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रिटेल में एफ डी आई अभिशाप सिध्द होगी - देवेन्द्र शर्मा

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रिटेल में एफ डी आई  अभिशाप सिध्द होगी - देवेन्द्र शर्मा --------------------------------------- 22 जनवरी 2014 संपादकीय दैनिक भास्कर, कोटा । http://epaper.bhaskar.com/kota/16/22012014/0/1/ सवाल नीतियों में स्थिरता का खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति हो या नहीं, यह भारत में वर्षों से विवादास्पद मुद्दा है। 2012 में यूपीए सरकार ने विभिन्न घोर राजनीतिक मतभेदों के बीच इसके पक्ष में फैसला किया। तब निर्णय लिया गया कि केंद्र का फैसला नीतिगत है। व्यवहार में एफडीआई को इजाजत दी जाए या नहीं, यह राज्य तय करेंगे। सिर्फ 12 राज्यों ने अपने यहां एफडीआई को इजाजत दी। उनमें दिल्ली की कांग्रेस सरकार भी थी, लेकिन पिछले दिनों आम आदमी पार्टी की नई सरकार ने इस निर्णय को पलटने का फैसला किया। इससे आर्थिक मामलों में यह मौलिक प्रश्न खड़ा हुआ कि इस देश में कोई नीतिगत स्थिरता है या नहीं? इसी संदर्भ में यह खबर महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने एफडीआई की इजाजत पर सहमति वापस लेने के दिल्ली सरकार के फैसले को नामंजूर कर दिया है। केंद्र की दलील यह है कि अपने यहां एफडीआई की अनुमति दें या नह

केजरीवाल का सच

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जरूर पढे इस पत्रिका को ........ केजरीवाल का सच......... शिमिरित ली जो कि असल सूत्रधार है केजरीवाल को खड़ा करने मे....... यह शिमिरित ली कौन है, शोधार्थी या अमेरिकी एजेंट? दस्तावेज बताते हैं कि वह बतौर शोधार्थी ‘कबीर’ संस्था से जुड़े थी। इस संस्था के गॉड-फादर अरविंद केजरीवाल रहे हैं। शिमरित ली को लेकर अटकलें लग रही हैं, क्योंकि शिमरित ली कबीर संस्था में रहकर न केवल भारत में आंदोलन का तानाबाना बुन रही थी, बल्कि लंदन से लेकर काहिरा और चाड से लेकर फिलिस्तीन तक संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त थी। शिमिरित ली दुनिया के अलग-अलग देशों में विभिन्न विषयों पर काम करती रही है। भारत आकर उसने नया काम किया। कबीर संस्था से जुड़ी। प्रजातंत्र के बारे में उसने एक बड़ी रिपोर्ट महज तीन-चार महीनों में तैयार की। फिर वापस चली गई। आखिर दिल्ली आने का उसका मकसद क्या था? इसे एक दस्तावेजी कहानी और अरविंद केजरीवाल के संदर्भ में समझा जा सकता है। बहरहाल कहानी कुछ इस प्रकार है। जिस स्वराज के राग को केजरीवाल बार-बार छेड़ रहे हैं, वह आखिर क्या है? साथ ही सवाल यह भी उठता है कि अगर इस गीत के बोल ही केजरीवाल के हैं तो गीत