भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा,संवैधानिक संस्थाओं की अनिवार्य जबाबदेही है — अरविन्द सिसोदिया वर्तमान कांग्रेस और उसके ही प्रतिस्पर्धी कुछ दलों में, इस समय असंवैधानिकता, झूठ और भ्रम पर आधारित नौटंकी खड़ी करने की प्रतिस्पर्धा चल रही है, इन दलों को जनता नें सिरे से नकार दिया है और ये बिना वोट से जीते ही, शासक बनना चाहते हैँ। इनकी इस बेतुकी जिद और बदतमीजी से, पूरे देश में ही नहीं, विश्व में भी भारतीय विपक्ष मज़ाक बनकर रह गया है। सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश तक से मिलने की, मर्यादाहीन कोशिश के बाद, देश को समझ आरहा है कि देश किस स्तरहीनता के चक्रब्यूह में फंस गया है। संवैधानिक संस्थाओं को सावचेत रहना होगा नेता प्रतिपक्ष की फ्रंट पेज पर छपने की इस बीमारी में देश के दिन-प्रतिदिन के ज़रूरी कार्यों सहित विकास और व्यवस्था बाधित हो रही है, संवेधानिक तंत्रो को जनता की सेवा की जगह, बेबुनियाद नौटंकियों में उलझाया जा रहा है। सबसे गलत यह है कि इसे जबरिया दल और जनता पर थोपा जा रहा है। वहीं देश की गरिमा और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान का निहित स्वार्थों हेतु मानमर्दन ...
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