - Arvind Sisodia 9414180151 The great collection of Indian philosophy, Indian research, Indian knowledge, Indian experience etc. is known as Hinduism. This is what many people call Sanatan Hindutva. So many common people call it Indian. But till thousand years back also everything was Hindutva and it is Hindutva only. If many efforts are to be made honestly to reach the real God, then its medium is guided only and only by the research of Sanatan-Hinduism. All other things prove to be imaginary. There are millions of objects moving in innumerable galaxies in the entire universe. Those who are bound by the rules of the divine system, are traveling from the beginning to the infinite. One of them is our Milky Way, and only one of them is our sun (solar) family which has 9 Navagrahas. Our Earth is a member of this sun (solar) family. That means the direct God is Suryanarayan. Festival of th...

हिन्दू संवत ईश्वरीय नववर्ष, विकृतिमुक्त धर्मिक एवं सामाजिक उत्सव hindu nvvarsh snvtsar

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हिन्दू संवत ईश्वरीय नववर्ष, विकृति मुक्त धर्मिक एवं सामाजिक अधिमान्य उत्सव  - अरविन्द सिसोदिया 9414180151 भारतीय दर्शन, भारतीय अनुसंधान, भारतीय ज्ञान, भारतीय अनुभव आदि का महान संग्रह हिंदुत्व के नाम से जाना जाता है। इसी को कई लोग सनातन हिंदुत्व कहते हैं।  तो कई जन सामान्य इसे भारतीय कहते हैं। किन्तु हजार वर्ष पूर्व तक भी सब कुछ हिंदुत्व ही था और हिंदुत्व ही है। अगर असली ईश्वर तक पहुंचने की कई भी कोशिश ईमानदारी से करनी है तो उसका माध्यम सिर्फ और सिर्फ सनातन - हिंदुत्व का अनुसंधान ही मार्गदर्शन करता है। अन्य सभी बातें कपोल कलपित साबित होती हैं। संपूर्ण सृष्टि में असंख्य आकाशगंगाओं में करोड़ो करोड़ो पिंड गतिमान हैं। जो ईश्वरीय व्यवस्था के नियमों के बंधन में बंधे होकर, आदि से अनंत की यात्रारत हैं। उन्ही में एक हमारी आकाशगंगा है, उसमें ही एक हमारा सौर परिवार है जिसमें 9 नवग्रह हैं। इसी सौर परिवार का सदस्य हमारी पृथ्वी है। अर्थात प्रत्यक्ष देव सूर्यनारायण हैं। प्रथम सूर्योदय का पर्व..... हमारी पृथ्वी नें जब व्यवस्थित स्वरूप प्राप्त किया और उसका प्रथम सूर्योदय ज...

कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार का, संघ विरोधी राजनीतिक प्रतिशोध फिर विफल - अरविन्द सिसोदिया

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कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार का, संघ विरोधी राजनीतिक प्रतिशोध फिर विफल - अरविन्द सिसोदिया Congress's Ashok Gehlot government's anti-RSS political vendetta fails again - Arvind Sisodia कांग्रेस की संघ विरोधी राजनीतिक प्रतिशोध फिर विफल - अरविन्द सिसोदिया कांग्रेस राजमाता और राजकुमार संघ को पानी पी पी कर कई दशकों से कोसते रहे हैं। क्यों कि ( RSS ) संघ नें सुप्त हिन्दू समाज को जागृत किया और राष्ट्र उत्थान को प्रेरित किया। जिससे भारत को गर्त में धकेल रही कांग्रेस को जाग्रत जनमत नें सत्ता से बाहर कर दिया। संघ का देश के प्रति जागृत भाव, शुभचिंतक भाव, देश का बुरा करने वाली ताकतों का प्रबल अवरोध है. क्योंकि संघ के लिये राष्ट्र सर्वोपरि है, राष्ट्रहित सर्वोच्च है। यह संगठन प्रतिपल भारत माता के हित चिंतन और भारत माता को परम वैभव पर आसीन करने के लिए प्रयत्नशील रहता है। इसी कारण से वे ताकतें जो भारत का अहित करती हैं या अहित से समझौता करती हैं वे संघ के विरुद्ध रहती हैं, जिनमें कांग्रेस व साम्यवादी जैसे राजनैतिक दलों के साथ - साथ धर्मांतरण कराने वाले, साम्प्रदायिकता फैलाने वाले संगठन संघ के...

डूबते जहाज को बचानें, नये जिलों का प्रलोभन - अरविन्द सिसोदिया rajasthan new district

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डूबते जहाज को बचाने नये जिलों का प्रलोभन - अरविन्द सिसोदिया राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत साढ़े चार साल से कुर्सी युद्ध में व्यस्त हैं और उन्होंने कुर्सी छिनाने के सभी प्रयासों को विफल किया भी है। अल्बता उनसे कुर्सी छिनाने के सभी प्रयास उन्ही की पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलेट की और से ही हुये हैं, माना जाता है कि इन प्रयत्नों में हाई कमान सोनिया गाँधी एवं राहुल गाँधी की इच्छा को भी गहलोत नें दर किनारे किया है। गहलोत भाग्यशाली हैं कि वे अभी तक मुख्यमंत्री हैँ, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिँह पद से भी गये और पार्टी से भी गये। गहलोत विद्रोही होने के बाद से अब पूर्ण स्वतंत्र मुख्यमंत्री की तरह काम कर रहे हैं उन्हें यह बात बहुत अच्छी तरह मालूम है कि कांग्रेस और राहुल की छवि उनके काम नहीं आनें वाली। इसी कारण उन्होने लोकलुभावन बजट,100 यूनिट बिजली फ्री, जनआधार कार्ड धारी महिलाओं को मोबाईल फ्री देनें की घोषणा और अब 19 नये जिलों की घोषणा इसीलिए की है कि राजस्थान की जनता उन्हें पुनः चुने। शासन के दृष्टिकोण से तो गहलोत सरकार पूरी ...

Hindu is the knower of God and Time - Arvind Sisodia

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  ईश्वर और काल का ज्ञाता हिन्दू ही है - अरविन्द सिसौदिया Hindu is the knower of God and Time - Arvind Sisodia  ईश्वर और काल का ज्ञाता हिन्दू ही है - अरविन्द सिसौदिया By Arvind Sisodia  - अरविन्द सिसौदिया 9414180151   http://arvindsisodiakota.blogspot.com ईश्वर और काल का ज्ञाता हिन्दू ही है - अरविन्द सिसौदिया Hindu is the knower of God and Time - Arvind Sisodia   It is mentioned in Rigveda that once upon a time a golden urn rotating at high speed explodes and it causes swelling of the universe. This illusion is called Big Bang by the people of the western world. From which many galaxies are formed. There are crores of objects in each galaxy. Which we know by the names of Sun, Moon, Stars, Mandakaniyo Niharrikaye, and by attaining a systematic speed, they make up the creation of a very long period of time. ऋगवेद में आता है कि एक समय एक स्वर्ण कलश तेजगति से घूमत हुये विस्फोट होता है और उससे सृष्ट्रि का सुजन होता है। इसी को पाश्चात्य जगत के लोग बिगबैंग कहते हैं। जिस...

Bhartiya Kaalganna ki Prachinta भारतीय कालगणना की प्राचीनता

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Bhartiya Kaalganna ki Prachinta  भारतीय कालगणना की प्राचीनता - रवि प्रकाश आर्य लेखक राजकीय महाविद्यालय, सफीदों के प्राचार्य हैं। स्टीफन हाकिंग ने जो कुछ भी अपनी पुस्तक ‘समय का संक्षिप्त इतिहास’ में लिखा है, लगभग वे सभी बातें सूर्य सिद्धांत में भी वर्णित हैं। सूर्य सिद्धांत भारतीय विज्ञान की एक ऐसी पुस्तक है जिसका अंग्रेजी अनुवाद वर्गीज ने 1865 के आसपास किया था। उस समय से सूर्य सिद्धांत दुनिया की सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक है। देखने की बात यह है कि उन्नीसवीं सदी में पाश्चात्य विज्ञान ने एस्ट्रोफिजिक्स यानी कि खगोल विज्ञान में कितना विकास किया था? कम से कम आज जितना विकास हुआ है, उतना तो नहीं ही हुआ होगा। उन्होंने हमारे विज्ञान की बातों को लिया और अपने ढंग से प्रस्तुत किया। यहां तक कि आप विज्ञान की किसी भी शाखा को उठा लें, पाश्चात्यों ने भारतीय विज्ञान का काफी अध्ययन किया। उदाहरण के लिए जिस पाइथागोरस प्रमेय को हम पढ़ते हैं, जोकि वास्तव में बोधायन प्रमेय है, वे पाइथागोरस भी भारत आए थे। यहां उन्होंने अध्ययन किया था। यह केवल मैं नहीं कह रहा हूँ। ई. पोलॉक ने अपनी पुस्तक इंडिया...

भारतीय काल गणना का इतिहास bhartiy kaal ganna ka itihasa

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भारतीय काल गणना का इतिहास (आलेख April 5, 2022) - अरविन्द सिंह (लेखक ‘मंथन’ पत्रिका के प्रबंध-सम्पादक हैं।) भारतीय काल गणना का इतिहास चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि (2 अप्रैल 2022) से भारतीय नव वर्ष आरम्भ हो रहा है। भारतीय कालगणना के अनुसार चैत्र महीना अत्यंत विशेष होता है क्योंकि यह माह भारतीय नववर्ष का पहला महीना होता है। चैत्र माह से भारतीय नववर्ष आरंभ हो जाता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि भारतीय नववर्ष का पहला दिन माना जाता है। भारतीय काल गणना पद्धति पर आधारित कई सम्वत् (कैलेंडेर वर्ष) भारत में प्रचलित है जिसमें सृष्टि सम्वत, विक्रम सम्वत, शक सम्वत् और गुप्त सम्वत् विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। सृष्टि सम्वत् के मान्यता के अनुसार सृष्टि का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल 1, रविवार को हुआ। इस दिन के पहले ‘होरा’ का स्वामी सूर्य था, उसके बाद के दिन के प्रथम होरा का स्वामी चन्द्रमा था। इसलिये रविवार के बाद सोमवार आया। इस प्रकार सातों वारों के नाम सात ग्रहों पर रखा गया। बाद में पश्चिमी देशों ने हमारी पौराणिक संगणना को मान्य किया किन्तु वे उसमें चतुरता पूर्वक अपने पुट मिला...

हमारा हिन्दू नववर्ष 2080

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  🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🚩 🚩 *हर घर भगवा* 🚩 🚩 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 *हमारा हिन्दू नववर्ष - चैत्र शुक्ल प्रतिपदा* युगाब्द 5125, विक्रम संवत 2080 Hmara hindu navvarsh 2080         *विश्व के सबसे प्राचीनतम सनातन हिन्दू नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) का धार्मिक, ऐतिहासिक, सामाजिक और वैश्विक महत्व* 🚩इस दिन के सूर्योदय से *जगतपिता ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की l* पुराणों में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया वह चैत्र सुदी एकम का दिन था ।* 🚩वैष्णव दर्शन में *चैत्र मास भगवान नारायण का ही रूप है ।* चैत्र का आध्यात्मिक स्वरूप इतना उन्नत है कि इसने वैकुंठ में बसने वाले ईश्वर को भी धरती पर उतार दिया । 🚩यह शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् *शारदीय नवरात्र का पहला दिन* है l 🚩मर्यादा पुरुषोत्तम *प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन* 🚩 *धर्मराज युधिष्ठिर का राज्यभिषेक दिवस* भी इसी दिन है l 🚩 *स्वामी दयानंद सरस्वती जी* ने इसी दिन *आर्य समाज की स्थापना* की एवं कृणवंतो विश्वमार्यम का संदेश दिया.* 🚩सम्राट विक्रमादित्य ने इस...

बलिदानी सैनिकों के परिजनों हेतु व्यवस्थित व्यवहार तय हों - अरविन्द सिसोदिया

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   बलिदानी सैनिकों के परिजनों हेतु व्यवस्थित व्यवहार तय हों - अरविन्द सिसोदिया   शहीद सैनिक अपने जीवन का बलिदान देकर अपने कर्त्तव्य को निभाता है तो देश की व्यवस्था भी अपनी सर्वोच्चता से कर्त्तव्यवहन का परिचय दे । ब लिदानी सैनिको के परिजनों के मामले राष्ट्रीयस्तर पर रक्षा मंत्री स्वयं और प्रदेश में मुख्यमंत्री और जिले में जिला कलक्टर डील करें।  सेना से जुडे मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिये , किन्तु राजस्थान में वीरांगनाओं ने मुख्यमंत्री गहलोत से मिलने की काफी कोशिशें की मगर उन्होनें हठधर्मि से सामान्य मामले पर राजनीति का अवसर दिया ।    सेना से जुडे तमाम मामलों को सुलझानें के लिये एक त्वरितगति से निर्णय लेनें वाला सिस्टम होना ही चाहिये। ताकि शहीद सैनिकों तक के आश्रितों को इधर उधर भटकना न पडें। जैसे जिले में जिला कलक्टर, राज्य में मुख्यमंत्री और केन्द्र में रक्षा मंत्री तो न्यायपालिका में जिला न्यायाधशी तो उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में स्वयं मुख्य न्यायाधीश गण मामले को सुनें एवं समय सीमा में सुलझायें।  राजस्थान में भारतीय सेना के ...