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संपत्ति का ब्योरा : लोकपाल विधेयक पर गठित समिति

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- अरविन्द सिसोदिया   मैं अन्ना का समर्थक हूँ मगर .. अन्ना ने अपने पहले ही निर्णय मैं जिस तरह से अपरिपक्वता का परिचय  दिया और बाप - बेटे साथ रख लिए उससे प्रश्न चिन्ह उठा है कि अन्ना कि राजनैतिक समझ भी गांधी जी कि तरह अपरिपक्व है..? किसी भी बुरे  कार्य के विरुद्ध खड़ा होनें में आसानी यह है कि वह कार्य बुरा है ...!! मगर किसी भी अच्छी बात या व्यवस्था का निर्माण एक योग्यता परक कार्य या चुनौती  है और उसे सम्पादित करना .., योग्यता के स्तर को बताता है ..!! जिस सुप्रीम कोर्ट के वकील शांति भूषण को खड़ा किया गया है .., उनकी योग्यता महज इतनीं थी कि उन्होंने प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी  के विरुद्ध राजनारायण जी की तरफ से चुनाव याचिका दायर की थी .., यह तो उस जज का साहस  था जो इंदिरा गांधी जी  के चुनाव को रद्द कर दिया.., इसी कारण शांति भूषण, जनता सरकार में विधि एवं न्याय मंत्री बनें थे .., dainikbhaskar.com से .....१६.४.२०११  http://www.bhaskar.com/article/NAT-anna-and-freinds-declares-assests-2024193.html नई दिल्‍ली. लोकपाल विधेयक पर गठित समिति में शामिल अन्ना हजारे व चार अन्य सदस्यों ने समिति