डूबते जहाज को बचानें, नये जिलों का प्रलोभन - अरविन्द सिसोदिया rajasthan new district

डूबते जहाज को बचाने नये जिलों का प्रलोभन - अरविन्द सिसोदिया

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत साढ़े चार साल से कुर्सी युद्ध में व्यस्त हैं और उन्होंने कुर्सी छिनाने के सभी प्रयासों को विफल किया भी है।

अल्बता उनसे कुर्सी छिनाने के सभी प्रयास उन्ही की पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलेट की और से ही हुये हैं, माना जाता है कि इन प्रयत्नों में हाई कमान सोनिया गाँधी एवं राहुल गाँधी की इच्छा को भी गहलोत नें दर किनारे किया है।

गहलोत भाग्यशाली हैं कि वे अभी तक मुख्यमंत्री हैँ, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिँह पद से भी गये और पार्टी से भी गये।

गहलोत विद्रोही होने के बाद से अब पूर्ण स्वतंत्र मुख्यमंत्री की तरह काम कर रहे हैं उन्हें यह बात बहुत अच्छी तरह मालूम है कि कांग्रेस और राहुल की छवि उनके काम नहीं आनें वाली।

इसी कारण उन्होने लोकलुभावन बजट,100 यूनिट बिजली फ्री, जनआधार कार्ड धारी महिलाओं को मोबाईल फ्री देनें की घोषणा और अब 19 नये जिलों की घोषणा इसीलिए की है कि राजस्थान की जनता उन्हें पुनः चुने।

शासन के दृष्टिकोण से तो गहलोत सरकार पूरी तरह फैल है। इसलिए उसनें प्रलोभन के सभी दरवाज़े आम आदमी पार्टी की तरह खोल दिये हैं और आम आदमी की तरह ही विज्ञापनों की भरमार की हुई है। 

कुल मिला कर राजस्थान में सरकार पलटनेँ का रिबाज है, कांग्रेस मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी यह जानते हैं। पहले भी दो बार जनता के द्वारा गद्दी से उतारे जा चुके हैं। वे अपने डूबते हुये जहाज को बचानें में जुट गए हैं। हलांकि अभी तक का अनुभव यही है कि प्रलोभन के आधार पर सरकारें वापस नहीं आती मगर दिल्ली और पंजाब में प्रलोभन के आधार पर ही राज्य सरकारें बनीं हैं।

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