रंग पञ्चमी Rang Panchmi

रंग पञ्चमी
Rang Panchmi 
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                  चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की पञ्चमी को खेली जाने वाली रंगपञ्चमी देवी देवताओं को समर्पित है. होली के पाञ्च दिन पश्चात् श्री रंग पञ्चमी मनाई जाती है. यह सात्विक पूजा आराधना का दिन होता है. श्री रंग पञ्चमी को धनदायक माना जाता है.
                   ये पर्व महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में विशेषकर मनाया जाता है.
                  ऐसा कहा जाता है कि रंग पंचमी के दिन रंगों के प्रयोग से सृष्टि में सकारात्मक ऊर्जा का संवहन होता है. इसी सकारात्मक ऊर्जा में लोगों को देवताओं के स्पर्श की अनुभूति होती है. वहीं सामाजिक दृष्टि से इस त्योहार का महत्व है. यह त्योहार प्रेम-सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक है.
                  रंग पंचमी की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, कहा जाता है कि त्रेतायुग के प्रारम्भ में जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने धूलि वन्दन किया था. धूलि वन्दन से आशय ये है कि उस युग में श्री विष्णु ने अलग-अलग तेजोमय रंगों से अवतार कार्य का आरम्भ किया. 
                  अवतार निर्मित होने पर उसे तेजोमय, अर्थात विविध रंगों की सहायता से दर्शन रूप में वर्णित किया गया है. होली ब्रह्माण्ड का एक तेजोत्सव है. 
                  ब्रह्माण्ड में अनेक रंग आवश्यकता के अनुसार साकार होते हैं और सम्बन्धित घटक के कार्य के लिए पूरक व पोषक वातावरण की निर्मित करते हैं।

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