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प्रधानमंत्री का अंतिम शोक संगीत - वेदप्रताप वैदिक

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प्रधानमंत्री का अंतिम शोक संगीत लेख - वेदप्रताप वैदिक दैनिक भास्कर , कोटा विरोधी उम्मीदवार के लिए प्रधानमंत्री ने जैसे कठोर शब्दों का प्रयोग किया क्या वह उन्हें शोभा देता है? प्रधानमंत्री ने पत्रकार परिषद क्या की, उसे शोक-संगीत सभा कहा जाए तो ज्यादा ठीक होगा। विदा की वेला में जो रुदन, क्रंदन, हताशा, निराशा, उदासी, वेदना आदि भाव होते हैं, वे सब मनमोहन सिंह ने प्रकट कर दिए। मैंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर अब तक के सारे प्रधानमंत्रियों की पत्रकार परिषदों में भाग लिया है, लेकिन मनमोहन सिंह की पत्रकार परिषद मुझे सबसे अनूठी लगी। ऐसा लगा कि जैसे हम किसी शोक-सभा में बैठे हैं और वहां किसी अनासक्त और निर्विकार संत के अंतरंग उद्गारों का श्रवण कर रहे हैं। यदि मनमोहन सचमुच नेता होते तो इस पत्रकार परिषद में कई फुलझडिय़ां चमकतीं, कई पटाखे फूटते और दंगल का दृश्य उपस्थित हो जाता, लेकिन मनमोहन तो ऐसे सधे हुए संत नौकरशाह हैं कि उन्होंने बर्फ में जमे हुए-से सब जवाब दे डाले। भारत के युवा पत्रकारों को भी सलाम कि उन्होंने अपना धर्म निभाया। प्रधानमंत्री की कुर्सी पर 10 साल से जमे व्यक्ति का उन