सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

सोनिया से अपमानित होते थे पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव?

**सोच समझी चाल**
लोकसभा चुनाव के ठीक पूर्व यह छपवाया जाना कि राजीव गांधी की हत्या की जांच के प्रति  असंतुष्टता से तत्कालीन प्रधान मंत्री नरसिंह राव को सोनिया  गांधी ने डांटा था । यह बात गले उतरती नही है । क्यों की इस हत्याकांड में सब कुछ साफ़ तो था , मगर जो छुपा था वह सामने आता तो बहुत गड़बड़ होती। हत्याकांड की जांच में कुछ खोजना होता तो अभी भी दस साल से सरकार सोनिया गांधी के हाथा में ही है । यह सही है कि राव से सोनिया जी नाराज थीं , उन कारणों की पड़ताल बहुत दूर तक जायेगी । अभी तो यह विषय मात्र चुनावी दौर में वोटो का लाभ उठाने के लिए बहार निकला गया है । सोनिया जी ने उस समय करुणा निधि की पार्टी को भी दोषी मानता और फिर उसके साथ सरकार भी बनाई ? ये खबर बहार निकल बाना एक सोच समझी चाल  है !


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सोनिया से अपमानित होते थे पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव?
एजेंसियां | Feb 16, 2014
नई दिल्ली
क्या पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों अपमानित होते थे? पिछले दिनों पूर्व केंद्रीय मंत्री नटवर सिंह के एक अखबार में लिखे लेख में किए गए इस दावे के बाद अब एक केंद्रीय मंत्री की किताब में भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के बीच तनावपूर्ण रिश्तों का जिक्र किया गया है। किताब के मुताबिक सोनिया राजीव गांधी हत्याकांड मामले की जांच में धीमी प्रगति के कारण राव से नाखुश थीं। केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री केवी थॉमस की किताब सोनिया, 'द बिलवेड ऑफ द मासेज़' में कहा गया है कि अगस्त 1995 में जब सोनिया ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की तो एक तरह से यह दो साल बाद सक्रिय राजनीति में उनके प्रवेश की पृष्ठभूमि थी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों एक अखबार के लेख में पूर्व केंद्रीय मंत्री नटवर सिंह भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि सोनिया और राव के रिश्ते सामान्य नहीं थे। उन्होंने बताया था कि मई 1995 में एक रात राव ने उन्हें फोन कर बताया था कि उन्होंने (सोनिया ने) किस तरह उनका (राव का) अपमान किया था। इस लेख में नटवर सिंह ने अपनी डायरी की 13 मई 1995 की नोटिंग का जिक्र किया है जब नरसिंह राव रात में उन्हें अपने रेसकोर्स रोड स्थित आवास में बुलाया। सिंह ने लिखा है, 'रात करीब 9 बजे पी.वी. दाखिल हुए, लेकिन वह बैठे नहीं। आमतौर पर अविचलित रहने वाले पी.वी. परेशान और विचलित नजर आ रहे थे। उन्होंने कहा 'मुझे अभी-अभी उनका (सोनिया का) पत्र मिला।' मैंने कहा, 'मैंने उसे नहीं देखा है। प्रतीत हो रहा था मानो दोनों के बीच राजीव गांधी की हत्या के मामले की सुनवाई को लेकर पत्रों के माध्यम से युद्ध चल रहा हो।'

पूर्व विदेश मंत्री के मुताबिक, राव ने जो कुछ कहा वह इतना अप्रत्याशित था कि उनके मुंह से शब्द नहीं निकल रहे थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने कहा था, 'मैं उनसे नहीं निबट सकता। मैं उनसे निबट सकता हूं। मैं ऐसा नहीं करना चाहता। आखिर वह मुझसे क्या अपेक्षा करती हैं?' उन दिनों नटवर सिंह राव के मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री थे। बाद में उनके बीच मतभेद हो गए थे। सिंह ने राव को सोनिया गांधी से मिलने का सुझाव दिया था। तब राव ने कहा, 'मैं कितनी बार उनसे मिलूं? यह मेरे आत्मसम्मान का सवाल है। उनके व्यवहार मेरे स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। कितनी बार मेरा अपमान किया जाएगा?'
सिंह ने तब राव से कहा कि उन्होंने सोनिया से कभी राव के बारे में बात नहीं की लेकिन उन्हें (सोनिया को) ऐसा लगता है कि उनके पति की हत्या के मामले की जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। अखबार में सिंह ने लिखा कि राव ने उन्हें सरकार के सभी कदमों के बारे में बताया। उसमें पी. चिदंबरम को मामले की जांच का प्रभारी बनाने की भी बात शामिल थी।

थॉमस ने भी अपनी किताब में राव और सोनिया के तनावपूर्ण रिश्तों का विवरण दिया है। अपनी किताब में 20 अगस्त 1995 को राजीव गांधी के जन्मदिन पर सोनिया द्वारा दिए गए भाषण का संदर्भ देते हुए कहा है कि उनके (सोनिया के) शब्दों से पूरे देश को पीड़ा हुई थी। किताब में थॉमस ने लिखा है, 'सोनिया ने सरकार पर उंगुली उठाई थी। वह राव की करीबी नहीं थीं। राजीव की हत्या के मामले की जांच में देरी पर सोनिया ने सवाल किया कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के मामले की जांच में इतना अधिक समय लग रहा है, तो आम आदमी का क्या होगा, जो न्याय की खातिर लड़ता है।'

थॉमस ने अपनी किताब में कहा है कि इसे सरलीकृत रूप से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि यह न्याय दिलाने की प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार के विरोध में कोई बयान था। जब कांग्रेस सत्ता में थी, तो सोनिया की ओर से नरसिम्हा राव की यह कटु आलोचना वास्तव में उनकी निंदा थी। किताब के अनुसार, सोनिया को लगता था कि जब तक राव सत्ता में रहेंगे, राजीव की हत्या की जांच आगे नहीं बढ़ेगी।

उन्होंने कहा, 'उनका (सोनिया का) दृढ़ विश्वास था कि शायद किसी दूसरी एजेंसी ने राजीव की हत्या की साजिश रची और उसे लिट्टे के जरिए अंजाम दिया। यही वे हालात थे, जिसने सोनिया को राजनीति में लाया। जब पार्टी की इमारत ढह रही हो, तो वह खामोश कैसे रह सकती थीं।'
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सोनिया गांधी ने रात में घर पर बुलाकर
पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव का किया था अपमान

Posted by: Ankur Kumar
 Sunday, February 16, 2014,
http://hindi.oneindia.in/news/india/sonia-gandhi-pv-narasimha-rao-had-strained-relations-286684.html
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। केन्द्रीय मंत्री केवी थॉमस ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी और तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव के रिश्‍ते बेहद तनावपूर्ण थे क्‍योंकि राजीव गांधी की हत्‍या की जांच में हो रही देरी से सोनिया गांधी नाखुश थीं। केंद्रीय खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री केवी थॉमस की किताब ‘सोनिया- द बीलव्ड ऑफ द मासेज'में खुलासा हुआ है कि अगस्त, 1995 में जब सोनिया ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की, तो एक तरह से यह 2 साल बाद सक्रिय राजनीति में उनके प्रवेश की पृष्ठभूमि थी। गौरतलब है कि पिछले दिनों एक अखबार के लेख में पूर्व केंद्रीय मंत्री नटवर सिंह भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि सोनिया और राव के रिश्ते सामान्य नहीं थे। उन्होंने बताया था कि मई 1995 में एक रात राव ने उन्हें फोन कर बताया था कि उन्होंने (सोनिया ने) किस तरह उनका (राव का) अपमान किया था। इस लेख में नटवर सिंह ने अपनी डायरी की 13 मई 1995 की नोटिंग का जिक्र किया है जब नरसिंह राव रात में उन्हें अपने रेसकोर्स रोड स्थित आवास में बुलाया। सिंह ने लिखा है, 'रात करीब 9 बजे पीवी दाखिल हुए, लेकिन वह बैठे नहीं। आमतौर पर अविचलित रहने वाले पीवी परेशान और विचलित नजर आ रहे थे। उन्होंने कहा 'मुझे अभी-अभी उनका (सोनिया का) पत्र मिला।' मैंने कहा, 'मैंने उसे नहीं देखा है। प्रतीत हो रहा था मानो दोनों के बीच राजीव गांधी की हत्या के मामले की सुनवाई को लेकर पत्रों के माध्यम से युद्ध चल रहा हो।' थॉमस ने अपनी किताब में 20 अगस्त, 1995 को राजीव गांधी के जन्मदिन पर सोनिया द्वारा दिए गए भाषण का संदर्भ देते हुए कहा है कि सोनिया के शब्दों से पूरे देश को पीड़ा हुई थी। किताब में थॉमस ने लिखा है, इसीलिए सोनिया ने सरकार पर अंगुली उठाई थी। वह राव की करीबी नहीं थीं। राजीव की हत्या के मामले की जांच में हो रहे अत्यधिक विलंब से व्यथित सोनिया ने सवाल किया कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के मामले की जांच में इतना अधिक समय लग रहा है, तो आम आदमी का क्या होगा, जो न्याय की खातिर लड़ता है। थॉमस की किताब के अनुसार, इसे सरलीकृत रूप से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि यह न्याय दिलाने की प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार के विरोध में कोई बयान था। जब कांग्रेस सत्ता में थी, तो सोनिया की ओर से नरसिंह राव की यह कटु आलोचना वास्तव में उनकी निंदा थी। किताब के अनुसार, सोनिया को लगता था कि जब तक राव सत्ता में रहेंगे, राजीव की हत्या की जांच आगे नहीं बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सोनिया का दृढ़ विश्वास था कि शायद किसी दूसरी एजेंसी ने राजीव की हत्या की साजिश रची और उसे लिट्टे के जरिये अंजाम दिया। यही वे हालात थे, जिसने सोनिया को राजनीति में लाया। जब पार्टी की इमारत ढह रही हो, तो वह खामोश कैसे रह सकती थीं।

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