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अप्रैल 1, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कविता : निः शब्द के शब्द

-  अरविन्द सिसोदिया  कविता : निः शब्द के शब्द बहुत शांत , इतना शांत .., कि........, मौत का सन्नाटा भी शौर लगे ! दूर किसी पार्क के कौनें में , गाँव से दूर नदी के किनारे , घनघोर वन में.., सडक किनारे की पुलिया पर, या.., घर के अँधेरे कोनें में ..! आँखे डबडबा जाती हैं , मन बार बार कांपता है , पशतावे में .. होंठ सहज बुद बुदा उठते हैं ..! यही है समाज ..? मानव समाज..? माता - पिता भाई-बहन मित्र-बंधु रिश्ते - नाते धर्म - नीति - सिद्धांत गाँव - चौवारे गली- मौहल्ले दल - संगठन विधान - संविधान हर ओर घोर विश्वास घात..! घनघोर छल - कपट वह भी हलाल की तरह..!! और उसका नाम समाज है ..??? ----१---- कांपते होंठ .., डबडवाई आँखें , पीछे भागता मन मष्तिस्क , प्रश्नों की बौछार में अनुतरित .. निः शब्द ............................, मगर घोर शांती के आवास में उमड़ता तूफान .. न्याय - नैतिकता , मानवता - मर्यादा, दया - करूणा, मातृत्व - भ्रातत्व लाड - दुलार - प्यार कब - क्यों - कहाँ हैं ..? किधर और किसके पास ....? नहीं नहीं ये तो है ही नहीं ...! क्रूर स्वार्थ के हाथों.., ये तो कब

भारतीय नववर्ष ,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

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      भारतीय काल गणना के स्वरूप पर 3 लेख मुझे अच्छे लगे सो यहाँ पर दे रहा हूँ ....पढ़ कर हमारे संवत्सर के  महत्व और गहराई को आप  समझेंगे , यही अपेक्षा है ..सादर..!   - अरविन्द सिसोदिया , कोटा , राजस्थान | - आसुतोष मिश्रा  भारतीय संस्कृति के अनुसार वर्ष का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है।  जिसमें एक वर्ष की अवधि को संवत, संवत्सर, परिवत्सर, इदावत्सर आदि नामों से अभिहित किया जाता है। ग्रन्थों में विभिन्न समय में चले संवत का उल्लेख वर्णित है, जिसमें युधिष्ठिर संवत, कलि संवत जिसमें कलि का प्रादुर्भाव हुआ। इसके बाद विक्रमी संवत का प्रारम्भ हुआ जो सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ। इस दिन नवरात्र का प्रारम्भ, सृष्टि आरम्भ दिन, मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम का राज्याभिषेक, शकारि विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत का शुभारम्भ व आर्य समाज की स्थापना व झूले लाल का जन्म दिन हुआ। हिन्दी मास में चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्रि्वन, कार्तिक, मार्गशीष, पौष, माघ, फाल्गुन बारह महीनें है। फाल्गुन माह में होली के पश्चात चैत्र शुक्ल एकम् से नव वर्ष म