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पगड़ी की इज्जत, मुझे बढ़ाना है - नरेंद्र मोदी

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लुधियाना के जगराव में रैली के लिए पहुंचे भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। -------------------- चौकीदार बनकर पंजे से तिजोरी को बचाऊंगा: मोदी आईबीएन-7 | Feb 23, 2014 लुधियाना। बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी आज पंजाब के लुधियाना में रैली की। रैली के दौरान मोदी कांग्रेस पर जमकर बरसे। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस की पहचान बन गया है भष्टाचार। ये पार्टी सिर्फ एक आदमी की पार्टी रह गई है। खुद के प्रधानमंत्री बनने पर मोदी ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नहीं चौकीदार बनकर बैठूंगा और देश की तिजोरी पर पंजा नहीं पड़ने दूंगा। मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी की दोस्ती से कांग्रेस परेशान है। यहां उसकी बांटों और राज करो की नीति फल रही है। मोदी ने कहा, कि पूरी एबीसीडी, कांग्रेस के भ्रष्टाचार की पहचान बन गई है। ए से आदर्श घोटाला, बी से बोफोर्स घोटाला, सी से कोयला घोटाला। कांग्रेस के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने कहा

नेता और जनता दोनों के मन में निस्वार्थ भाव से, देश का भाग्य बदल सकता है -प.पू. सरसंघचालक श्री मोहन जी भागवत

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भोपाल, दिनांक 23 फरवरी 2014 प.पू. सरसंघचालक श्री मोहन जी भागवत द्वारा मॉडल स्कूल भोपाल में दिए उद्बोधन के अंश - आज का समता व शारीरिक कार्यक्रम बहुत अच्छा हुआ | किन्तु यदि संतोष हो जाए तो उसका अर्थ होता है विकास पर विराम और अच्छा होने की क ोई सीमा रेखा नहीं होती | किसी व्यक्ति, संस्था अथवा देश की सफलता के लिए भी यही द्रष्टि आवश्यक है | नेता के अनुसार चलने वाले अनुयाई भी आवश्यक हैं | रणभूमि में ताना जी मौलसिरे की मृत्यु के बाद यदि अनुयाईयों में शौर्य नहीं होता तो क्या कोंडाना का युद्ध जीता जा सकता था ? नेता और जनता दोनों के मन में निस्वार्थ भाव से बिना किसी भेदभाव के देश को उठाने का भाव हो तो ही देश का भाग्य बदल सकता है | संघ ने शाखा के माध्यम से घर घर, गाँव गाँव में शुद्ध चरित्र वाले, सबको साथ लेकर चलने वाले निस्वार्थ लोग खड़े करने का कार्य हाथ में लिया है | समाज का चरित्र बदले तो ही देश का भाग्य बदलेगा | शारीरिक कार्यक्रम कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं है, हिन्दू समाज को शक्ति संपन्न बनाने के लिए हैं | आवश्यक गुण संपदा इन्हीं कार्यक्रमों से प्राप्त होती है | राष्ट्र उन

भारत की आजादी का अश्वमेध - रामबहादुर राय

अंग्रेजों के तीसरे मोर्चे को नाकाम किया था पटेल ने - रामबहादुर राय अंग्रेज भारत को आजाद करने से पहले एक कुटिल नीति पर चल रहे थे। उनकी योजना थी कि आजाद करने से पहले भारत को तीन हिस्से में बांट दें। हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और प्रिंसतान। रजवाड़े और रियासतों को वे प्रिंसतान बनाना चाहते थे।उस समय 565 ऐसे अलग-अलग देशभर में फैले रजवाड़े थे। उनका आकार विभि था। कोई तो यूरोप के देशों के बराबर थे। तो किसी का आकार पहाड़ी पर किसान की जो जोत होती है, उतना ही था। 1935 के भारत सरकार अधिनियम में इन रजवाड़ों को सीधे वायसराय के अधीन कर दिया गया था। उन राजे-महाराजों को ब्रिटिश सम्राज्य के प्रतिनिधि की उपाधि दी गई थी। उनके मामले को देखने के लिये वायसराय के अधीन एक राजनीतिक विभाग बनाया गया था। उन्हें संवैधानिक संरक्षण प्राप्त था। अनेक रियासतों की अपनी फौज थी, जिन्हें ब्रिटिश सेना ने प्रशिक्षित कर रखा था। असंभव को संभव ये रियासतें भारत को विखंडित करने के खतरों से भरी हुई थी। उन्हें अंग्रेजों का संरक्षण प्राप्त था। इस कारण आजाद भारत में पहले दिन से ही गृह युद्ध का खतरा मंडरा रहा था। उसे देख-समझ कर,परवाह न

कम्बोदिया में भी हैं शंकराचार्य

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कौंडिन्य ने बसाया था कम्बोदिया को कम्बोदिया में भी हैं शंकराचार्य - पाथेयकण से https://www.facebook.com/pages/Patheykan भारत में आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों कोनों में मठ स्थापित कर उनमें अपने प्रतिनिधि नियुक्त किये थे। उनके अतिरिक्त कांची मठ के पूज्य शंकराचार्य भी हिन्दू समाज के सर्वाधिक प्रतिष्ठित धर्माचार्यों में से हैं। भारत ही की तरह कम्बोदिया में भी शंकराचार्य हैं और उनका भी पूरे देश में वही सम्मान और प्रतिष्ठा है, जो भारत में पूज्य शंकराचार्यों का है। गत दिनों कम्बोदिया और थाईलैण्ड की यात्रा पर गये वनवासी कल्याण आश्रम के प्रतिनिधिमण्डल में शामिल मेजर एस.एन.माथुर ने उक्त जानकारी दी। मेजर माथुर कल्याण आश्रम के विदेश विभाग के प्रभारी हैं। उन्होंने बताया कि कम्बोदिया में शंकराचार्य को "शंकराज' कहा जाता है और उनकी भारत-भूमि का दर्शन करने की बड़ी तीव्र इच्छा है। उनका शिष्य समुदाय भी हैजिसकी शिक्षा संस्कृत में हुई है। देश के सभी राज्याधिकारी उनका सम्मान करते हैं तथा उनसे परामर्श लेते हैं। कम्बोदिया में सैकड़ों मन्दिर हैं। विश्व का सबसे बड़ा मन्दिर अंगकोरवाट भी इसी द