शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2011

गरीबी से तंग पिता ने अपने तीन बच्चों को कुल्हाड़ी से काट दिया



 इन बेवस बच्चों का हत्यारा....वह बाप नहीं ,३२ और २६ रुपये में गरीव को तौलने वाली केंद्र सरकार और अपने नागरिक की चिंता नहीं करने वाली राज्य सरकार है.... श्री राम के राज्य में एकबार एक अकाल मृत्यु हो गई..श्री राम का पूरा प्रसाशन  तंत्र कारण  और निवारण में जुट गया .., राज्य सरकार का यह दायित्व बनता है की वह जानें की कौन भूखा है कौन तंग हाल है... किसे घर में कौन सा दुःख है...! इन्ही व्यवस्थाओं के लिए देश की जनता नें उन्हें चुना है , टेक्स ,शुल्क और संसाधन सोंपें हैं ..,सरकार को अच्छी तरह समझाना चाहिए वह जनता  के  प्रति जबावदेह है...यह घटना सरकारों के स्तर पर चल रही जनता के प्रति संवेदनहीनता हे .....




उत्तर प्रदेश के रमाबाईनगर जिले में मंगलवार सुबह गरीबी से तंग पिता ने अपने तीन बच्चों को कुल्हाड़ी से काट दिया.
बाद में खुद ट्रक के सामने कूदकर जान दे दी.घायल बच्चों में से एक की मौत हो गई, जबकि दो बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है.
एक तरफ पूरा देश दीवाली की खुशियां मना रहा वहीं पर एक मजबूर बाप ने गरीबी की वजह से अपने तीन बच्चों का कुल्हाड़ी से मारकर काट डाला. आप सोच सकते हैं कि वह पिता कितना बेबस रहा होगा जब उससे इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा. और अत: में ट्रक के नीचे आकर उसने खुदकुशी कर ली.     
पुलिस अधीक्षक सुभाष दुबे ने बताया कि बारा गांव में श्रीप्रकाश की पत्नी की मौत तीन साल पहले हो गई थी. उसके चार बच्चे राधा (10), सुधा (7), नीतेश (4) तथा विवेक (3) हैं. श्रीप्रकाश मजदूरी करता था और उसकी आमदनी कम थी, जिस कारण घर में कलह रहती थी.
आज सुबह करीब सात बजे जब बड़ी बेटी राधा बाहर गयी थी तब श्रीप्रकाश ने गुस्से में आकर कुल्हाड़ी से अपनी बेटी सुधा, बेटे नीतेश और विवेक को काट दिया, जिससे तीनों बुरी तरह घायल हो गए. बाद में श्रीप्रकाश ने एक तेज रफ्तार ट्रक के आगे छलांग लगा दी, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गयी.
उन्होंने बताया कि बच्चों की चीख पुकार सुनकर आस पड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे और तीनों बच्चों को अस्पताल ले जाया गया. रास्ते में एक बच्चे नीतेश (4) की मौत हो गई. जबकि दो गंभीर रूप से घायल बच्चों को कानपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

मंगलवार, 25 अक्तूबर 2011

दीपावली : ऐ मेरे वतन के लोगों-------


ऐ मेरे वतन के लोगों-------
आज हम दीपावली मना रहे हैं....मगर यह न भूलें कि 1962 में चीन से युद्ध इसी समय चल रहा था और सीमा पर दिवाली नहीं खून की होली खेली जा रही थी। आज शुभ अवसर पर उन शहीदों को नमन...




पंडित प्रदीप की इस महान और अभूतपूर्व श्रृद्धांजली में आओ हमस ब शामिल हों ...इसे लता मंगेशकर की आवाज ने और हृदृयस्पशी बना दिया है....नमन...



ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आए
ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी

जब घायल हुआ हिमालय ख़तरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी साँस लड़े वो फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा सो गए अमर बलिदानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी

जब देश में थी दीवाली वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली
क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी

कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पर मरनेवाला हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पर्वत पर वो खून था हिंदुस्तानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी

थी खून से लथ-पथ काया फिर भी बंदूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गए होश गँवा के
जब अंत-समय आया तो कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफ़र करते हैं

थे धन्य जवान वो अपने
थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
जय हिंद जय हिंद की सेना
जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद

दीपावली : पारिवारिक पर्सनलटी डेवलपमेंट का वार्षिक आत्म निरिक्षण





- अरविन्द सिसोदिया 
अंधकार रूपी अमावश्या में जन्मे मानव ने परिश्रम से , पुरूषार्थ से जीवन को उजाले में बदला है।
अंधकार से प्रकाश की ओर के इस महान दीपोत्सव पर्व पर आपको एवं आपके परिवार को....
दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें एवं बहुत बहुत बधाई।
यह पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धी, यश र्कीती और स्वास्थयवर्द्धक हो....
उन्नती के पथ आपके जीवन को और सुखमय बनाये..................

* कल धनतेरस अर्थात धनवंतरी तेरस थी जो स्वास्थय का प्रतिनिधित्व करती है।
* आज हनुमान जयंति भी है और रूप चैहदस भी (14वीं )
हनुमान जयंति मित्र धन का प्रतिनिधित्व करती है।
रूप चैहदस (14वीं ) मूल रूप से साफ सफाई और सौंदर्य धन का प्रतिनिधित्व करती है।
* अमावश्या को महालक्ष्मी पूजन, अपने आय के संसाधनों का प्रतिनिधित्व करती है,इसे हम अर्थ पुरूषार्थ के रूप में भी देख सकते हैं।
* पडवां के दिन गोवर्धन पूजा होती है, जो प्रकृति व अन्य जीवों के प्रति मित्रता का धन है।
*इसी तरह भाई दौज रिश्ते - नातों रूपी समन्वय धन का प्रतिनिधित्व करती है।
धन का मतलब जो जो बातें, संसाधन या गुणवत्तायें, हमारे जीवन सुख को बढातें हैं अर्थात पोजीटिव करते हैं वे धन है।
अच्छा स्वास्थय, अच्छा मित्र , अच्छा रूप- स्वरूप, अच्छे आय के संसाधन, अच्ठा प्रकृतिक सहयोग और अच्छे रिश्त - नाते जीवन सुख में वृद्धि करते हैं। इसलिये ये सभी दीपावली पर त्यौहार के रूप में मनायें जाते हैं।


सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

मोहनजी भागवत : समाज में सभी को परस्परावलम्बी होना चाहिये




समाज में सभी को परस्परावलम्बी होना चाहिये - सम्मानीय भागवत जी

कोटा / कसार 24 अक्टूबर । राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय डाॅ.मोहन मधुकरराव भागवत ने कहा ” विकास की गति धर्म युक्त नियंत्रित होनी चाहिये । मर्यादाहीन विकास तरक्की तो बहुत करता है किन्तु साथ ही बहुत सी विसंगतियां उत्पन्न करता है। इसमें पर्यावरण रक्षा का भी ध्यान रखा ही जाना चाहिये।“ वे गोयल प्रोटीन्य लिमिटेड ,कसार, जिला कोटा उद्योग समूह की द्वितीय इकाई उदघाटन समारोह के अवसर पर सम्बोधित कर रहे थे।
सम्मानीय भागवत ने अपने सम्बोधन में कहा ” मनुष्य ही एक मात्र इस तरह का प्राणी है जिसकी क्षमतायें इतनी विस्तृत हैं कि वह पशुओं से भिन्न, दूसरों के बारे में भी सोच - समझ सकता है और परमार्थ करते हुए नर से नारायण पद को प्राप्त कर सकता है ।“ उन्होने कहा ” हिन्दू संस्कृति में परस्पर सहयोग और परोपकार को ही सर्वोच्च प्राथमिकता है वह संकुचित विचारों की अनुमति नहीं देती है बल्कि सभी प्रकार क्रियाकलापों में समन्वय और सद्भाव को स्थापित्य करती है। “ 
उन्होने कहा समाज सभी गतिविधियों को और सभी गतिविधियां समाज को प्रभावित करती हैं । अर्थ - काम सभी को आवश्यक हैं मगर मनुष्य में विचार की शक्ति है,वह जीवन को नियंत्रणाधीन रख सकता है, वह दुष्कर्म से राक्षस और सद्कर्म से नारायण बन सकता है। निमित्त मनुष्य को ही बनना पडता है। धर्म के बंधन में चलने पर सद्गति मिलती है,मोक्ष भी वही प्राप्त करता है। 
उन्होने कहा वसुधैव कुटुम्बकम, अर्थात सब एक - दूसरे के कुछ न कुछ लगते हैं। सबकी सोचें यही धर्म हैं । मुझे तो जीना ही है मगर में औरों को भी तारूंगा ,दूसरों की उन्नती करने में भी सहायक बनूंगा यही मनुष्यत्व है।

माननीय भागवतजी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय का उद्धरण देते हुये कहा ” समाज को स्वावलम्बी होना चाहिये ,परन्तु समाज में सभी को परस्परावलम्बी होना चाहिये। भागवत ने कहा यह गोयल समूह का उद्योग अवश्य है लेकिन यह केवल गोयल समूह के लिये नहीं हैं बल्कि सबका चिन्तन सबका भला करने के लिए प्रयत्नशील हो, यह इसकी विशेषता बननी चाहिये। “

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लघु उद्योग भारती के प्रांतीय अध्यक्ष गोविन्दराम मित्तल ने कहा सरकार के मिलावट रोकने सम्बंधी कानून की विसंगति के बारे में बताते हुय कहा भारतीय खाद्य निगम ( एफ सी आई ) या जनस्वास्थ अभियांत्रिकी विभाग ( पीएचईडी )के विरूद्ध मिलावट कानून काम नहीं करती मगर एक बहुत छोटा व्यापारी जिसको मिलावट की जानकारी नहीं है उसे आजीवन कारावास का प्रवधान हैं जो कि अनुचित है।
गोयल प्रोटीन्स लिमिटेड के ताराचंद गोयल ने उद्योग के प्रतिवेदन को पढ़ कर सुनाया और बताया कि 500 टन क्षमता की यह इकाई सोयाबीन केे प्रोटीन उत्पाद को बनायेगी और इससे स्थानीय जरूरतें पूरी करेगी।
  मंच पर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय डाॅ.मोहन मधुकरराव भागवत, लघु उद्योग भारती के प्रांतीय अध्यक्ष गोविन्दराम मित्तल, रामवतार गोयल,प्रकाशचंद्र गोयल मंचस्थ थे।
कार्यक्रम के संचालन में अतिथि परिचय राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रातीय यह कार्यवाह शिवनारायण गुप्ता ने करवाया और संचालन नरेन्द्र कुमार गोयल ने किया । 
धर्म क्षैत्र की ओर से महामण्डलेश्वर रामानंद सरस्वती,मंझले मुरारी बापू, प्रेमनाथ,नरेन्द्रनाथ अवधूत, हरिनाराधण जी महाराज,कमलदास जी महाराज आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
संघ क्षैत्र से राजस्थान क्षैत्रीय प्रचारक दुर्गादासजी ,भगवानजी, शिवकुमारजी,माणकजी पाथेयकण प्रमुख रूपसे उपस्थित थे । 
स्टेट बैंक आॅफ इण्डिया के अध्यक्ष सिद्र्धाथ सेनगुप्ता प्रमुख रूपसे उपस्थित थे।

राजनैतिक क्षैत्र से पूर्व केन्द्रीय मंत्री भुवनेश चतुर्वेदी,पूर्व मंत्री ललित किशोर चतुर्वेदी,पूर्व मंत्री रघुवीरसिंह कौशल, पूर्व मंत्री हरीकुमार औदिच्य, पूर्व मंत्री मदन दिलावर,पूर्वसंसदीय सचिव ओम बिरला,विधायक चंद्रकांता मेघवाल,विधायक अनिल जैन कांग्रेस प्रदेश महासचिव पंकज मेहता, भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम शर्मा एवं देहात जिला अध्यक्ष प्रहलाद पंवार आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।     

प्रेषक:-
अरविन्द सीसौदिया 9414180151
प्रचार विभाग,

रविवार, 23 अक्तूबर 2011

Bhairon Singh Shekhawat : 11th Vice-President of India



भैरोंसिंह शेखावत , जनसंघ से लेकर भाजपा तक के सफ़र में , विपक्ष  की राजनीती के प्रमुख धुरी थे...
उनकी जयंती पर उन्हें बहुत बहुत नमन और श्रद्धांजलि ...!!!

साभार इस लिक के,  अंग्रेजी में सामग्री प्रस्तुत है.....

http://en.wikipedia.org/wiki/Bhairon_Singh_Shekhawat
Bhairon Singh Shekhawat ( भैरों सिंह शेखावत
(23 October 1923 – 15 May 2010) was the 11th Vice-President of India. He served in that position from August 2002, when he was elected to a five-year term by the electoral college following the death of Krishan Kant. He served as the Chief Minister of Rajasthan three times, from 1977 to 1980, 1990 to 1992 and 1993 to 1998.
Personal Life...

His father was Shri Devi Singh Shekhawat and his mother was Shrimati Banne Kanwar. He was born in the village of Khachariawas in the district of Sikar in Rajasthan. He was married to Shrimati Suraj Kanwar and they had a daughter Shrimati Ratan Kanwar. She is married to the senior B.J.P leader Narpat Singh Rajvi and they have 3 children - a daughter, Mumal Rajvi, and 2 sons, Vikramaditya Singh Rajvi and Abhimanyu Singh Rajvi.
After the death of Bhairon Singh Shekhawat his 'pagh' was given to his elder grandson Vikramaditya Singh Rajvi(Indian adoption) by Mrs. Suraj Kanwar Shekhawat. While Abhimanyu is taken as Shekhawat's political heir and a young face of the BJP in Rajasthan.
Bhairon Singh Shekhawat completed high school but was unable to complete college due to his father's death. He had to support his family. He worked as a farmer and a sub-inspector of police. His website lists his favorite pastimes as reading, interacting with people and extensively touring the State and other parts of the nation.
Political Life

"Rajasthan ka ek hi Singh" (The only lion of Rajasthan) or "Babosa" (Head of the family of Rajasthan), Bhairon Singh Shekhawat, entered politics in 1952. He was undoubtedly the most popular politician in Rajasthan ever. He was also one of the tallest leaders of independent India. Until 1977, the Indian National Congress won elections in majority of the states in India. Shekhawat always posed a threat to the Congress Party in Rajasthan. In the 1967 elections, the Bharatiya Jan Sangh (Shekhawat's Party) and the Swatantra Party alliance reached near majority but couldn't form a government. But in the Janata wave in the year 1977, Shekhawat won with a thunderous landslide victory bagging 151 of 200 seats. After the split in the year 1980, Shekhawat decided to join the Bhartiya Janata Party with a host of his supporters. The Indian National Congress won the 1980 elections due to the split of opposition votes. During the Indira wave in 1984, again BJP lost the election heavily. The Congress managed to win 114 out of the 200 seats in Rajasthan. The opposition was divided, otherwise Shekhawat could have made history. But he did make history later on, in the 1989 elections when the BJP-Janata Dalalliance won all the 25 seats in the Lok Sabha from Rajasthan and won 140 seats in the assembly polls that followed. Shekhawat once again became Chief Minister of Rajasthan. In the next elections, after the split in the alliance, Shekhawat led the BJP to be the single largest party winning 96 seats. Three BJP-supported independents also won taking the tally to 99. Many independents supported the BJP and its final tally was 116. The Congress did its best to stop Shekhawat from forming the government. But due to the support of independents, Shekhawat was able to form the government. In the next elections, in the year 1998, the Shekhawat government lost due to the onion price rise issue. But the BJP bounced back in the Lok Sabha elections in 1999, just one year after the assembly polls. BJP won 16 of the 25 Lok Sabha seats from Rajasthan. Shekhawat was elected as the Vice President of India in 2002, when he defeated the opposition candidate, Sushil Kumar Shinde by a margin of 149 votes out of the 750 votes polled.
In July 2007, Shekhawat fought the Presidential election as an independent candidate backed by National Democratic Alliance as a popular Presidential candidate next to Dr. APJ Abdul Kalam; but lost to the United Progressive Alliance-Left backed candidate Pratibha Patil. Following his defeat, Shekhawat resigned from the post of Vice-President on 21 July 2007.
Administration
Bhairon Singh Shekhawat is by far one of the few politicians known for their administrative skills. Shekhawat started the "Antyoday Yojna" or the scheme for the rise of the poorest of the poor. World Bank's Chairman Robert McNamara hailed Shekhawat as the Rockefeller of India. Shekhawat was also known for his control over bureaucracy and the police. He is responsible for the rise of literacy in Rajasthan. He is also hailed as the father of Industrialization of Rajasthan. Shekhawat's thoughts and policies led to the introduction of Heritage, Wildlife and Village tourism in Rajasthan. He was also lauded by both, national and international leaders for his historic conduct of the Rajya Sabha (The Council of States).
Death

Bhairon Singh Shekhawat fell ill due to cancer and old age related problems, he went under regular treatment in different hospitals of India. He died on May 15, 2010 at the Sawai Man Singh Hospital in Jaipur. He was cremated the next day, at a plot of land provided by the government of Rajasthan, where his memorial will now be built. His funeral procession was attended by hundreds of thousands of people and was termed as "Historic Farewell" by the local news papers. His elder grandson Vikramaditya Singh Rajvi lit his funeral pyre along with his younger brother Abhimanyu Singh Rajvi.
His funeral was attented by all the big names of Indian politics like Hamid Ansari,APJ Abdul Kalam,Lal Krishna Advani,Sharad Pawar,Narendra Modi,Prakash Singh Badal,Shivraj Singh Chauhan,Raman Singh,Ramesh Pokhriyal,Sushma Swaraj,Arun Jaitley,Om Prakash Chautala,Nitin Gadkari,Rajnath Singh,Digvijay Singh,Ashok Gehlot,Vasundhara Raje all the ministers of Rajasthan and most of the MLA's of Rajasthan amongst many more from all the parts of the country.
In the prayer meeting held at Mr.Shekhawat's house in New DelhiPrime Minister Manmohan Singh, Delhi Chief Minister Shelia Dixit and MPShatrugan Sinha were some prominent leaders who attended.
Positions Held

  • 1952–72 Member, Rajasthan Legislative Assembly
  • 1974–77 Member, Rajya Sabha (Madhya Pradesh)
  • 1977–2002 Member, Rajasthan Legislative Assembly
  • 22 June 1977–16 February 1980 Chief Minister of Rajasthan
  • 1980–90 Leader of the Opposition, Rajasthan Legislative Assembly
  • 4 March 1990–15 December 1992 Chief Minister of Rajasthan (second term)
  • 4 December 1993–29 November 1998 Chief Minister of Rajasthan (third term)
  • December 1998–August 2002 Leader of the Opposition, Rajasthan Legislative Assembly
  • 19 August 2002–21 July 2007 Vice-President of India and ex officio Chairman of Rajya Sabha


Bhairon Singh Shekhawat
भैरों सिंह शेखावत
Vice President of India
In office
19 August 2002 – 21 July 2007
PresidentAbdul Kalam
Preceded byKrishan Kant
Succeeded byMohammad Hamid Ansari
Chief Minister of Rajasthan
In office
4 December 1993 – 29 November 1998
GovernorBali Ram Bhagat
Darbara Singh
Navrang Lal Tibrewal (Acting)
Preceded byPresident's rule
Succeeded byAshok Gehlot
In office
4 March 1990 – 15 December 1992
GovernorSukhdev Prasad
Milap Chand Jain (Acting)
Debi Prasad Chattopadhyaya
Swarup Singh (Acting)
Marri Chenna Reddy
Preceded byHari Dev Joshi
Succeeded byPresident's rule
In office
22 June 1977 – 16 February 1980
GovernorRaghukul Tilak
Preceded byHari Dev Joshi
Succeeded byJagannath Pahadia
Personal details
Born23 October 1923
KhachariawasBritish Raj (nowIndia)
Died15 May 2010 (aged 86)
JaipurIndia
Political partyBharatiya Janata Party (1980–present)
Other political
affiliations
Bharatiya Jana Sangh (Before 1977)
Janata Party (1977–1980)
Spouse(s)Shrimati Suraj Kanwar
ReligionHinduism


शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

चीन रूपी दुश्मन के बडते कदम रोकनें होंगें

चीन पर दो पोस्टर सामने आये हैं इन्हे हम भी प्रकाशित कर सकते हें और दूसरों को भी प्रेरित कर सकते हैं। चीन रूपी दुश्मन के बडते कदम हमें ही आगे बढ कर रोकनें होंगें। आओ आगे बडें......





गुरुवार, 20 अक्तूबर 2011

आध्यात्मिक कविता.........उठ जाग मुसाफिर ..




आध्यात्मिक कविता.........
उठ जाग  मुसाफिर ....
- मोहनलाल गालव ( ग्राम कोयला जिला बांरा, राजस्थान।)
उठ जाग मुसाफिर सोच जरा, तेरे मौत कि नौबत बाज रही।
कोई आज मरा कोई कल को मरा, कोई मरने को तैयार पडा।। 1 ।।
धन दौलत और ऐश्वर्य सब, कोई न होगा साक्षी तेरा।
जीवन साथी सब छूटेंगें, जिसका तुछकों है न,मलाल जरा।। 2 ।।
करनी धरनी सब तेरे हाथ में, व्यर्थ समय क्यों गवां रहा । 
पशु तुल्य जीवन व्यतीत कर, मानव जीवन क्यों पतित करा। 
दुखः रूपी क्रीडा स्थल में, तुम परोपकारी जीव बनों।
मन्थर गति से चलते चलते , तुम गूढ आध्यात्म प्राप्त करो।
सत्य अहिंसा मार्ग पकड तुम, कोटि - कोटी जन के परित्राण हरो।
सर्वस्व अर्पण कर ईश्वर को तुम, जीवन लक्ष्य प्राप्त करो।
जीवन मृत्यु एक रहस्य है,इसको तुम अंगीकार करो।
जीवन के दिवसों का भी तुम , शुद्ध सात्विक विचार करो।


बुधवार, 19 अक्तूबर 2011

आत्मा में खंजर की तरह उतरती है मंहगाई..




- अरविन्द  सिसोदिया , कोटा , राजस्थान - 09414180151 
आत्मा में खंजर की तरह घाव करती उतरती है मंहगाई...
आदमी को जीते जी मार देती है मंहगाई.....
मन मरता आशायें मरतीं,घर परिवार में होती मुरझााई..,
दर्द यह नहीं है कि बडती ही जा रही है मंहगाई...,
दर्द यह है कि..................................
सरकार खुद खडी हो कर, बडबा रही है मंहगााई...!!!


 भयानक मंहगाई....
दीपावली पर श्रीमति सोनिया गांधी,मनमोहनसिंह और मोंटेकसिंह को आम व्यक्ति की तरह बाजार में जाना चाहिये, एक किलो मावा की मिठाई और आध किलो नमकीन, कुछ फटाके और कुछ मोमबत्ती खरीदनी चाहिये ताकि इन्हे बाजार के भाव भी पता चल सकें...कि जनता कि किस तरह लुटाई हो रही है। यह मंहगााई का महा भ्रष्टाचार कांग्रेस सोनिया गांधी और मनमोहनसिंह को अब हर चुनाव में तीसरा नम्बर और जमानत जप्ति का आईना दिखायेगी।



पेट की भूखने साफ कर दिया कांग्रेस को .....
रोज रोज बडती मंहगाई...कभी डीजल..... कभी पैट्रोल.....कभी रसोई गैस..... और हाल ही में डीएपी खाद में बढाई भयंकर मंहगाई...निहत्थी जनता को एक ही अवसर वोट का....सौ सुनार की एक लुहार की....जनता अपना रंग दिखाया कांग्रेस को उनका ही दपर्ण बताया...कहीं जमानत जप्त तो कहीं तीसरे नम्बर पर....एक भी सीट नहीं मिली उसे उप चुनावों में.....चुल्लू भर पानी में डूब मरने लायक नहीं छोडा.......


कांग्रेस के ब्लेकवास का मुख्य कारण भयानक मंहगाई....
यह सच है कि सोमवार के उपचुनाव परिणामों में, कांग्रेेस का ब्लेकवास हो गया , दो जगह वह तीसरे स्थान पर रही, हिसार में जमानत जप्त करवा बैठी....इसका मुख्य कारण गरीबों की हाय है,,,सुबह उठते ही 30-35 रूपये किलो की दूध की खरीद से प्रारम्भ होने वाला यह सिलसिला रात को खाली जेब और खाली पेट पर जाकर खत्म होता है। यदि कांग्रेस सरकार ने मंहगाई कम करने के ठोस कदम नहीं उठाये तो..., अगले सभी चुनावों में उसे तीसरे चैथे नम्बर पर ही जाना होगा। जिस तरह जनता ने अभी उसका बोरिया बिस्तर बांध दिया उसी तरह...आगे और भी बुरा हाल होगा । यह कांग्रेस सरकार को संभलने का अवसर है। गरीबों का जीवन सुख लील चुकी मंहगाई को तुरंत कम करे....................

मंगलवार, 18 अक्तूबर 2011

सूचना के अधिकार कानून से सरकार घबरा गई है..




- अरविन्द सिसोदिया 
सूचना के अधिकार कानून से बहुत से राज बाहर आये और इस कारण कई कार्यकताओं को जान से भी हाथ धोना पडा, नेता , नौकरशाह और लुटेरों की मिली भगत को ,इस कानून ने काफी हद तक उजागर किया है। पोलें बाहर आनें से सरकार घबरा गई है, उसने चोर को मारने के बजाये....चोर को पकडने वाले कानून को ही मारने का फैसला कर लिया है। अब कांग्रेस सरकार सूचना के अधिकार कानून को बाधित करने की योजना में लग गई है, कांग्रेस सरकार के केंद्रीय कारपोरेट मामलों के मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने सोमवार को कहा कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम बनाने के समय में जो ” खामियां “ रह गई थीं, उन पर विचार करने की जरूरत है। “ आरटीआई का इस्तेमाल कुछ राजनीतिक दलों के एजेंडे के लिए नहीं किया जा सकता। कुछ लोगों का एजेंडा निर्माण न होकर विध्वंस है। ऐसे लोग देश को अस्थिर देखना चाहते हैं।” कॉमनवेल्थ गेम्स से लेकर आदर्श घोटाले तक के ज्यादातर पहलुओं का खुलासा इसी कानून के इस्तेमाल से हुआ। अत: सरकार का इससे परेशान होना लाजिमी है। यह विडंबना ही है कि जो आरटीआई यूपीए के ताज का एक चमकता हीरा रहा है, वही आज उसे चुभने लगा है।


सोमवार, 17 अक्तूबर 2011

स्विट्ज़रलैण्ड भौतिकी प्रयोगशाला में भगवान शिव


- सलिल ज्ञवाली  एवं विश्व मोहन तिवारी, Air Vice Marshal (Retd), Delhi                               


                   कुछ माह पहले ही 'ईश्वरकण' की खोज के प्रयोग से हलचल पैदा करने वाली 'नाभिकीय अनुसंधान यूरोपीय संगठन' (CERN) का नाम तो विज्ञान प्रेमियों को याद होगा। ११३ देशों के ६०८ अनुसंधान संस्थानों के ७९३१ वैज्ञानिक तथा इंजीनियर इस संस्थान में अनुसंधानरत हैं। यह फ़्रान्स और स्विट्ज़रलैण्ड दोनों देशों की‌ भूमि में १०० मीटर गहरे में स्थित है। यह अनेक अर्थों में विश्व की विशालतम भौतिकी‌ की प्रयोगशाला है।

            १९८४ में यहां के दो वैज्ञानिकों को बोसान कणों की खोज के लिये नोबेल से सम्मानित किया गया। १९९२ में ज़ार्ज शर्पैक को कणसंसूचक के आविष्कार के लिये नोबेल से सम्मानित किया गया।१९९५ में यहां 'प्रति हाइड्रोजन ' अणुओं का निर्माण किया गया। वैसे तो इसकी उपलब्धियों की सूची लम्बी है, किन्तु इस समय यह फ़िर गरम चर्चा में है क्योंकि इसके एक प्रयोग से ऐसा निष्कर्ष- सा निकलता दिखता है कि एक अवपरमाणुक कण ने प्रकाश के वेग को हरा दिया है। 

       यह तो आइन्स्टाइन को अर्थात एक दृष्टि से आधुनिक भौतिकी के एक आधार स्तंभ को ध्वस्त कर सकने वाली खोज है। अभी‌ इस क्रान्तिकारी खोज की जाँच पड़ताल चल रही है। सरलरूप से कहें तब इस प्रयोगशाला में मुल कणों को तेज से तेज दौड़ाया जाता है, अर्थात यह प्रयोगशाला 'कण त्वरक' है जो मूलकणों को प्रकाश वेग के निकटतम त्वरित वेग (particle accelerator) प्रदान करने की क्षमता रखती है, और फ़िर यह उनमें, यदि मैं विनोद में कहूं तब, मुर्गों के समान टक्कर कराती है (अतएव इसका नाम विशाल हेड्रान संघट्टक भी है ) और यह इस तरह नए कणों का निर्माण कर सकती है, और प्रयोगशाला में‌ ही यह ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति की‌ सूक्ष्मरूप में रचना कर सकती है। न केवल यह आकार और प्रकार में विशालतम है वरन कार्य में‌ सूक्ष्मतम कणों के व्यवहार की‌ खोज करती है, जिनके अध्ययन से इस विराट ब्रह्माण्ड की संरचना समझने के लिये भी मदद मिलती है।

     संभवत: आपको विश्वास न हो कि इस विशालतम  भौतिकी प्रयोगशाला केन्द्र में शिव जी कहना चाहिये कि नटराज की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है ! जिस तरह शिव जी का ताण्डव नृत्य सृष्टि के विनाश और पुन: निर्माण का द्योतक है उसी‌ तरह इस ब्रह्माण्ड में सूक्ष्मतम कण नृत्य करते हैं, एक दूसरे को नष्ट करते हैं, और नए कणों की रचना करते हैं। अर्थात  शिव जी का ताण्डव नृत्य ब्रह्माण्ड में हो रहे मूल कणों के 'नृत्य' का प्रतीक है।

             सन २००४ में‌ भारत ने यह मूर्ति इस विशाल हेड्रान संघट्टक को भेंट की थी। यह आश्चर्यजनक घटना अचानक ही‌ नहीं‌ हो गई है। इसके संस्थापकों में नोबेल सम्मानित, क्वाण्टम भौतिकी के सहसंस्थापक वैर्नर हाइज़ैनबर्ग भी थे; वे और क्वाण्टम भौतिकी के विकास करने वाले अनेक वैज्ञानिकों ने देखा कि  क्वाण्टम भौतिकी की प्रक्रियाएं जो प्रचलित विज्ञान के सिद्धान्तों से न केवल अबूझ रहती हैं वरन वे उनका विरोध- सा करती प्रतीत होती हैं,  वेदान्त का ज्ञान समझने के बाद  समझ में आती‌ हैं । तब इसमें क्या आश्चर्य कि क्वाण्टम भौतिकी के विकास करने वाले वैज्ञानिक वेदान्त को श्रद्धा से देखते हैं। 

             यह यदि धक्का देने वाली‌ घटना नहीं तो आश्चर्यजनक तो अवश्य है कि विज्ञान अर्थात तर्कसंगत तथा बुद्धिसंगत ज्ञान का आधुनिकतम अनुसंधान करने वाली संस्था  'नाभिकीय अनुसंधान यूरोपीय संगठन' (CERN) में हिन्दुओं का एक ईश्वर कैसे स्थापित हो गया। नास्तिक इस घटना के कारण उबल तो सकते हैं, क्योंकि वे तो धर्म के नाम से ही नाक भौं सिकोड़ने लगते हैं, धार्मिकों को अंधविश्वासी मानते हैं, और कहते हैं कि इन धर्मॊं ने तो विज्ञान की, इसलिये विचार स्वातंत्र्य वाले विश्व की प्रगति में अवरोध ही पैदा किये हैं। हो सकता है कि उनकी यह धारणा पाश्चात्य धर्मों के संबन्ध में सही हो, किन्तु क्वाण्टम भौतिकी के प्रवेश के साथ एक और नोबेल सम्मानित वैज्ञानिक श्रोयडिन्जर ने हिन्दू वेदान्त के ज्ञान का अध्ययन कर लाभ उठाय था।

           १९७५ में फ़्रिट्याफ़ काप्रा, एक प्रसिद्ध अमैरिकी भौतिकी वैज्ञानिक ने 'द डाओ आफ़ फ़िज़िक्स' नाम की एक अनोखी पुस्तक लिखी, यह उनकी पाँचवी 'अंतर्राष्ट्रीय सर्वाधिक प्रिय पुस्तक सिद्ध हुई, इसके २३ भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं। इस पुस्तक में‌ काप्रा ने शिव के ताण्डव और अवपरमाण्विक कणों के ऊर्जा नृत्य का संबन्ध दर्शाया है; "यह ऊर्जा नृत्य विनाश तथा रचना की स्पंदमान लयात्मक अनंत प्रक्रिया है। अतएव आधुनिक भौतिकी वैज्ञानिक के लिये हिन्दू पुराणों में वर्णित शिव का नृत्य समस्त ब्रह्माण्ड में अवपरमाण्विक कणॊं का नृत्य है, जो कि समस्त अस्तित्व तथा प्राकृतिक घटनाओं का आधार है।" वे आगे कहते हैं, "आधुनिक भौतिकी में‌ पदार्थ निष्क्रिय और जड़ नहीं‌ है वरन सतत नृत्य में रत है।" इस तरह आधुनिक भौतिकी तथा हिन्दू ज्ञान दोनों ही दृढ़ हैं कि ब्रह्माण्ड को गत्यात्मक ही समझना चाहिये, इसकी‌ निर्मिति स्थैतिक नहीं है।

           काप्रा लिखते हैं कि पूर्वीय रहस्यवादी ब्रह्माण्ड को अपृथक्करणीय जाल मानते हैं जिसमें सभी संबन्ध गत्यात्मक हैं स्थैतिक नहीं। इस पुस्तक का सर्वाधिक स्तंभित करने वाला कथन है कि  पूर्वीय रहस्यवादी अवधारणा सत्य है। वे कहते हैं कि आधुनिक भौतिकी मानती‌ है कि ब्रह्माण्ड का जाल जीवन्त या चेतन है।

           इस तरह हम देखते हैं कि आधुनिक वैज्ञानिक पुरातन औपनिषिदिक ऋषियों के समान ही सोच रहे हैं। अतएव विशालतम प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों द्वारा स्थापित शिव की मूर्ति कोई प्रहसन या नाटक नहीं है वरन एक श्रद्धामय कार्य है जो सभी वैज्ञानिकों को प्रेरणा देता है। यह हम भारतीयों के लिये प्रेरणाप्रद है तथा गर्व की बात है।

           विज्ञान अब सहमत है कि भारतीय उपमहाद्वीप के ऋषियों ने गहरे सत्य - उच्च आयामों तथा सूक्ष्मसत्यों - का दर्शन कर लिया था। इऩ्हीं सूक्ष्म सत्यों को नोबेल सम्मानित एर्विन श्रोयडिन्जर (Erwin Schrodinger) ने समझ लिया था। इनका 'श्रोयडिन्जर समीकरण' (Schrodinger Equation) बीसवीं शती की एक महानतम उपलब्धि माना जाता है। उनकी‌ उपनिषदों‌ पर गहरी श्रद्धा थी यह तो उनकी‌ पुस्तक 'ह्वाट इज़ लाइफ़' में भी देखा जा सकता है; और डी एन ए की‌ क्रान्तिकारी खोज करने वाले फ़्रान्सिस क्रिक ने भी अपनी अंतर्दृष्टि के लिये इस पुस्तक को श्रेय दिया है। श्रोयडिन्जर भारतीय शास्त्रों में उपलब्ध विवेक के रत्नकोश के विषय में इतने आश्वस्त थे कि उऩ्होंने उद्घोषणा की थी - “ सम्पूर्ण विश्व में ऐसा कोई भी दृष्टि नहीं है जिसके अनुसार चेतन में बहुत्व हो, (अर्थात केवल एकत्व ही है); यह बहुत्व तो हम व्यक्तियों की बहुलता के कारण रचते हैं, किन्तु यह भ्रमपूर्ण रचना है। इसका जो एकमात्र हल है, यदि वह कहीं है,  वह पुरातन उपनिषदों में मिलता है।"

           ऐसा एकत्व मानने वाले श्रोयडिन्जर अकेले नहीं थे, डेविड बोम, यूजेन विग्नर, ओपैनहाइमर, डेविड जोसैफ़सन, आर्किबाल्ड ह्वीलर, चार्ल्स टाउन्स, जैक सर्फ़ैत्ती, जान हैजैलिन, जन बैल्स आदि अनेक वैज्ञानिकों ने औपनिषिदिक ज्ञान के ब्रह्माण्डीय अद्वितीय़ चेतना के सागर में गोते लगाए थे, और संतुष्ट हुए थे। 'ब्लैक होल' (कृष्ण विवर) तथा 'वर्म होल' (दीमक विवर) के सर्जक जान आर्किबाल्ड ह्वीलर पूर्व के ज्ञान से इतने अभिभूत थे कि उऩ्होंने घोषणा की – ‘ऐसा लगता है कि पूर्व के ऋषियों को सब ज्ञात था, और हम यदि केवल उनके 'ज्ञान' का अपनी‌ भाषा में अनुवाद कर सकें, तब हमें अपने समस्त प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे।‘
 सर्वाधिक साहसिक कथन तो राबर्ट जुलियस ओपैनहाइमर का मिलता है, “हमें आधुनिक भौतिकी में जो ज्ञान प्राप्त होगा, वह हिन्दू ज्ञान का परिष्कृत रूप होगा, उसका दृष्टान्त होगा, तथा वह हमारा उत्साहवर्धन करेगा।"

           हो सकता है कि उपरोक्त तथ्य किसी संशयात्मा को  हतबुद्धि कर दे, किन्तु सत्य तो यह है कि विज्ञान कब से पूर्वी ज्ञान के समक्ष घुटने टेक चुका है।

     नास्तिको, सावधान! विज्ञान तो हिन्दूधर्म  के सर्व व्याप्त दिव्यत्व की तरफ़ लौट रहा है।

रविवार, 16 अक्तूबर 2011

मंत्री मदेरणा की मुक्ति में विलम्ब क्यों....?





- अरविन्द सिसोदिया 

आज तक के चैनल ” तेज “ पर सूचना आ रही है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने , जल संशाधन मंत्री महीपाल मदेरणा से भंवरी गुमसुदगी प्रकरण के चलते पद से इस्तीफा मांगा है...नैतिकता तो यह कहती है कि जिस दिन श्री मदेरणा का नाम आया था तभी उन्हे इस्तीफा देकर निष्पक्ष जांच की बात कहनी चाहिये थी। और राजधर्म यह कहता है कि जानकारी आते ही एक दो दिन की फोरी जांच के बाद स्वंय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मंत्रीमण्डल से उन्हे मुक्त कर देना चाहिये था। मुख्यमंत्री और मंत्री दोनों ही जांच प्रभावित करने के दोषी तो हैं ही ...,अब डेढ माह बाद....पूरे मामले के सबूत मिटवा कर.... गहलोत उन्हे मंत्री पद से हटातें हैं तो भी अर्थहीन है और वे अब हटते भी है तो अपना काम तो वे पूरी सफाई से कर ही चुके.....!!!! अब जेल में भी जाना पडे और वहां आराम करने का मौका मिले तो क्या हर्ज ....
---
भंवरी देवी के मामले में : मंत्री महिपाल मदेरणा को मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता ..
जयपुर। राजस्थान के जोधपुर जिले के बिलाड़ा कस्बे की नर्स भंवरी देवी के लापता होने के मामले में फंसे जन स्वास्थ्य अभियात्रिकी मंत्री महिपाल मदेरणा को किसी भी वक्त मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता है। सूत्रों ने आज यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लापता नर्स भंवरी देवी के मामले की जांच 14 सितम्बर को केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने के साथ ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री महिपाल मदेरणा को इस्तीफा देने की सलाह दी थी।
लेकिन मदेरणा ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया। उन्होंने बताया कि कैबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा कल रात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिले थे। मुख्यमंत्री ने फिर से मदेरणा को मामले की सीबीआई जांच को देखते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की सलाह दी। सूत्रों के अनुसार, लापता भंवरी देवी मामले में फंसे जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री महिपाल मदेरणा द्वारा करीब एक माह से अधिक समय बाद भी इस्तीफा नहीं दिये जाने को देखते हुए उन्हें राज्य मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने का फैसला किया गया है। इस मामले में मदेरणा का हाथ होने का आरोप है।
मालूम हो कि लापता नर्स भंवरी देवी के पति ने महिपाल मदेरणा पर यह आरोप लगाया था वे उन्‍हें काफी दिनों से ब्‍लैकमेल कर रहे थे। इसके अलाव वे भंवरी देवी को ग्रुप सेक्‍स करने के लिए भी मजबूर करते थे। भंवरी द्वारा सीडी की बात सामने आने के बाद मंत्री ने उनसे दूरी बना ली थी। भंवरी देवी के पति का कहना है कि मेरी पत्‍नी के पास मंत्री मदेरणा के साथ संबंधों की सीडी है।

आज तक के चैनल ” तेज “ पर सूचना आ रही है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने , जल संशाधन मंत्री महीपाल मदेरणा से भंवरी गुमसुदगी प्रकरण के चलते पद से इस्तीफा मांगा है...नैतिकता तो यह कहती है कि जिस दिन श्री मदेरणा का नाम आया था तभी उन्हे इस्तीफा देकर निष्पक्ष जांच की बात कहनी चाहिये थी। और राजधर्म यह कहता है कि जानकारी आते ही एक दो दिन की फोरी जांच के बाद स्वंय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मंत्रीमण्डल से उन्हे मुक्त कर देना चाहिये था। मुख्यमंत्री और मंत्री दोनों ही जांच प्रभावित करने के दोषी तो हैं ही ...,अब डेढ माह बाद....पूरे मामले के सबूत मिटवा कर.... गहलोत उन्हे मंत्री पद से हटातें हैं तो भी अर्थहीन है और वे अब हटते भी है तो अपना काम तो वे पूरी सफाई से कर ही चुके.....!!!! अब जेल में भी जाना पडे और वहां आराम करने का मौका मिले तो क्या हर्ज ....
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भंवरी देवी के मामले में : मंत्री महिपाल मदेरणा को मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता ..
जयपुर। राजस्थान के जोधपुर जिले के बिलाड़ा कस्बे की नर्स भंवरी देवी के लापता होने के मामले में फंसे जन स्वास्थ्य अभियात्रिकी मंत्री महिपाल मदेरणा को किसी भी वक्त मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता है। सूत्रों ने आज यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लापता नर्स भंवरी देवी के मामले की जांच 14 सितम्बर को केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने के साथ ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री महिपाल मदेरणा को इस्तीफा देने की सलाह दी थी।
लेकिन मदेरणा ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया। उन्होंने बताया कि कैबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा कल रात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिले थे। मुख्यमंत्री ने फिर से मदेरणा को मामले की सीबीआई जांच को देखते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की सलाह दी। सूत्रों के अनुसार, लापता भंवरी देवी मामले में फंसे जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री महिपाल मदेरणा द्वारा करीब एक माह से अधिक समय बाद भी इस्तीफा नहीं दिये जाने को देखते हुए उन्हें राज्य मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने का फैसला किया गया है। इस मामले में मदेरणा का हाथ होने का आरोप है।
मालूम हो कि लापता नर्स भंवरी देवी के पति ने महिपाल मदेरणा पर यह आरोप लगाया था वे उन्‍हें काफी दिनों से ब्‍लैकमेल कर रहे थे। इसके अलाव वे भंवरी देवी को ग्रुप सेक्‍स करने के लिए भी मजबूर करते थे। भंवरी द्वारा सीडी की बात सामने आने के बाद मंत्री ने उनसे दूरी बना ली थी। भंवरी देवी के पति का कहना है कि मेरी पत्‍नी के पास मंत्री मदेरणा के साथ संबंधों की सीडी है।

शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

देश सुरक्षा पर गंभीर गफलत..

 - अरविन्द सीसौदिया , 
इस देश को इस सरकार ने, हर सफे पर नाकामी और देश के साथ बुरा करने जैसा किया है। यह खबर 31 जुलाई 2011 के अखबार में छपी है। 45 हजार करोड की सुरक्षा सम्बंधि खरीदारीयां अटकी हैं। मेरी नजर में यह खबर आज आई सो आपसे आज ही शेयर कर रहा हूं। एक तरफ चीन हमारी सीमाओं पर आखडा हुआ है और हम लगभग निहत्थे जैसे, कांग्रेस सरकार को देश हित में तुरंत रक्षा आवश्यकताओं की जरूरतों की खरीददारी पूरी करनी चाहिये।  






कश्मीर हमारा था, है और रहेगा : अन्ना हजारे


कश्मीर हमारा था, है और रहेगा : अन्ना हजारे
- अरविन्द सिसोदिया 
अन्ना हजारे ने जन लोकपाल के मुद्दे पर लड़ाई लड़ रही अपनी टीम के सदस्य और प्रसिद्ध अधिवक्ता प्रशांत भूषण की आलोचना करते हुये कहा है कि कश्मीर पर प्रशांत भूषण के विचार सही नहीं हैं. उन्होंने कहा कि कश्मीर हमारे देश का अभिन्न अंग है. अन्ना ने यह भी कहा कि प्रशांत भूषण को टीम में रखने पर विचार किया जाएगा|
हजारे ने अपनी बात कह कर ये बात जाहिर कर दी कि उनके विचार उनके प्रशांत भूषण से बिल्कुल भी इफ्तेफाक नहीं रखते हैं। प्रशांत भूषण जो कुछ भी कश्मीर के लिए कह रहे हैं ये उनकी अपनी निजी राय है। लेकिन व्यक्तिगत रूप से मैं मानता हूं कि कश्मीर भारत का अंग था, है और हमेशा रहेगा। किसी के कहने से वो अलग नहीं हो जायेगा। मैंने भी कश्मीर को बचाने के लिए वहां का दौरा किया था।
१४ अक्तूबर , शुक्रवार को अन्ना हजारे ने मीडिया से बातचीत करते हुये कहा कि कश्मीर को लेकर प्रशांत भूषण ने जो विचार व्यक्त किये थे, ये प्रशांत भूषण के विचार थे और वे उससे सहमत नहीं है. अन्ना हजारे ने कहा कि प्रशांत भूषण के विचार ठीक नहीं हैं. बात यहीं नहीं रुकी. अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि प्रशांत भूषण को टीम में रखने पर भी विचार किया जाएगा. कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे कोई ताकत भारत से नहीं छीन सकता.
इससे पहले टीम अन्ना की एक और सदस्य किरण बेदी ने भी पल्ला झाड़ लिया था. किरण बेदी ने माइक्रो ब्लागिंग वेबसाइट ट्विटर पर इस संबंध में पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘‘यह भूषण जी के निजी विचार हैं. मैं जम्मू कश्मीर में सुशासन और जनता के उससे बेहतर जुड़ाव के हक में हूं.’’ 

गमों के बादल....kavita



- अरविन्द सिसोदिया 
गमों के बादलों ने,
फिर घटाओं का रूप धर कहा, 
हम आ गये, हमें बरसना है।
बेवसी के लवादे को, 
उसकी तरफ उछाल हमनें भी कहा,
जिन्दगी एक बार मिली है प्यारे...
और हमनें उसे जीना सीख लिया है !!
चल भागजा जहां से भी आया है। 
======

- अरविन्द सीसौदिया, कोटा,राजस्थान, 
मर्यादा के दिये में,
पावनता का तेल भरा,
निष्चल प्रेम की बाती से,
आशाओं का दीप जला,
विष्वास का प्रकाश हुआ,
हम जल का बुझ जायें तो क्या,
जग देखे भोर का उजियाला....!! 
======
-अरविन्द सीसौदिया
जो रात रात भर जाग कर,रात को दिन बना लेते हें। 
वे ही फिर उंनींदी आंखों से पूछतें हें कि क्या आप भी जागे थे ???
यदि कोई हमारा सो नहीं पा रहा ...,
तो नींद हमें भी कैसे आ पाती !!!
फेसबुक ने रातों को दिन बना दिया.. क्या करें?
वे भाग्यवान हैं जो काली रात को भी दिन में बदल देते हैं। 
उनके साहस को प्रणाम !!!!
======


गुरुवार, 13 अक्तूबर 2011

भैरोंसिंह शेखावत : सम्पूर्ण राजनैतिक व्यक्तित्व के धनी


- अरविन्द सिसोदिया , कोटा 
२३ अक्टूवर भा ज पा के वरिष्ठ  नेता एवं पूर्व उप राष्ट्रपति रहे माननीय भैंरो सिंह शेखावत की जयंती   है...इस अवसर पर उन्हें शत शत नमन........ 
**** यदि आपके पास कोई प्रकाशित करने योग्य संस्मरण है तो मेरे नीचे लिखे ई मेल पर भेजें चित्र सहित इस ब्लॉग पर प्रकाशित किया जाएगा.... 


भाजपा की वरिष्ठ त्रिमूर्ति , अटल जी , शेखावत जी और अडवानी जी ....
सम्मानीय भैरोंसिंह शेखावत सम्पूर्ण राजनैतिक व्यक्तित्व के धनी 
- रघुवीरसिंह कौशल

    सबसे पहले में एक संस्मरण से अपनी बात प्रारम्भ करता हूं,में बांरा विधानसभा क्षैत्र से विधानसभा का चुनाव बांरा को जिला बनाने की घोषणा के साथ लडा और जीता, हमारी सरकार बनीं,मेंने विधानसभा में प्रश्न पूछा कि सरकार के पास कितने नये जिले बनाने का विचार विचाराधीन हैं ? विधानसभा में उत्तर प्राप्त हुआ कि सरकार के पास नये जिले बनाने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस उत्तर से में उत्तेजित हो गया और सदन में मैंने सरकार की कडी आलोचना की...! पार्टी के ही कुछ कार्यकता तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरोसिंहजी शेखावत के पास पहुचे और उनसे कहा रघुवीरसिंह कौशल के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्यवाही की जाये,उन्होने पार्टी अनुशासन सदन में भंग किया है। शेखावत सहाब ने जबाव दिया कि मेरे विचार से एक विधायक के नाते कौशलजी ने कोई अनुशासनहीनता नहीं की, उन्होने बांरा को जिला बनाने के नाम पर चुनाव लडा और जीते है। सरकार उनकी पार्टी की है,सरकार जिला बनाने के लिये प्रतिबद्ध भी है, मगर जब सदन का जबाव अखवारों में जायेगा कि राजस्थान सरकार कोई नया जिला नहीं बना रही तो बांरा की जनता अपने विधायक के कपडे फाड देगी, इस जबाव के विरूद्ध कौशल का उत्तेजित होना सही था, में उनके विरूद्ध किसी भी तरह की अनुशासन हीनता की कार्यवाही का समर्थन नहीं करता हूं बल्कि बांरा को नया जिला बनाने की कार्यवाही प्रारम्भ करूंगा। और बाद में बांरा जिला भी बना। इस घटना से यह साबित होता है कि शेखावत सहाब में जन अपेक्षा और जन व्यवहार की कितनी सटीक समझ थी। 
म्ुाझे चार टर्म शेखावत सहाब के साथ काम करने का अनुभव प्राप्त है जब वे उप राष्ट्रपति थे तब में लोकसभा सदस्य था, उनका निरंतर सानिध्य मिलता ही रहा है। वे सहज उपलब्ध,सरल व्यक्तित्व,परिपक्व राजनेता थे। स्वंय कभी उत्तेजित नहीं होना और कोई भी उत्तेजित कार्यकर्ता या व्यक्ति आये तो उसे भी शांत करके भेजना यह उनकी आदत का हिस्सा था। जब तक किसी भी कार्यकता का असंतोष या गलत फहमी दूर न करलें तब तक उसका ध्यान रखना चिन्ता करना उनके ही व्यक्त्वि की विशेषतायें थीं ।
वे अपनी बात कभी भी थोपते नहीं थे, अपने मंत्रीमण्डल के मंत्रियों तक के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते थे,कोई बात कहनी या करवानी हो तो वे विनम्रता से उसे समझााते थे। उनका मत था कि राजनीति में जितने दुश्मन कम करो उतना ही अक्ष्छा होता है। जबकि आज यह चलन चल गया है कि जब तक दो चार नये दुश्मन तैयार नहीं करलें तब तक नींद नहीं आती ।
उनका यह भी विचार महत्वपूर्ण था कि जो कोई भी चुनाव में अपनी पार्टी को हरवानें में लगता है उसे स्वंय की बारी आने पर, वही सब भुगतना भी पडता हे। इसलिये अपनी पार्टी के विरूद्ध कभी भी कोई कार्य नहीं करना चाहिये। चाहे मन कितना ही साथ नहीं दे,मगर पार्टी विरोधी कृत्य पर कठोर मानसिक नियंत्रण होना ही चाहिये। पार्टी को उन्होने हमेशा मां का दर्जा दिया ।  
     टिकिट बंटवारों में सामूहिक निर्णय के ही वे पक्षधर थे, वे खुल कर चर्चायें करवाते थे, कई कई दिनों तक चर्चा करवाने के बाद पूरी सावधानी से निर्णय करवाना उनकी आदत में था। कई वार उनकी इच्छा के विरूद्ध भी निर्णय होते थे, वे निर्णय नहीं होनें तक अपनी बात प्रखरता से रखते थे मगर यदि सामूहिक निर्णय उनकी बात के विपरीत भी गया तो न केबल उसे वे मानते थे बल्कि उसे पूरा करना भी वे अपना कत्र्तव्य मानते थे।
विरोधी दलों में भी उनकी बहुत अच्छी साख थी,सम्मान देना उनकी सबसे बडी विशेषता थी। इसी कारण उनके मित्रों की संख्या अन्य दलोे में भी बहुत होती थी। सरकार में भी वे निर्णय सामूहिक सोच के आधार पर लेते थे,कुछ अवसर इस तरह के भी आते थे जब उनकी बात से भिन्न अन्य विचार प्रबल होत था, तब वे उस विषय को प्रतिक्षारत रख कर अनेकानेक बार उस पर चर्चा करते समझाते और समझते थे, तब निर्णय करते थे। कुल मिला कर वे राजनैतिक इच्छा को थोपते नहीं थे। 
जितनी आसानी से कार्यकता उनसे मिल सकता था,उतनी आसानी से तो मंत्रीयों से भी नहीं मिल सकते,सबसे मिलना सबकी सुनना यह उनकी आादत में था। ग्रामीण पृष्ठ भूमि से उठ कर , लगभग शून्य से शिखर पर पार्टी को ले जाने में उनका भी बडा योगदान रहा है। वे राजस्थान में तीन वार मुख्यमंत्री बनें,यह उनकी लोकप्रियता,सोच समझ और कौशल की ही उपलब्धि थी। में उन्हे शत शत नमन करता हूं।
रघुवीरसिंह कौशल ,
पूर्व लोकसभा सदस्य,
पूर्व प्रदेशाध्यक्ष भाजपा,
पूर्व विधायक एवं मंत्री 
राजस्थान सरकार|

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