बंगाल में भाजपा विजय पर विदेशी मीडिया का नकारात्मक स्वर



 विदेशी मीडिया के एक वर्ग ने भाजपा की इस जीत को लेकर कुछ चिंताएँ और आलोचनात्मक टिप्पणियाँ भी की हैं। इन "निगेटिव" या विश्लेषणात्मक रिपोर्टों में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है:-

1- विदेशी मीडिया की चिंताएँ और नकारात्मक स्वर:

* लोकतंत्र के क्षरण का दावा: Al Jazeera ने एक तीखे ओपिनियन पीस में लिखा कि भाजपा की यह जीत "भारतीय लोकतंत्र के गंभीर क्षरण" को दर्शाती है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि विपक्ष को कमजोर करने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया है।

* मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप: DW (Deutsche Welle) और BBC News ने चुनाव से पहले हुई मतदाता सूची के "विशेष गहन पुनरीक्षण" (SIR) पर सवाल उठाए। इन रिपोर्टों में कहा गया कि लाखों मतदाताओं, जिनमें बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक (मुस्लिम) शामिल थे, के नाम हटा दिए गए, जिससे चुनावी नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।

* धार्मिक ध्रुवीकरण: The New York Times और Al Jazeera ने अपनी रिपोर्टों में भाजपा की जीत को "हिंदू राष्ट्रवाद के विस्तार" और "धार्मिक ध्रुवीकरण" का परिणाम बताया। उन्होंने चिंता जताई कि इससे राज्य के सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ सकता है।

* हिंसा की खबरें: कुछ विदेशी सोशल मीडिया चैनलों और रिपोर्टों में चुनाव के बाद की छिटपुट हिंसा और तनाव का जिक्र किया गया है, जिसे लोकतंत्र के लिए एक नकारात्मक संकेत माना गया।

* विपक्ष की शिकायतों को तवज्जो: The Guardian और अन्य पश्चिमी मीडिया संस्थानों ने ममता बनर्जी के उन आरोपों को प्रमुखता दी जिनमें उन्होंने चुनाव आयोग पर "पक्षपाती" होने का आरोप लगाया था, हालांकि इन आरोपों के पुख्ता सबूत नहीं दिए गए थे। 

निष्कर्ष: जहाँ एक ओर विदेशी मीडिया ने इसे मोदी की राजनीतिक कुशलता माना है, वहीं दूसरी ओर उदारवादी और पश्चिमी मीडिया संस्थानों ने इसे 'चेक एंड बैलेंस' की कमी और 'बहुसंख्यकवादी राजनीति' के बढ़ते प्रभाव के रूप में पेश किया है। 

==========

बांग्लादेश के मीडिया और वहां के राजनीतिक हलकों में पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को लेकर काफी हलचल और मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखी गई हैं। वहां के प्रमुख अखबारों जैसे The Daily Star, Prothom Alo, और Dhaka Tribune ने इस बदलाव को भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक नया मोड़ बताया है। 

## बांग्लादेशी मीडिया की प्रमुख रिपोर्ट और विश्लेषण:

* 'पुशबैक' (वापसी) का डर: Dhaka Tribune और अन्य मीडिया आउटलेट्स ने प्रमुखता से रिपोर्ट दी है कि भाजपा की जीत के बाद बांग्लादेश में अवैध घुसपैठियों की वापसी (Pushback) को लेकर गहरी चिंता है। वहां के कुछ सांसदों (जैसे अख्तर हुसैन) ने चेतावनी दी कि यदि बंगाल की नई सरकार घुसपैठियों को वापस भेजती है, तो बांग्लादेश में एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो सकता है।

* तीस्ता जल संधि की उम्मीद: The Daily Star के विश्लेषण के अनुसार, ममता बनर्जी को तीस्ता जल समझौते में मुख्य बाधा माना जाता था। अब चूंकि राज्य और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार (डबल इंजन) है, इसलिए बांग्लादेश के मीडिया में यह उम्मीद जताई जा रही है कि दशकों से लंबित तीस्ता नदी जल समझौता अब सुलझ सकता है।

* राजनीतिक और वैचारिक बदलाव: Prothom Alo ने इसे बंगाल की राजनीति में एक "ऐतिहासिक और संरचनात्मक बदलाव" बताया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि ममता बनर्जी के "बांग्लादेश-अनुकूल" शासन का अंत ढाका के लिए अपनी विदेश नीति में बदलाव करने की चुनौती पेश करेगा।

* सीमा सुरक्षा और कड़ाई: बांग्लादेशी मीडिया में यह खबरें भी रहीं कि भाजपा सरकार सीमा पर बाड़ लगाने और पहचान पत्र (ID) की जांच में कड़ाई करेगी, जिससे सीमा पार आवाजाही और व्यापार प्रभावित हो सकता है। 

## बांग्लादेशी सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया:

* BNP (सत्ताधारी पार्टी) का रुख: बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी ने भाजपा को जीत पर बधाई दी और उम्मीद जताई कि इससे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार होगा, विशेषकर पानी के बंटवारे जैसे मुद्दों पर।

* गृह मंत्री का बयान: बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने 'पुशबैक' की आशंकाओं को खारिज करने की कोशिश की, लेकिन बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। 

संक्षेप में, बांग्लादेशी मीडिया इस जीत को एक ओर "खतरे की घंटी" (घुसपैठ के मुद्दे पर) और दूसरी ओर "अवसर" (तीस्ता समझौते पर) के रूप में देख रहा है।


टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

10 मई, 1857 की क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर : जनक्रांति: 1857

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

खींची राजवंश : गागरोण दुर्ग

पराक्रमी महाराणा प्रताप Mighty Maharana Pratap

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

गोरक्षा आन्दोलन 1966 जब संतों के खून से नहाई थी दिल्ली, इंन्दिरा गांधी सरकार ने की थी गोलीबारी

भारत की जनता ने सनातन विरोधियों को कड़ा संदेश दिया है – अरविन्द सिसोदिया

सर्वप्रथम 27 दिसम्बर 1911 को गाया गया था राष्ट्रगान जन गण मन अधिनायक जय है jan-gan-man