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अप्रैल 8, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने दी किसानो को ऐतिहासिक राहत

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नरेन्द्र मोदी सरकार ने दी किसानो को ऐतिहासिक राहत कोटा 08 अप्रैल। भाजपा कोटा शहर जिला अध्यक्ष हेमन्त विजयवर्गीय, वरिष्ठ भाजपा नेता अरविन्द सिसोदिया, कोटा देहात जिला अध्यक्ष जयवीरसिंह अमृतकुआ एवं पूर्व जिला अध्यक्ष प्रहलाद पंवार आदि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किसानों को राहत देने के लिये उठाये कदमों का स्वागत करते हुये कहा ” यह देश के इतिहास में किसानों के हित के लिये उठाया गया सबसे बड़ा ऐतिहासिक कदम है। “ उन्होने कहा ” किसानों पर प्राकृतिक आपदा और फसलों के खराबे का सिलसिला तो अनादी काल से चल रहा है। मगर कभी भी किसानों के हित के लिये इतना बड़ा काम नहीं हुआ। विगत दस वर्षों में कांग्रेस के मनमोहनसिंह राज में किसान लगातार परेशान रहा , आत्म हत्यायें करता रहा और प्राकृतिक आपदा ग्रस्त रहा मगर उनके कान पर कभी जूं तक नहीं रेंगी थी। अब उन्हे किसानों में भय उत्पन्न करना बंद कर देना चाहिये।“ सीसौदिया ने बताया कि ” अभी तक 50 प्रतिशत से ज्यादा फसल नुकसान होने पर मुआवजा मिला करता था लेकिन अब मोदी सरकार ने तय किया है कि 33 फीसदी फसल का नुकसान होने पर मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही किसानों

धर्मान्तरण अनीश्वरीय अपराध है – इन्द्रेश कुमार

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धर्मान्तरण अमानवीय, अलोकतांत्रिक और अनीश्वरीय अपराध है – इन्द्रेश कुमार कुशलगढ़ (विसंकें). राजस्थान के प्रवेश द्वार कुशलगढ़ में देश के ख्यातनाम संतों और राष्ट्रीय चिंतकों के सानिध्य में असंख्य लोगों ने स्वधर्म में बने रहने दुर्व्यसनों का त्याग करने, अपने गांवों को रूद्राक्ष गांव बनाने की वचनबद्धता व्यक्त करते हुए राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद् की प्रेरणा से एक से पांच अप्रैल के मध्य आयोजित रूद्राक्ष महाभिषेक में भाग लिया. वैदिक ऋचाओं के बीच सवा लाख रूद्राक्ष से निर्मित पांच फीट उंचे शिवलिंग पर अनुष्ठान के दौरान वेदज्ञ विप्रवरों के सानिध्य में महाभिषेक के दौरान 108 दम्पतियों ने रूद्राक्ष शिवलिंग पर अभिषेक किया. जिसमें राजस्थान सहित मध्यप्रदेश और गुजरात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेते हुए पूर्णाहुति पर उमड़ी जनगंगा में श्रद्धालुओं ने हाथ खड़े कर पांच संकल्पों में वृक्षों की रक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन, शिक्षा से वंचितों को सरस्वती के मंदिरों तक पहुंचाने, दुर्व्यसनों को त्यजने, धर्म संस्कृति और परमपराओं पर दृढ़ रहते हुए धर्मान्तरण कर गये समाज बन्धुओं को स

राष्ट्रीयता से समझौता नहीं : प्रो. राकेश सिन्हा

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भोपाल (विसंकें). दिल्ली विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं नीति प्रतिष्ठान के संचालक प्रो राकेश सिन्हा ने कहा कि जब-जब चिंतन और विमर्श की बात हुई तो एक तरफा चिंतन हुआ, जबकि डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार ने जो बीज बोया था, वह अब पेड़ बन गया है, क्योंकि उन्होंने कभी भी संबंधों के नाम पर राष्ट्रीय विचारधारा से समझौता नहीं किया. वह समन्वय भवन में आयोजित व्याख्यानमाला के दूसरे एवं समापन दिवस पर संबोधित कर रहे थे. श्री उत्तमचंद इसराणी स्मृति न्यास द्वारा डॉ हेडगेवार: एक शाश्वत विचार विषय पर आयोजित व्याख्यान की श्रृंखला में प्रो सिन्हा ने अनेक अनछुए पहलुओं को उजागर किया और डॉ हेडगेवार की राष्ट्रवादी आत्मा को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक ऐसा संगठन है, जिसके बारे में लोग सुनीसुनाई बातें कहते हैं, लेकिन संघ को वास्तव में समझना है तो संघ में आना होगा. उन्होंने वर्धा कैंप का उदाहरण देते हुए बताया कि जब देश में आंदोलन चल था, और गांधीजी अपना हरिजन आंदोलन चला रहे थे, उसी दौरान वर्धा कैंप में वे जमनालाल बजाज के साथ पहुंचे. जब उन्होंने किसी एक से उसकी जाति पूछी

यही जिंदगी हे !

यही जिंदगी हे     ! - वर्षा साहनी ( फेसबुक वाल से ) ज़िंदगी के 20 वर्ष हवा की तरह उड़ जाते हैं. फिर शुरू होती है नौकरी की खोज .  ये नहीं वो , दूर नहीं पास . ऐसा करते 2-3 नौकरीयां छोड़ते पकड़ते , अंत में एक तय होती है. और ज़िंदगी में थोड़ी स्थिरता की शुरूआत होती है. और हाथ में आता है पहली तनख्वाह का चेक , वह बैंक में जमा होता है और शुरू होता है अकाउंट में जमा होने वाले कुछ शून्यों का अंतहीन खेल. इस तरह 2-3 वर्ष निकल जाते हैँ  .  'वो' स्थिर होता है. बैंक में कुछ और शून्य जमा हो जाते हैं. इतने में  आयु पच्चीस वर्ष हो जाते हैं. विवाह की चर्चा शुरू हो जाती है. एक खुद की या माता पिता की पसंद की लड़की से यथा समय विवाह होता है और ज़िंदगी की राम कहानी शुरू हो जाती है. शादी के पहले 2-3 साल नर्म , गुलाबी , रसीले और सपनीले गुज़रते हैं .  हाथों में हाथ डालकर बातें और रंग बिरंगे सपने . पर ये दिन जल्दी ही उड़ जाते हैं. और इसी समय शायद बैंक में कुछ शून्य कम होते हैं. क्योंकि थोड़ी मौजमस्ती, घूमनाफिरना , खरीदी होती है. और फिर धीरे से बच्चे के आने की आहट होती है और वर्ष भर में प